गढ़ाकोटा नगर में चार वार्ड चौराहा पर सजता हैं माता का दरबार
गढाकोटा। सागर जिले के गढाकोटा के चार वार्ड स्थित साहू चौराहा क्षेत्र एक बार फिर गहरी आस्था और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया, जहां मां बीजासेन दरबार में वर्षों पुरानी परंपरा के तहत जवारे बोने और पूजन का आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
यह धार्मिक परंपरा स्वर्गीय करोड़ी साहू जी के निवास से जुड़ी हुई है, जिसे उनके परिवार और समाजजन पिछले कई दशकों से निरंतर निभाते आ रहे हैं।
चैत्र मास के पावन अवसर पर परमा से नवमी तक चलने वाले इस आयोजन में घट स्थापना के साथ ही विधि-विधान से जवारे बोए गए।
प्रतिदिन सुबह-शाम भक्तजन बड़ी संख्या में पहुंचकर मां की पूजा-अर्चना करते रहे और दरबार में भक्ति का वातावरण बना रहा। भजन-कीर्तन और आरती के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था प्रकट की।
अष्टमी के दिन विशेष आकर्षण का केंद्र रही सार्वजनिक महाआरती, जिसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए।
भक्तिमय माहौल में गूंजते भजनों और जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। महिलाओं ने भक्ति गीत गाकर कार्यक्रम को और अधिक भावपूर्ण बना दिया।
नवमी के दिन परंपरा अनुसार विशेष पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने खप्पर लेकर और महिलाएं सिर पर घट रखकर खैर माता मंदिर की ओर प्रस्थान किया। यहां पूजन-अर्चना के उपरांत सभी ने सामूहिक रूप से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात सुनार नदी में विधिवत रूप से जवारों का विसर्जन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के आयोजकों में बेनी प्रसाद साहू एवं एन.आर. साहू ने बताया कि उनके पिताजी के निधन के बाद भी इस परंपरा को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में समाज के सभी वर्गों का विशेष सहयोग मिलता है, जिससे यह धार्मिक कार्यक्रम हर वर्ष और अधिक भव्य रूप लेता जा रहा है।
इस आयोजन को सफल बनाने में आलोक साहू (पार्षद) देवास, डॉ. अजय साहू सागर ,बंटी साहू , रम्मू मामा, पत्तम मेम्बर,रमेश साहू शिक्षक रामरतन पटेल,नितिन साहू, पत्रकार ,गोकल साहू,,विपिन साहू, अनिल साहू, नरेन्द्र मिश्रा इंजीनियर अनमोल साहू देवास, सहित अनेक श्रद्धालुओं का सराहनीय योगदान रहा। समापन अवसर पर विशेष आरती का आयोजन किया गया और शाम को जवारों का विसर्जन कर कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में भक्ति, आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने इस परंपरा को और भी जीवंत बना दिया।

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