गुना में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल: उपचार में देरी से 6 वर्षीय मासूम की मौत

गुना। जिले के ग्रामीण अंचल में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां समय पर सही चिकित्सा न मिलने के कारण 6 वर्षीय मासूम हर्षिता लोधा ने दम तोड़ दिया।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, हिलगना निवासी रामनारायण लोधा की नातिन हर्षिता को सुबह करीब 6 बजे घर के पास खेलते समय एक जहरीले सांप ने डंस लिया। परिजनों ने घबराहट में बच्ची को अस्पताल ले जाने के बजाय ग्राम बोरखेड़ा स्थित एक देव स्थल पर ले जाने का निर्णय लिया।

झड़-फूंक के चक्कर में गंवाई जान

परिजनों का काफी समय झाड़-फूंक और अन्य पारंपरिक उपायों में व्यतीत हो गया। इस बीच, बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती रही। जब अंततः परिजनों को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ और वे उसे अस्पताल लेकर निकले, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्ची ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया।

हर मिनट है कीमती

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में इलाज का हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) दिया जाए, तो अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है।

जागरूकता की अपील

इस घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डाल दिया है। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में अंधविश्वास या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, बल्कि तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें और त्वरित चिकित्सकीय उपचार लें।

इस दुखद घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और पारंपरिक मान्यताओं के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को उजागर किया है।