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प्रशासनिक सिस्टम की चौंकाने वाली गलती—मृत घोषित व्यक्ति को “नया जन्म”, जिम्मेदारी से बचते दिखे अधिकारी

खबर:
डबरा। प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक मृत व्यक्ति को कागजों में “जिंदा” कर दिया गया और मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह उसका जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।

मामला डबरा अनुविभाग के महाराजपुर पंचायत की दफाई का है, जहां निवासी किशन आदिवासी का निधन 20 जनवरी 2023 को हो चुका था। परिजनों द्वारा 13 मार्च 2026 को मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन जिम्मेदार विभाग की भारी चूक के चलते मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के बजाय 31 मार्च 2026 को मृतक का जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि यह आदेश छीमक/करयावटी क्षेत्र के नायब तहसीलदार संजय अगरैया द्वारा जारी किया गया। यानी जिस व्यक्ति की मौत हो चुकी है, उसे सरकारी रिकॉर्ड में “नया जन्म” दे दिया गया।

जब इस गंभीर लापरवाही पर नायब तहसीलदार से सवाल किया गया, तो उन्होंने पूरी जिम्मेदारी लोकसेवा केंद्र पर डाल दी। वहीं लोकसेवा केंद्र के अधिकारी महेंद्र राय ने उल्टा नायब तहसीलदार पर ही ठीकरा फोड़ते हुए खुद को इस गलती से अलग बताया। दोनों पक्षों के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल चलता रहा, लेकिन सवाल जस का तस खड़ा है कि आखिर इतनी बड़ी चूक हुई कैसे?

इस घटना ने न केवल सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि सिस्टम में जांच और सत्यापन की प्रक्रिया कितनी कमजोर हो चुकी है। यदि एक मृत व्यक्ति को “जिंदा” किया जा सकता है, तो आम लोगों के दस्तावेज कितने सुरक्षित हैं, यह एक बड़ा सवाल बन गया है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में किस पर कार्रवाई करता है और क्या इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाता है या फिर मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।