कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघ शावकों की मौत: क्या संकट में है जंगल का राजा?

लोकेशन: मध्यप्रदेश, मंडला

रिपोर्टर: योगेश चौरसिया, 9425855349

मध्यप्रदेश के मंडला जिले में स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। इस महीने अब तक तीन बाघों की मौत हो चुकी है, जिसमें 3 अप्रैल को बाघिन टी-122 की मौत, 21 अप्रैल को एक नर शावक, 23 अप्रैल को एक अन्य नर शावक और 25 अप्रैल को एक नर शावक का मृत शरीर मिला है। पिछले आठ महीनों में रिजर्व में 10 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत दर्ज की जा चुकी है।

घटना की सूचना मिलते ही कान्हा टाइगर रिजर्व के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी गई है। सभी की नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जंगल के भविष्य पर सवाल

कभी बाघों की दहाड़ और हरियाली के लिए प्रसिद्ध यह धरती आज सन्नाटे में डूबी नजर आ रही है। सरही जोन में एक ही मां के तीन बाघ शावकों की मृत्यु ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शावकों की मौत का कारण फेफड़ों में संक्रमण बताया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि यह संक्रमण फैला कैसे? और समय रहते इलाज क्यों नहीं हो पाया?

वन्यप्राणी संरक्षक की प्रतिक्रिया

प्रधान मुख्य वन्यप्राणी संरक्षक, समिता राजौरा के मुताबिक, शावकों का पोस्टमार्टम कराया गया है जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई है। एक अन्य शावक और मादा टाइग्रेस का इलाज जारी है। सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन क्या सिर्फ रिपोर्ट का इंतजार काफी है?

स्थानीय लोगों की चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह बाघों की मौत होती रही, तो वो दिन दूर नहीं जब कान्हा सिर्फ किताबों और तस्वीरों में सिमट कर रह जाएगा। इसका सबसे बड़ा असर यहां के हजारों लोगों पर पड़ेगा, जिनकी रोजी-रोटी इस जंगल और पर्यटन पर टिकी हुई है।

कान्हा नेशनल पार्क, जो कभी भारत की शान हुआ करता था, आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझता नजर आ रहा है। तीन मासूम शावकों की मौत सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा संकेत है उस लापरवाही का, जो धीरे-धीरे इस जंगल को खोखला कर रही है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते चेत जाएगा, या फिर लापरवाही का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा, और एक दिन बाघों की दहाड़ हमेशा के लिए खामोश हो जाएगी।