मुहर्रम पर इबादत, अकीदत और अमन का पैगाम
सिहावल में बड़े अदबो-एहतराम के साथ मनाया गया आशूरा, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने भी की शिरकत
सिहावल | STATE NEWS AI JOURNALIST SURAJ KUMAR
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में मुहर्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन आशूरा (10वीं मुहर्रम) शुक्रवार, 26 जून को सिहावल सहित पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, अकीदत और शांतिपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर धार्मिक आयोजन हुए, जहां लोगों ने कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए इबादत की और अमन-चैन की दुआ मांगी।
मुहर्रम के अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) सदस्य कमलेश्वर पटेल भी सिहावल पहुंचे। उन्होंने विभिन्न धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर लोगों से मुलाकात की तथा आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और शांति बनाए रखने का संदेश दिया।
मुहर्रम इस्लामी वर्ष 1448 हिजरी का पहला महीना है, जो त्याग, सत्य, न्याय और बलिदान की याद दिलाता है। कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों द्वारा अन्याय के विरुद्ध तथा इंसाफ और सत्य की रक्षा के लिए दी गई महान कुर्बानी को आज भी पूरी दुनिया श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करती है।
आशूरा के दिन लोगों ने विशेष इबादत की, दुआएं मांगीं तथा मानवता, शांति और देश में सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनेक लोगों ने 9वीं और 10वीं अथवा 10वीं और 11वीं मुहर्रम का रोज़ा रखकर आत्मसंयम, नेक अमल और इंसानियत का संदेश दिया।
प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। सिहावल तहसीलदार एवं चौकी प्रभारी पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में गश्त करते रहे। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई, जिससे पूरे आयोजन के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी रही।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की सतर्कता और बेहतर व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पूरे पर्व के दौरान कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
कर्बला का संदेश आज भी प्रेरणास्रोत
कर्बला की शहादत केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, सत्य, न्याय, धैर्य और मानवता की रक्षा का अमर प्रतीक है। हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी आज भी पूरी दुनिया को यह प्रेरणा देती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और इंसाफ का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। मुहर्रम का पर्व समाज को आपसी प्रेम, भाईचारे, सहिष्णुता और इंसानियत के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।
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