राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने सदन में उठाया टीईटी का मामला
सांसद ने कहा-शिक्षकों के मान और सम्मान और चिंता से जुड़ा मामला है, सरकार दे राहत

बड़वानी -राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने  सदन में शिक्षक पात्रता परीक्षा से प्रभावित शिक्षकों के मामले में सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सभापति मुझे देश के शिक्षक भाइयों और बहनों के संबंध में एक महत्वपूर्ण सवाल पूछने का आपने जो समय दिया है, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। सोलंकी ने कहा कि मैं 20 साल तक शिक्षक रहा हूं। इसलिए शिक्षकों का दर्द बहुत अच्छे तरह से समझता हूं। उन्होंने सदन में कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम लागू होने के पश्चात शिक्षक पात्रता परीक्षा ली जाना तो ठीक है। लेकिन शिक्षा के अधिकार अधिनियम के लागू होने से पहले के नियुक्त शिक्षकों की भी पात्रता परीक्षा ली जा रही है। आज इससे प्रभावित शिक्षकों को 20 से 25 साल नौकरी करते हुए हो गए हैं। ऐसे में उनकी पात्रता परीक्षा लेना लाखों शिक्षक भाइयों और बहनों के मान और सम्मान से जुड़ा सवाल है। साथ ही यह चिंता का भी विषय है। उन्होंने शिक्षा मंत्री से पूछा की कि इस संबंध में सरकार क्या कदम उठा रही है। डॉ. सोलंकी द्वारा सदन में शिक्षकों के संबंध में उठाए प्रश्न पर मप्र ट्राईबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने आभार माना। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर मंडला, सचिव हेमेंद्र मालवीय, जिला अध्यक्ष कसर सिंह सोलंकी ने कहा कि राज्य सभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने लगातार दो दिन तक हमारी टीम की दिल्ली में मदद की और टीईटी की अनिवार्यता से उपजे संकट की घड़ी में दिल खोलकर मदद की। इस अवसर पर शैलेंद्र यादव, निलेश भावसार, रवि त्रिपाठी, आशीष भावसार, राजेश जोशी उपस्थित रहे। वहीं मध्य प्रदेश के शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। जिसमें शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े गंभीर मानवीय संकट से अवगत कराया।