पीएमयूएमएस की मानवीय पहल: 11 दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को मिला ₹3.25 करोड़ का आर्थिक संबल
सीहोर-अहमदपुर (बसीम उद्दीन)
।। मध्य प्रदेश में संयुक्त राष्ट्र और शिक्षा एवं जनजातीय विभाग के कर्मचारियों के लिए पर्यटन पीएमयूएमएस शिक्षक संगठन की एक पर्यटक संस्था और धार्मिक भवन परिवार के लिए बड़ी राहत यात्रा सामने आई है। संगठन द्वारा संचालित "नोमिनी सहायता योजना" के माध्यम से अब तक प्रदेश के 11 दिवंगत के परिवारों को कुल ₹3 करोड़ 25 लाख से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
संगठन के भोपाल के अध्यक्ष ऋतुराज तिवारी ने बताया कि योजना के तहत यदि शिक्षा विभाग या जनजातीय विभाग का कोई भी कर्मचारी सेवाकाल के दौरान किसी भी तरह से वंचित हो जाता है, तो पीएमयूएमएस के सभी पंजीकृत सदस्य अधिकार से लेकर ₹45 से लेकर ₹50 तक की राशि से सीधे संबंधित कर्मचारी के निजी क्षेत्र (नोमिनी) के बैंक खाते में ऑनलाइन जमा किया जा सकता है। प्रत्येक परिवार को लगभग 1.15 लाख पंजीकृत सदस्यों की राशि से लगभग ₹26 से ₹27 लाख तक की सहायता राशि प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया प्रत्येक माह की 5 से 20 तारीख के बीच पूरी तरह से ऑफ़लाइन संचालित की जाती है। संगठन की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से शिक्षा एवं जनजातीय विभाग के कर्मचारी निःशुल्क पंजीकरण कर सकते हैं।
जून 2026 में चार परिवारों को 1.09 करोड़ रुपये की मदद मिली
जून 2026 में संगठन द्वारा चार व्यक्तिगत कर्मचारियों के परिवारों को लगभग ₹1 करोड़ 9 लाख की सहायता राशि उपलब्ध करायी गयी। इसमें बैतूल के स्वर्गीय श्यामकिशोर सोनी के नॉमिनी को ₹27.50 लाख , देवास के स्वर्गीय चंद्रप्रकाश जोशी के नॉमिनी को ₹27.50 लाख , बालाघाट के स्वर्गीय कृष्ण कुमार करंडे के नॉमिनी को ₹27.40 लाख और दमोह के स्वर्गीय अमित असाटी के नॉमिनी को ₹27 लाख की सहायता प्रदान की गई।
दिसंबर 2025 से शुरू हुई योजना
पीएमयूएमएस के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद टैगोर ने बताया कि यह नॉमिनी सहायता योजना दिसंबर 2025 से शुरू की जाएगी। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में इस प्रकार की साझीदारी और डिजिटल मानव सहायता व्यवस्था पहली बार लागू हो रही है। यदि ऐसी शुरुआत पहले होती, तो कई दिव्यांग कर्मचारियों के परिवारों को समय पर आर्थिक संबल मिल सकता था।
योजना के संस्थापक शशि खरे की इस सोच को ऑर्गनाइजेशन के कर्मचारियों और उनके परिजनों के हित में एक अनुकरणीय कदम बताया गया है। वहीं सह-संस्थापक एवं प्रांत अध्यक्ष मुरली मनोहर अजारिया ने कहा कि समाज के प्रति समर्पित इस सेवा-भावी के संचालक एवं कर्मचारी इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
पीएमयूएमएस का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं, बल्कि समाज में सहयोग, प्रशिक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी मजबूत बनाती हैं। ऑर्गनाइजेशन की यह पहल आज हजारों कर्मचारियों के लिए विश्वसनीयता और सुरक्षा का एक नया मॉडल बनकर उभर रही है।
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