टीकमगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष अयोग्य घोषित, पद से हटाया

5 साल चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, 11 लाख की दुकान पौने 2 लाख में देने पर कार्रवाई

टीकमगढ़ नगर पालिका के अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार उर्फ पप्पू मलिक को राज्य सरकार के नगरीय आवास और विकास विभाग ने पद से हटा दिया है। अब्दुल गफ्फार के अगले पांच साल तक चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा दी है।

नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव शीलेंद्र सिंह के जारी 19 पन्नों के आदेश में पप्पू मलिक के खिलाफ 8 आरोप सही पाए गए हैं। जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और नियमों को ताक पर रखकर काम किए, जिससे नगर पालिका परिषद को लाखों रुपए का चूना लगा है।

दुकानों के आवंटन और नियुक्तियों में धांधली

जांच रिपोर्ट के अनुसार, मां कर्माबाई मार्केट की दुकानों के आवंटन में गड़बड़ी की गई। ऑनलाइन टेंडर के बजाय ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाई गई और विज्ञापनों में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई।

करीब 11 लाख रुपए की दुकान को महज 1.78 लाख रुपए में दे दिया गया, जिससे सरकार को 18.89 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इसके अलावा, नियमों के खिलाफ जाकर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की भर्ती की गई और उन्हें लाखों रुपए का भुगतान किया गया।

घटिया निर्माण और महंगी खरीदारी

अध्यक्ष पर यह भी आरोप है कि उन्होंने संजीवनी क्लीनिक का निर्माण ऐसे इलाके में करवा दिया जहां पानी भर जाता है, जिसकी वजह से 21 लाख रुपए की लागत से बना क्लीनिक बंद पड़ा है।

साथ ही, स्ट्रीट लाइट और फिटकरी (एलम) जैसी चीजों की खरीदारी में भी जमकर धांधली हुई। बाजार में 6.50 रुपए किलो मिलने वाली फिटकरी को बहुत ऊंचे दामों पर खरीदा गया और जैम पोर्टल के नियमों की अनदेखी कर पसंदीदा फर्मों को फायदा पहुंचाया गया।

20 लाख रुपए की वसूली और बर्खास्तगी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पप्पू मलिक का पद पर बने रहना लोकहित में नहीं है। इसीलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। विभाग ने उनसे और मामले में शामिल अन्य अधिकारियों से 20.82 लाख रुपए वसूलने के आदेश दिए हैं। यह राशि सरकारी खजाने में जमा कराई जाएगी। इस बड़ी कार्रवाई के बाद टीकमगढ़ की राजनीति में खलबली मच गई है।