प्राइवेट डग्गामार बसों के दबाव में नहीं चल पाती  रोडवेज की सरकारी बसें    

पचास वर्ष से अधिक समय से प्रयागराज जीरोरोड डिपो की रोडवेज बसें चाकघाट प्रयागराज के लिए चलती रही है यहां तक कि माघ मेला एवं कुंभ पर्व पर चाकघाट में रोडवेज की अस्थाई बस स्टैंड बना कर अतिरिक्त बसें चलायी जाती रही हैं। चाकघाट से मिर्जापुर, बनारस, लखनऊ,कानपुर,प्रयागराज आदि के लिए बसें  लगातार चलती रहीं हैं किन्तु अब इस मार्ग पर चाकघाट से प्रयागराज के लिए जब से डग्गामार अवैध बसों  का संचालन शुरू हुआ है तब से इस रोड पर सरकारी रोडवेज की बसें नियमित नहीं चल पा रही हैं। 

आरोप है कि जीरोरोड डिपो की रोडवेज अधिकारियों कर्मचारियों के द्वारा अवैध बस संचालकों के दबाव एवं प्रलोभन में रोडवेज बसों का संचालन चाकघाट से प्रयागराज के लिए बंद कर दिया जाता है। इससे यहां एक और यात्रियों का अवैध बस संचालकों के द्वारा शोषण होता है वही रोडवेज विभाग के राजस्व की हानी हो रही है। इस मामले में रोडवेज विभाग के लोगों की मंशा अनुचित तरीके से प्राइवेट बस संचालकों को लाभ पहुंचाना रहता है।उत्तर प्रदेश शासन परिवहन विभाग के अधिकारियों एवं राज्य सरकार से आग्रह है कि प्रयागराज से चाकघाट के लिए  नियमित रूप से रोडवेज की बसें चलाई जाए।

मध्य प्रदेश की अंतिम सीमा चाकघाट होने के कारण मध्य प्रदेश एवं दक्षिण भारत से आने वाले यात्री चाकघाट में उतरते हैं और वहां से तीर्थराज प्रयाग जाने के लिए उन्हें सरकारी वाहन नहीं मिलती जिससे वे मजबूर होकर प्राइवेट अवैध संचालित बसों पर सवार होने के लिए बाध्य होते हैं, और उत्तर प्रदेश की सीमा में उन्हें अवैध संचालित वाहनों द्वारा शोषण का शिकार होना पड़ता है।