हटा: देवों के देव महादेव दूल्हा भेष धारी गौरी शंकर मंदिर प्रांगण में आयोजित श्री मद भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास पंडित डॉक्टर अनिल शास्त्री जी ने संस्कार और बच्चों के निर्माण पर गहन विचार प्रस्तुत किए। दद्दा कला मंच से प्रवाहित उनकी वाणी ने श्रोताओं की आंखों को नम कर दिया।

संस्कार और जीवन दर्शन पर विशेष जोर:

  • पंडित अनिल शास्त्री जी ने कहा, “दद्दा केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी परिभाषा है। दद्दा या पिता परिवार की जड़ होते हैं, वही संस्कारों की नींव रखते हैं।”
  • गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन का सही मार्ग समझना असंभव है।
  • जीवन दर्शन पर उन्होंने कहा, “भोजन वही अच्छा लगता है जिसमें स्वाद हो, वैसे ही जीवन भी तभी सार्थक है जब उसमें उद्देश्य हो।”
  • परमात्मा को भाव का भूखा बताते हुए उन्होंने चेताया कि किसी के सम्मान और स्वाभिमान से कभी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।

बच्चों के संस्कारों पर विशेष ध्यान:

  • “बच्चे कोमल मिट्टी होते हैं। जैसी आदत डालोगे, वैसा ही उनका निर्माण होगा।”
  • उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि बच्चों को कथा-सत्संग से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान प्रमुख यजमान दिलीप शर्मा, पुष्पा शर्मा, ममता असाटी, सुशीला असाटी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। संचालन कुँ. पुष्पेंद्र सिंह हजारी ने किया। यज्ञ समिति के अध्यक्ष अनुराग वर्धन सिंह हजारी एवं आयोजन समिति के सदस्यों के साथ सैकड़ों कथा श्रोताओं ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धा भाव से श्रवण किया।