📰 धार्मिक समाचार | धार (मध्य प्रदेश)

25 वर्षों बाद धार जिले को मिला आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश का सौभाग्य

धार, 4 जुलाई।

धार जिले के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक और अत्यंत श्रद्धामय रहा, जब लगभग 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का पावन मंगल प्रवेश अतिशय क्षेत्र मानतुंगगिरि तीर्थ में संपन्न हुआ। धर्मध्वजाओं, मंगल वाद्यों और जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का भावपूर्ण स्वागत कर वंदन-अभिनंदन किया।

 

मानतुंगगिरि एक प्राचीन एवं अतिशयकारी दिगंबर जैन तीर्थ है, जिसका विकास आचार्य श्री 108 भरतसागर जी महाराज की दिव्य परिकल्पना के अनुरूप किया गया है। यहां भगवान आदिनाथ की विशाल प्रतिमा, लगभग 800 वर्ष प्राचीन भूगर्भ से प्राप्त जिनप्रतिमाएं तथा प्राकृतिक एवं शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। पूज्य क्षुल्लिका चंद्रमती माताजी के निर्देशन में तीर्थ का निरंतर विकास हो रहा है तथा यहां स्थित गुरुमंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

 

मानतुंगगिरि प्रवास के पश्चात आचार्य श्री ससंघ का विहार ऐतिहासिक भोजशाला पहुंचा, जहां स्थित वाग्देवी मां सरस्वती मंदिर के दर्शन किए गए। इसी स्थान से जुड़ी वह प्रसिद्ध मान्यता भी है कि राजा भोज ने आचार्य श्री मांतुंग आचार्य को 48 ताले लगाकर कारागार में बंदी बनाया था। कारागार में ही आचार्य श्री ने भक्तामर स्तोत्र की रचना की और प्रत्येक गाथा पूर्ण होने पर एक-एक ताला स्वतः खुलता चला गया। इस प्रकार 48 गाथाओं के साथ सभी 48 ताले खुल गए और भक्तामर स्तोत्र की दिव्य महिमा विश्वभर में प्रसिद्ध हुई।

 

इसके बाद आचार्य श्री ससंघ का मंगल प्रवेश धार स्थित भगवान शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुआ। यहां प्राचीन जिनप्रतिमाओं के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। मंदिर में आचार्य श्री के सान्निध्य में स्वाध्याय का आयोजन हुआ तथा सायंकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम में गुरुदेव ने जिज्ञासुओं के प्रश्नों का सरल एवं व्यवहारिक समाधान देकर धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान की।

 

संध्याकाल में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आचार्य श्री की भव्य मंगल आरती संपन्न हुई। संपूर्ण वातावरण जिनवाणी, गुरु महिमा और जयघोष से गुंजायमान हो उठा। आचार्य श्री का यह ऐतिहासिक धर्मप्रवास श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय, प्रेरणादायक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।