186 दिवसीय महासाधना में 153 निर्जल उपवास करेंगे मुनि श्री संविज्ञ सागर जी

अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से इंदौर में चल रही कठोर तप साधना

 

इंदौर(संवाददाता मुकेश कुमार जैन )आचार्य श्री आदिसागर अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश परम पूज्य आचार्य भगवन्त 108 श्री सुनीलसागर जी महामुनिराज के पावन सानिध्य एवं मंगल आशीर्वाद से उनके आज्ञावर्ती शिष्य परम प्रभावक तपस्वी मुनि 108 श्री संविज्ञ सागर जी महामुनिराज द्वारा वर्ष 2026 के वर्षायोग में मध्यम सिंह निष्क्रीडित व्रत की महासाधना की जा रही है। मुनिश्री ने 28 जुलाई 2026 से इस कठिन तप साधना का शुभारंभ किया है।

 

इस महासाधना के अंतर्गत मुनि श्री संविज्ञ सागर जी महाराज द्वारा कुल 186 दिवसीय तप साधना की जा रही है, जिसमें 153 दिवस निर्जल उपवास एवं 33 दिवस पारणा होंगे। यह कठोर तप साधना निर्धारित क्रम के अनुसार 29 जनवरी 2027 को महापारणा के साथ पूर्ण होगी।

 

दीक्षा के बाद से निरंतर तप साधना

 

मुनि श्री संविज्ञ सागर जी महाराज की दीक्षा 15 अक्टूबर 2021 को श्री अंदेश्वर पार्श्वनाथ, बांसवाड़ा (राजस्थान) में हुई थी। दीक्षा के पश्चात से ही मुनिश्री निरंतर तप, संयम और साधना के माध्यम से धर्म प्रभावना कर रहे हैं।

 

वर्ष 2022 के अजमेर वर्षायोग में मुनिश्री ने एकांतर तप साधना की, जिसमें एक दिन आहार एवं एक दिन उपवास का क्रम रहा। इसके साथ ही दशलक्षण महापर्व के दौरान 10 निर्जल उपवास भी किए।

 

वर्ष 2023 के भोपाल वर्षायोग में मुनि श्री द्वारा 32 निर्जल उपवास की कठिन साधना की गई।

 

वर्ष 2024 के नैनवां, जिला बूंदी (राजस्थान) वर्षायोग में भी मुनिश्री ने निरंतर तप साधना करते हुए चातुर्मास कलश स्थापना से 2 उपवास-1 आहार तथा 3 उपवास-1 आहार के क्रम से कठोर तप आरंभ किया। इसके बाद भी मुनिश्री की तप आराधना निरंतर जारी रही।

 

तप, त्याग और संयम की अनुपम साधना मुनि श्री संविज्ञ सागर जी महाराज की यह 186 दिवसीय महासाधना जैन साधना परंपरा में तप, त्याग, संयम और आत्मशुद्धि का प्रेरणादायी उदाहरण है। 153 दिनों तक निर्जल उपवास की यह साधना साधक के दृढ़ आत्मबल और आध्यात्मिक पुरुषार्थ को दर्शाती है।

 

वर्तमान में इंदौर में आचार्य भगवन्त श्री सुनीलसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में चल रही इस महासाधना को लेकर श्रावक-श्राविकाओं में विशेष श्रद्धा एवं उत्साह का वातावरण है। मुनिश्री की तप आराधना के माध्यम से धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को भी संयम, त्याग और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।

 

— प्रस्तुत विवरण मुनि श्री की महासाधना के प्रकाशित तप-क्रम के आधार पर।