भक्ति, ज्ञान और पर्यावरण संरक्षण का अद्वितीय संगम: हटा में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन
हटा: देव श्री गौरीशंकर मंदिर पावन धाम में आयोजित अति रुद्र महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला। हजारों श्रद्धालु इस भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत वातावरण में कथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे।
कथा व्यास पं. डॉ. अनिल शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने पूतना वध, कालिय नाग दमन और गोवर्धन धारण जैसे प्रसंगों के माध्यम से धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का संदेश दिया। शास्त्री जी ने कहा, "जब-जब संसार में अन्याय और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेकर संतों की रक्षा करते हैं।"
कृष्ण जन्म प्रसंग पर उन्होंने बताया कि कारागार की अंधेरी रात में जन्मा दिव्य प्रकाश यह सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर का स्मरण हमें साहस और दिशा प्रदान करता है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश:
- गोवर्धन धारण प्रसंग के माध्यम से भगवान कृष्ण ने इंद्र के अहंकार को समाप्त कर प्रकृति की आराधना का महत्व बताया।
- वर्तमान समय में जल, वृक्ष और पर्यावरण की रक्षा करना ही गोवर्धन पूजा का वास्तविक स्वरूप है।
भक्त प्रह्लाद चरित्र का उल्लेख करते हुए व्यास जी ने कहा, "सच्ची भक्ति कभी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होती। दृढ़ आस्था और नाम-स्मरण से भगवान स्वयं भक्त की रक्षा करते हैं। कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना ही वास्तविक साधना है।"
कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय बना रहा। अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ आयोजन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थित रही।
Continue With Google
Comments (0)