मुलताई। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी मां तापी की संपूर्ण परिक्रमा पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा 2 जनवरी को प्रातः 8 बजे प्रारंभ होगी। इससे पूर्व, 1 जनवरी को दोपहर 4 बजे ध्वज पूजन के साथ शुभारंभ किया जाएगा, जिसके तहत ध्वज यात्रा मां तापी सरोवर की परिक्रमा करते हुए नगर भ्रमण करेगी।

यात्रा संयोजक संजय (राजू) पाटनकर ने बताया कि 64 दिवसीय सम्पूर्ण परिक्रमा पदयात्रा की सारी तैयारियां लगभग पूर्ण हो चुकी हैं। सभी कार्यकर्ता उत्साह के साथ पदयात्रा को सफल बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

आयोजन की प्रमुख बातें:

  • 1 जनवरी को सभी पदयात्री मुलताई पहुंचेंगे।
  • पंजीयन और परिचय पत्र का कार्य शिक्षक संघ द्वारा किया जा रहा है।
  • क्रिश हॉस्पिटल के तत्वावधान में सभी पदयात्रियों का मेडिकल चेकअप स्पेशलिस्ट डॉक्टरों द्वारा किया जाएगा।
  • शाम 7 बजे महा आरती सम्पन्न होगी।

ध्वज यात्रा के प्रभारी सौरभ जोशी, नरेंद्र गिरी, चंदू देशमुख, अजय यादव, योगेश अग्रवाल, देवेंद्र सिंह राजपूत, सुरेंद्र अरोरा, और श्याम गव्हाड़े ने तापी भक्तों से अपील की है कि 1 जनवरी को दोपहर 4 बजे ध्वज यात्रा में और 2 जनवरी को सुबह 8 बजे अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर पुण्यलाभ अर्जित करें।

ताप्ती नदी का महत्व:

ताप्ती को सृष्टि की प्रथम नदी माना जाता है, जिसे आदि गंगा भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, ताप्ती सूर्य और छाया की पुत्री हैं और यम, शनि, और यमुना की बहन हैं। यह नदी अपने वेग के विपरीत पश्चिम दिशा में बहती है, जिसकी लम्बाई लगभग 724 किलोमीटर है। यह मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात की सीमाओं से होते हुए खम्बात की खाड़ी में अरब सागर में मिलती है।

मान्यता है कि ताप्ती के जल में स्नान करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है। ताप्ती जल की विशेषता है कि इसमें विसर्जित अस्थि कलश और केश गल जाते हैं। ताप्ती तट पर दूर-दूर से श्रद्धालु दसक्रिया और पिंडदान करने आते हैं।

इस यात्रा में शामिल होकर श्रद्धालु धार्मिक पुण्यलाभ प्राप्त कर सकते हैं और ताप्ती नदी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का अनुभव कर सकते हैं।