लूट के मामले में कार्रवाई पर रोक की बात वाला ऑडियो वायरल, कोतवाली टीआई पर उठे गंभीर सवाल


पीड़ित पत्रकार से कथित बातचीत में ज्ञापन देने पर नाराजगी जताने का आरोप; ‘अब मैंने कार्रवाई पर रोक लगवा दी है’ जैसी बात ने बढ़ाई पुलिस की कार्यप्रणाली पर चिंता

टीकमगढ़। पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार के साथ हुई कथित मारपीट और लूट के गंभीर मामले में अब शहर कोतवाली थाना प्रभारी रविभूषण पाठक से जुड़ा एक कथित ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल बताए जा रहे इस ऑडियो में थाना प्रभारी और पीड़ित पत्रकार के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि वायरल ऑडियो में थाना प्रभारी कथित रूप से पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार से इस बात को लेकर सवाल कर रहे हैं कि उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन क्यों दिया। बातचीत के दौरान कथित तौर पर यह भी कहा जा रहा है कि “तुमने ज्ञापन दिया है तो ठीक है, अब मैंने कार्रवाई करने पर रोक लगवा दी है।” यदि वायरल ऑडियो में कही जा रही बातें वास्तविक और प्रमाणित पाई जाती हैं, तो यह पूरे मामले की पुलिस कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर सकती हैं।

गौरतलब है कि लोकेन्द्र सिंह परमार के साथ हुई घटना के संबंध में शहर कोतवाली में एफआईआर क्रमांक 471 दिनांक 03 अगस्त 2026 दर्ज होने की बात सामने आई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है और दूसरी ओर कथित रूप से राजीनामे के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसी को लेकर पत्रकार संगठन द्वारा पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की गई थी।

ज्ञापन देने पर ही कार्रवाई रोकने की बात क्यों?

वायरल ऑडियो ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा कर दिया है कि यदि किसी पीड़ित को अपनी शिकायत पर पुलिस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष ज्ञापन देने का अधिकार है, तो उस ज्ञापन को कार्रवाई रोकने का आधार क्यों बनाया गया? आखिर ऐसा क्या कारण था कि पीड़ित द्वारा वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने के बाद थाना स्तर पर कार्रवाई रोकने की कथित बात सामने आई?

यह मामला अब महज एक एफआईआर और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और पीड़ित को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि ऑडियो की जांच में आवाज और बातचीत की पुष्टि होती है तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि गंभीर आपराधिक प्रकरण में कार्रवाई रोकने की कथित स्थिति आखिर कैसे बनी।

पत्रकार संगठन के ज्ञापन के बाद मामला और गरमाया

इस मामले को लेकर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश (जम्प) ने पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों की गिरफ्तारी और पत्रकार की सुरक्षा की मांग की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीर बताते हुए शहर कोतवाली थाना प्रभारी को आवश्यक निर्देश देने तथा आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी कराने का आश्वासन दिया था।

अब इसी घटनाक्रम के बीच थाना प्रभारी से जुड़ा कथित ऑडियो वायरल होने से सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक ओर वरिष्ठ अधिकारी मामले को गंभीर बताते हुए कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वायरल ऑडियो में कार्रवाई रोकने की बात क्यों कही जा रही है?

अभय मौर्य बोले- ऑडियो की निष्पक्ष जांच हो, दोषी मिले तो कार्रवाई तय हो

जम्प जिलाध्यक्ष अभय मौर्य ने कहा कि पत्रकार के साथ लूट और मारपीट जैसे गंभीर मामले में यदि पुलिस अधिकारी और पीड़ित के बीच हुई कथित बातचीत का ऑडियो सामने आया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि “पीड़ित पत्रकार अपनी शिकायत लेकर वरिष्ठ अधिकारी के पास जाता है, यह उसका अधिकार है। यदि उसे ज्ञापन देने पर कार्रवाई रोकने की बात कही गई है तो यह बेहद गंभीर विषय है। ऑडियो की तकनीकी जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारी पर भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को डराने या दबाव में लेने के बजाय पुलिस को निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा देना चाहिए। संगठन इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष दोबारा मामला उठाया जाएगा।

अब निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर

वायरल ऑडियो की सत्यता और उसमें मौजूद आवाज की प्रमाणिकता जांच का विषय है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि पुलिस प्रशासन इस कथित ऑडियो को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि ऑडियो फर्जी है तो उसकी सच्चाई सामने लाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है और यदि बातचीत वास्तविक पाई जाती है तो गंभीर आपराधिक प्रकरण में कार्रवाई रोकने की कथित बात पर जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा।

फिलहाल, एक तरफ लूट के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी का इंतजार और दूसरी तरफ कार्रवाई रोकने की कथित बातचीत वाला वायरल ऑडियो—इन दोनों ने शहर कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।