20 गोवंश की बरामदगी के बाद बड़ा सवाल: कानून होने के बावजूद अवैध गोवंश परिवहन क्यों नहीं रुक रहा?**

 

*पांढुर्णा।* बुधवार की रात जंगल मार्ग से पैदल ले जाए जा रहे लगभग 30 गोवंश में से 20 गोवंश को बजरंग दल एवं गौ-रक्षा कार्यकर्ताओं की सूचना पर सुरक्षित बरामद किया गया। घटना की सूचना तत्काल पुलिस प्रशासन को दी गई। शेष गोवंश एवं संबंधित व्यक्तियों की तलाश और मामले की जांच जारी रहनी चाहिए।

 

यह घटना केवल 20 गोवंश की बरामदगी का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रश्न उठाती है कि **जब मध्यप्रदेश में गोवंश संरक्षण संबंधी कानून लागू हैं, तब ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों सामने आती हैं?**

 

मध्यप्रदेश में गोवंश संरक्षण से संबंधित कानूनों के तहत गोवंश के वध, अवैध परिवहन तथा अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों पर प्रावधान मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, पशुओं के परिवहन एवं पशु बाजारों के संचालन से जुड़े विभिन्न नियमों का पालन भी आवश्यक है। यदि इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित मामलों में पुलिस और सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच एवं कार्रवाई की जा सकती है।

 

यदि इस मामले में संबंधित गोवंश का रिकॉर्ड **पशु सेतु (Pashu Setu)** जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध है, तो प्रशासन विक्रेता, खरीदार, परिवहन, पहचान और अन्य रिकॉर्ड का सत्यापन कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर सकता है। यदि जांच में किसी संगठित अवैध गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

### प्रशासन से प्रमुख मांग

 

* इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की जाए।

* यदि उपलब्ध हों, तो डिजिटल रिकॉर्ड, बाजार रजिस्टर और परिवहन दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए।

* जिले के सभी पशु बाजारों का नियमित निरीक्षण किया जाए और लागू नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

* जांच पूरी होने पर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि नागरिकों का विश्वास बना रहे।

 

यह मांग किसी व्यक्ति या संस्था को बिना जांच दोषी ठहराने की नहीं है, बल्कि **कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और जवाबदेही** सुनिश्चित करने की है। यदि कानून मौजूद हैं, तो उनका निष्पक्ष और समान रूप से पालन भी सुनिश्चित होना चाहिए।

 

**स्पष्टीकरण:** यह बयान उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के आधार पर सार्वजनिक हित में जांच और जवाबदेही की मांग करता है। किसी भी व्यक्ति या समूह को सक्षम प्राधिकारी की जांच पूर्ण होने से पूर्व दोषी घोषित नहीं किया जा रहा है।