केसली (सागर) - मध्य प्रदेश के सागर जिले अंतर्गत केसली वन परिक्षेत्र में वन विभाग की लगातार गश्त और सक्रियता के चलते वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले माफियाओं और तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है। वन संपदा के संरक्षण और अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रेंजर अभय दुबे की टीम दिन-रात सघन कार्रवाई में जुटी हुई है।

​देर रात सागौन की अवैध तस्करी करते दो गिरफ्तार

​हालिया कार्रवाई के दौरान बीती रात चीलगढ़-डुंगरिया से केसली मार्ग पर वन अमले ने मोटरसाइकिल से सागौन की अवैध तस्करी कर रहे दो युवकों को रंगे हाथों धरा। मुखबिर की सूचना पर रात लगभग 2:30 बजे की गई इस कार्रवाई में भूपेंद्र लोधी और देवराज लोधी को दो अलग-अलग मोटरसाइकिलों पर अवैध सागौन ले जाते हुए पकड़ा गया। वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जब्त सागौन और दोनों वाहनों को अपनी सुपुर्दगी में ले लिया है।
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एक अन्य मामले में कार्रवाई करते हुए वन टीम ने अवैध रूप से संग्रहित करके रखी गई सागौन की 2 सिल्ली (नग) जब्त कीं। इस मामले में वीरेंद्र विश्वकर्मा नाम के आरोपी पर प्रकरण दर्ज किया गया है।

​अब तक 3 दर्जन से अधिक आरोपियों पर कार्रवाई

​रेंजर अभय दुबे और उनकी टीम द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत अब तक व्यापक सफलता हासिल हुई है। लगातार की जा रही गश्त के दौरान वन अमले ने सागौन का अवैध परिवहन करते हुए -
​3 पिकअप वाहन
​3 मोटरसाइकिलें
​3 बैलगाड़ियां जब्त की हैं।

​70 हेक्टेयर वन भूमि से हटाया गया अतिक्रमण

​केवल लकड़ी तस्करी ही नहीं, बल्कि वन भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ भी वन विभाग ने बुलडोजर कार्रवाई की है। अभियान के दौरान लगभग 70 हेक्टेयर वन भूमि को भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया गया है। इस दौरान अतिक्रमण में इस्तेमाल किया जा रहा एक ट्रैक्टर भी जब्त किया गया।

​4 फर्नीचर मार्ट सील, 1 अवैध दुकान बंद

​संरक्षित वन संपदा के अवैध उपयोग को रोकने के लिए वन परिक्षेत्र में संचालित फर्नीचर मार्ट्स की भी जांच की गई। जांच के दौरान अवैध सागौन काष्ठ का भंडारण पाए जाने पर 4 लाइसेंसी दुकानों को सील कर दिया गया। इसके अलावा, बिना लाइसेंस अवैध रूप से संचालित पाई गई एक दुकान को पूरी तरह बंद करा दिया गया है।
​वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में अब तक अलग-अलग मामलों में लगभग तीन दर्जन (36) अपराधियों पर वैधानिक कार्रवाई की जा चुकी है। वन अमले की इस सतर्कता और सख्त कदम से संपूर्ण वन परिक्षेत्र में वन संपदा का संरक्षण हो रहा है।