राष्ट्रीय राजमार्ग 43: दस सालों में भी अधूरी सड़क और घटिया निर्माण से जनता परेशान

उमरिया: राष्ट्रीय राजमार्ग 43 जो शहडोल-अनूपपुर-उमरिया को जोड़ता है, अपनी धीमी गति और घटिया गुणवत्ता के कारण एक बार फिर चर्चा में है। इस अरबों की परियोजना को 2015 में प्रारंभ किया गया था, लेकिन 2026 तक भी यह अधूरी ही है। निर्माण में भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण तब सामने आया जब राजा बाग बाईपास में ढाई करोड़ की लागत से बना पुल उद्घाटन से पहले ही धंस गया।

  • 2015 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट अब तक अधूरा, गुणवत्ता में सुधार नहीं।
  • राजा बाग बाईपास पर ढाई करोड़ का पुल उद्घाटन से पहले ही धंसा।
  • स्थानीय लोगों ने हरे कपड़े से किया अस्थाई संकेतक का इंतजाम।
  • डेढ़ साल पहले भी हुआ था पुल में छेद, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं।
  • बिना उद्घाटन के पुल पर ओवरलोड वाहन चल रहे, बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थानीय निवासियों की मांग: पुल की थर्ड पार्टी से जांच करवाई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।

सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना की लागत कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेढ़ साल पहले भी इसी पुल पर इसी तरह का छेद हुआ था, लेकिन मिट्टी-गिट्टी भरकर लीपापोती कर दी गई। अब पुल पर ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि इस सड़क और पुल की थर्ड पार्टी से कोर टेस्टिंग जांच करवाई जाए और दोषी ठेकेदार और इंजीनियरों पर एफआईआर दर्ज हो। जब तक पुल को सुरक्षित नहीं माना जाता, तब तक भारी वाहनों की एंट्री बंद की जाए। एमपीआरडीसी और एनएच के अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।