आलोट, रतलाम। नगर के विक्रमगढ़ क्षेत्र में शासकीय मंदिर की जमीन पर कथित कब्जा कर शिव वाटिका कॉलोनी विकसित करने का मामला सामने आया है। ताल निवासी मनोज काला पिता गोरधनलाल काला ने 16 अक्टूबर 2026 को संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, सर्वे नंबर 1367 की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में श्री गोपाल कृष्ण मंदिर, प्रबंधक कलेक्टर महोदय रतलाम के नाम दर्ज है। आरोप है कि इस भूमि पर कब्जा कर कॉलोनी विकसित की गई और प्लॉट व मकान बेच दिए गए।

पहले भी कार्रवाई के आदेश, फिर जमीन खाली क्यों नहीं हुई?

शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित भूमि पर विकसित कॉलोनी को लेकर पूर्व में भी जांच हुई थी। आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम आलोट और मुख्य नगर परिषद अधिकारी ने कॉलोनी हटाने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद भूमि को पूरी तरह अतिक्रमणमुक्त कर मंदिर प्रबंधन को वापस सौंपने की कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायतकर्ता ने सुरेश पिता जडावचंद काला निवासी आलोट पर शासकीय मंदिर की भूमि पर कब्जा कर कॉलोनी विकसित करने और प्लॉट-मकान बेचने के आरोप लगाए हैं। उसने संबंधित राजस्व अभिलेखों, भूमि की वर्तमान स्थिति और पूर्व में हुई कार्रवाई की जांच कराने की मांग की है।

कलेक्टर के देवस्थान भूमि सत्यापन आदेश के बीच मामला महत्वपूर्ण

कलेक्टर द्वारा 7 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, रतलाम जिले के 1,780 शासन प्रबंधित देवस्थानों की कुल 4,622.02 हेक्टेयर भूमि के राजस्व अभिलेखों का मिलान और सत्यापन किया जाना है। उपलब्ध आदेश के अनुसार, आलोट क्षेत्र के 291 देवस्थानों की 662.52 हेक्टेयर भूमि दर्ज है।

ऐसे में सर्वे नंबर 1367 की भूमि के राजस्व रिकॉर्ड, खसरे और देवस्थान संबंधी अभिलेखों का मिलान महत्वपूर्ण हो जाता है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जानने के लिए यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है और पूर्व में जारी बताए जा रहे आदेशों पर क्या कार्रवाई हुई।

हालांकि, कलेक्टर का उक्त आदेश देवस्थान भूमि के रिकॉर्ड सत्यापन से संबंधित है। इसे इस मामले में किसी अनियमितता की पुष्टि या किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अब जांच के साथ कार्रवाई का विवरण भी जरूरी

मामले में प्रशासन को सर्वे नंबर 1367 के मूल राजस्व रिकॉर्ड, खसरा, भूमि पर हुए निर्माण और कथित बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। यदि पहले अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी हुए थे, तो उनके पालन की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

यदि जांच में शासकीय मंदिर की भूमि पर अनधिकृत कब्जा, नियमविरुद्ध निर्माण या अन्य अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई कर भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

शासकीय देवस्थान की संपत्ति के रिकॉर्ड का सत्यापन तभी सार्थक होगा, जब अभिलेखों में दर्ज स्थिति और जमीन पर वास्तविक स्थिति का मिलान कर आवश्यक कार्रवाई भी की जाए। अब निगाह प्रशासन पर है कि शिकायत की जांच कब पूरी होती है और भूमि की वर्तमान स्थिति तथा पूर्व कार्रवाई के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।