ताल / आलोट । शिक्षक को पेड़ से बांधकर पीटने का वीडियो सामने आने के बाद ताल की यह घटना अब केवल मारपीट की खबर नहीं रह गई है। सवाल इससे बड़ा है—अगर किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप है तो क्या गांव में ही उसकी सजा तय कर दी जाएगी?

घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। शिक्षक योगेंद्र जाटव की शिकायत पर ताल पुलिस ने दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। वहीं दूसरी ओर शिक्षक पर एक नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। दोनों ही पहलुओं की सच्चाई अब पुलिस जांच से सामने आनी है।

लेकिन एक सवाल का जवाब अभी बाकी है—पेड़ से बांधकर पीटने की जरूरत क्यों पड़ी?

यदि शिक्षक पर लगाया गया आरोप सही था तो उसे पुलिस के हवाले किया जा सकता था। शिकायत दर्ज कराई जा सकती थी। जांच कराई जा सकती थी। कानून के तहत कार्रवाई होती।

फिर किसी व्यक्ति को पेड़ से बांधकर उसके साथ मारपीट करने की नौबत क्यों आई?

वीडियो ने बढ़ाई जवाबदेही

सामने आए वीडियो में एक व्यक्ति पेड़ से बंधा दिखाई दे रहा है और उसके साथ मारपीट की जा रही है। अब पुलिस के सामने केवल FIR की जांच नहीं, बल्कि वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की भी पड़ताल चुनौती है।

कौन लोग वहां मौजूद थे? शिक्षक को किसने बांधा? मारपीट किसने की? घटना की शुरुआत कैसे हुई? क्या पहले कोई विवाद हुआ था? क्या किसी ने पुलिस को सूचना दी थी? इन सवालों के जवाब जांच में सामने आना जरूरी हैं।

शिक्षक की FIR में मारपीट और धमकी का आरोप

शिक्षक की शिकायत के मुताबिक 3 अक्टूबर को वह ग्राम कोठड़ी (खारवा) गया था। शिकायत में बताया गया कि दो लोगों ने उसे रोककर गाली-गलौज की और बाद में लकड़ी तथा रस्सी से कथित रूप से मारपीट की। शिक्षक ने चोट लगने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर BNS की धारा 296(B), 115(2), 351(2) और 3(5) के तहत दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

छात्रा से जुड़े आरोप को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

मामले का दूसरा पहलू भी कम गंभीर नहीं है। ग्रामीणों की ओर से शिक्षक पर नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं। यदि जांच में ऐसा कोई अपराध सामने आता है तो पुलिस को संबंधित कानून के तहत सख्त कार्रवाई करनी होगी।

लेकिन जांच पूरी होने से पहले आरोप को अंतिम सत्य मान लेना भी उचित नहीं होगा।

यहीं से शुरू होता है असली जनहित का सवाल

किसी आरोपी का बचाव करना और कानून के शासन की बात करना—दो अलग बातें हैं।

यदि शिक्षक दोषी है तो उसे कानून सजा देगा। यदि आरोप गलत हैं तो शिक्षक को न्याय मिलेगा। लेकिन किसी भी स्थिति में किसी व्यक्ति को भीड़ या कुछ लोगों द्वारा मौके पर ही सजा देने की व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती।

आज आरोप शिक्षक पर है। कल यही तरीका किसी और व्यक्ति के खिलाफ अपनाया जा सकता है।

एडिशनल एसपी ने क्या कहा

एडिशनल एसपी ग्रामीण विवेक कुमार लाल ने बताया कि शिक्षक की शिकायत पर दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मारपीट और धमकी से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। वीडियो और अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। छात्रा से जुड़े आरोपों की भी जांच होगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब पुलिस से उम्मीद—दोनों पक्षों की निष्पक्ष जांच हो

मामले में पुलिस को शिक्षक की शिकायत की जांच के साथ छात्रा से जुड़े आरोपों की भी निष्पक्ष जांच करनी होगी। साथ ही वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान कर यह स्पष्ट करना होगा कि शिक्षक को पेड़ से किसने बांधा और उसके साथ मारपीट किसने की।

किसी भी पक्ष को केवल आरोप के आधार पर दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा।

क्योंकि इस पूरी घटना का सबसे बड़ा सवाल शिक्षक सही या गलत होने से भी आगे है—क्या किसी नागरिक को कानून हाथ में लेकर सजा देने की छूट दी जा सकती है?

आरोप की जांच पुलिस करे, फैसला अदालत करे—सड़क पर सजा देने की परंपरा किसी भी सभ्य समाज के लिए खतरे की घंटी है।