रतलाम/आलोट। नगर के मुख्य मार्ग स्थित एक भूमि को लेकर उठा विवाद अब केवल जमीन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता, कानून व्यवस्था और राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। वर्षों पुराने पट्टे, राजस्व रिकॉर्ड, अधिकार पत्र और पंचायत स्तर के प्रमाण-पत्र होने का दावा करने वाले पट्टाधारी परिवार ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा सुनियोजित तरीके से जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पूरी कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से की गई, ताकि बाद में कब्जे को स्थायी रूप दिया जा सके। मामले को धार्मिक स्वरूप देकर प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित करने की भी कोशिश किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
पट्टाधारी पक्ष के अनुसार संबंधित भूमि के वैध दस्तावेज वर्षों पुराने हैं और राजस्व रिकॉर्ड भी उनके पक्ष में दर्ज हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा रातों-रात जमीन पर खंभे गाड़कर तार फेंसिंग कर दी गई तथा हनुमानजी की मूर्ति स्थापित कर दी गई। परिवार का आरोप है कि इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य विवादित भूमि पर स्थायी नियंत्रण स्थापित करना है।
पट्टाधारी के भाई राहुल जायसवाल ने बताया कि उनके प्लॉट पर करीब 25×30 फीट की पतरे से बनी गुमटी रखी हुई थी, जिसे तोड़कर एक तरफ फेंक दिया गया। आरोप है कि बिना अनुमति मंदिर का ओटला बनाकर मूर्ति स्थापना कर दी गई। साथ ही लगभग 55×120 फीट क्षेत्र को घेरकर फेंसिंग की गई।
राहुल जायसवाल का कहना है कि उन्हें मंदिर या धार्मिक गतिविधियों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी वैध पट्टाधारी भूमि से कहीं अधिक हिस्से को घेरकर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि यदि किसी धार्मिक स्थल की स्थापना करनी थी तो उसके लिए प्रशासनिक अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
पटवारी वही लिखेगा जो हम कहेंगे” — मौके पर दबाव बनाने के आरोप
फरियादी के अनुसार जब वे पटवारी को मौके पर लेकर पहुंचे तो वहां मौजूद संजू मीणा ने कथित रूप से कहा कि “पटवारी वही लिखेगा जो हम कहेंगे।” राहुल जायसवाल ने आरोप लगाया कि मौके पर उनके साथ बदतमीजी की गई और दबाव बनाने की कोशिश भी की गई।
फरियादी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि प्रहलाद गाडोलिया, चंद्र गाडोलिया, शंकर गाडोलिया सहित अन्य लोगों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। आवेदन में जान से मारने जैसी धमकियां दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वे एक व्यापारी व्यक्ति हैं और पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है।
दो बार शिकायत के बाद भी FIR नहीं, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
राहुल जायसवाल के अनुसार इस पूरे मामले को लेकर आलोट थाना पुलिस को दो बार लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं। आवेदन में आरोपियों के नाम भी उल्लेखित किए गए हैं, जबकि कुछ अन्य लोगों के नाम सामने आना अभी बाकी बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद अब तक किसी भी आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे आरोपियों के हौसले बढ़ रहे हैं। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो विवाद और बढ़ सकता है।
पुराने दस्तावेज और रिकॉर्ड सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
मामले में पुराने पट्टे, अधिकार पत्र, राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और ग्राम पंचायत स्तर के प्रमाण-पत्र सामने आए हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि सभी दस्तावेज उनकी वैध स्वामित्व स्थिति को स्पष्ट करते हैं। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक सीमांकन और वैधानिक कार्रवाई नहीं किए जाने से स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास वर्षों पुराने वैध दस्तावेज मौजूद हैं तो प्रशासन को तत्काल सीमांकन कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। लोगों का कहना है कि कार्रवाई में देरी से विवाद और अधिक गहरा रहा है।
क्षेत्र में दबंगई और प्रभाव का माहौल होने के आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित लोग लंबे समय से दबंग छवि रखते हैं और खुलेआम दबाव तथा धमकियों के जरिए भय का माहौल बना रहे हैं। कई लोगों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि प्रभाव और पैसे के दम पर प्रशासनिक कार्रवाई प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिसके कारण आम नागरिक खुलकर सामने आने से डर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेज रखने वाले व्यक्ति को भी न्याय नहीं मिलेगा तो आम नागरिकों का कानून और प्रशासन से भरोसा उठ जाएगा।
क्षेत्र में इस पूरे मामले को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं और लोग प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
निष्पक्ष सीमांकन और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले का तत्काल निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए तथा अवैध कब्जा, तोड़फोड़, धमकी, दबाव और जबरन फेंसिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि मामला केवल जमीन विवाद का नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता की परीक्षा भी बन चुका है। अब पूरे मामले में नजर पुलिस और राजस्व विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि फरियादी के पास वर्षों पुराने पट्टे, राजस्व रिकॉर्ड और अधिकार पत्र मौजूद हैं तो प्रशासन आखिर कार्रवाई से पीछे क्यों हट रहा है? बिना अनुमति निजी भूमि पर निर्माण, फेंसिंग और मूर्ति स्थापना कैसे हो गई? और शिकायतों के बावजूद पुलिस अब तक मौन क्यों है?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन दबंगई के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई कर कानून का भरोसा कायम करता है या फिर दस्तावेज रखने वाला व्यक्ति अपने ही अधिकार के लिए यूं ही भटकता रहेगा।
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