Editor's Desk | State News | Amit Shrivastava
भोपाल के किसी नए प्रोजेक्ट का सैंपल फ्लैट। चमकती टाइलें, और सेल्स वाले की लाइन: "सर, 1250 वर्ग फुट, इस लोकेशन पर इससे सस्ता नहीं मिलेगा।" रुकिए। यह 1250 किस तरह का वर्ग फुट है? आसपास पिछले महीने इसी तरह के फ्लैट किस भाव बिके? और यह प्रोजेक्ट MP RERA में दर्ज है भी या नहीं?
आप ज़िंदगी में एक-दो बार घर खरीदते हैं, बिल्डर और दलाल यह काम रोज़ करते हैं। जानकारी का यही फर्क लाखों रुपये का फर्क बन जाता है। अच्छी बात यह है कि मध्यप्रदेश में ज़्यादातर जाँच अब ऑनलाइन और मुफ्त है। गाइडलाइन रेट संपदा 2.0 पर है, प्रोजेक्ट की कुंडली MP RERA पर और ज़मीन का रिकॉर्ड भू-अभिलेख पोर्टल पर।
नीचे 7 जाँच हैं। हर एक आपको या तो ज़्यादा कीमत से बचाएगी, या ऐसे सौदे से जिसमें बाद में कब्ज़ा या कागज़ उलझ जाए।
एक नज़र में: घर खरीदने से पहले क्या और कहाँ जाँचें
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जाँच |
कहाँ / कैसे |
ध्यान दें |
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सरकारी गाइडलाइन रेट |
sampada.mpigr.gov.in |
रेट प्रति वर्ग मीटर में |
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प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन |
rera.mp.gov.in |
नंबर विज्ञापन में भी हो |
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क्षेत्रफल |
एग्रीमेंट में कारपेट एरिया |
सुपर बिल्ट-अप पर मोलभाव नहीं |
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रजिस्ट्री खर्च |
स्टांप 7.5% + पंजीयन 3% |
गाइडलाइन या सौदा, जो ज़्यादा |
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GST |
सिर्फ निर्माणाधीन पर |
5% या किफायती पर 1% |
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बयाना |
एग्रीमेंट से पहले 10% तक |
RERA की धारा 13 |
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ज़मीन का रिकॉर्ड |
mpbhulekh.gov.in, पंजीयन कार्यालय |
खसरा, डायवर्सन, पुरानी रजिस्ट्री |
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EMI |
मासिक आय का हिस्सा |
बैंक आम तौर पर 40 से 50% तक |
1. पहले सरकारी रेट देखिए: कलेक्टर गाइडलाइन
मध्यप्रदेश में हर ज़िले के लिए कलेक्टर गाइडलाइन जारी होती है। यह वह न्यूनतम सरकारी दर है जिस पर संपत्ति का मूल्य आँका जाता है और स्टांप शुल्क लगता है। यह हर वित्त वर्ष के लिए तय होती है। 2026-27 के लिए भोपाल ज़िले में 621 लोकेशन पर दरें बढ़ाने की सिफारिश की गई थी।
कैसे देखें
- sampada.mpigr.gov.in या संपदा 2.0 ऐप खोलें, लॉगिन ज़रूरी नहीं।
- "गाइडलाइन देखें" या "प्रॉपर्टी वैल्यूएशन" चुनें।
- ज़िला, वार्ड या कॉलोनी चुनें, या नक्शे पर पिन लगाएँ।
ध्यान रहे, गाइडलाइन रेट आम तौर पर प्रति वर्ग मीटर में होता है। वर्ग फुट में बदलने के लिए इसे 10.764 से भाग दीजिए। मान लीजिए किसी कॉलोनी में बने फ्लैट का रेट ₹32,000 प्रति वर्ग मीटर है, तो यह करीब ₹2,970 प्रति वर्ग फुट हुआ। अब अगर बिल्डर ₹5,500 प्रति वर्ग फुट माँग रहा है, तो पूछिए कि यह फर्क किस बात का है: सुविधाएँ, लोकेशन, या सिर्फ मार्केटिंग।
गाइडलाइन बाज़ार भाव नहीं, न्यूनतम सीमा है। नए प्रोजेक्ट का भाव इससे ऊपर होना सामान्य है, पर फर्क बहुत बड़ा हो तो सतर्क रहिए।

फोटो: संपदा 2.0 पर गाइडलाइन रेट देखने के 3 कदम (img2_guideline.png)
2. आसपास की असली रजिस्ट्रियों से मिलाइए
असली बाज़ार भाव आसपास हुई बिक्री से पता चलता है। उसी सोसाइटी या पड़ोस में पिछले 6 से 12 महीने में बिके फ्लैटों की रजिस्ट्री में दर्ज कीमत को क्षेत्रफल से भाग देकर प्रति वर्ग फुट भाव निकालिए। पंजीकृत दस्तावेज़ों की प्रमाणित प्रति उप पंजीयक कार्यालय से ली जा सकती है।
तीन-चार सौदों का औसत निकालकर बिल्डर के भाव से मिलाइए। तुलना एक जैसी चीज़ की हो: कारपेट से कारपेट, और मिलती-जुलती उम्र और मंज़िल वाले फ्लैट से। स्थानीय डीलरों से भी पूछिए, पर उनके भाव को अंतिम सच मत मानिए।
3. कारपेट, बिल्ट-अप या सुपर बिल्ट-अप: किसका पैसा दे रहे हैं?
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016, यानी RERA की धारा 2(k) के मुताबिक कारपेट एरिया फ्लैट का शुद्ध इस्तेमाल लायक फर्श क्षेत्र है। इसमें बाहरी दीवारें, सर्विस शाफ्ट, आपकी अलग बालकनी या बरामदा और अलग खुली छत शामिल नहीं होते, पर अंदर की दीवारें गिनी जाती हैं।
- कारपेट एरिया: वह जगह जिस पर आप सच में रहेंगे।
- बिल्ट-अप एरिया: कारपेट के साथ दीवारें और बालकनी।
- सुपर बिल्ट-अप एरिया: बिल्ट-अप के साथ सीढ़ी, लिफ्ट, लॉबी जैसी साझा जगहों का हिस्सा।
RERA लागू होने के बाद बिल्डर को फ्लैट का क्षेत्रफल कारपेट एरिया में बताना होता है। इसलिए एग्रीमेंट और रसीद पर कारपेट एरिया लिखवाइए और कुल कीमत को उसी से भाग देकर असली प्रति वर्ग फुट भाव निकालिए। मान लीजिए ₹60 लाख का फ्लैट 1200 वर्ग फुट सुपर बिल्ट-अप बताया गया और कारपेट 850 वर्ग फुट है। सुपर बिल्ट-अप पर भाव ₹5,000 दिखता है, जबकि कारपेट पर असल में आप करीब ₹7,060 प्रति वर्ग फुट दे रहे हैं।

फोटो: एक ही फ्लैट, दो भाव: सुपर बिल्ट-अप बनाम कारपेट (img3_area.png)
4. MP RERA पर प्रोजेक्ट की कुंडली देखिए
RERA के तहत 500 वर्ग मीटर से बड़े या 8 से ज़्यादा फ्लैट वाले प्रोजेक्ट को बेचने या विज्ञापन करने से पहले रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है। मध्यप्रदेश में यह काम MP RERA देखता है, वेबसाइट rera.mp.gov.in है।
वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का नाम या नंबर खोजिए और स्वीकृत नक्शा, पूरा होने की घोषित तारीख और बिल्डर का रिकॉर्ड देखिए। बिल्डर की ज़बानी बताई कब्ज़े की तारीख को RERA पर दर्ज तारीख से मिलाइए। RERA नंबर न मिले तो पैसा लगाने से पहले दस बार सोचिए।
एक और नियम याद रखिए: धारा 13 के तहत बिल्डर लिखित और पंजीकृत एग्रीमेंट फॉर सेल किए बिना फ्लैट की कीमत के 10% से ज़्यादा बयाना या एडवांस नहीं ले सकता।
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“सैंपल फ्लैट देखकर हम बयाना देने वाले थे। बेटी ने कहा पहले RERA की साइट देख लो। वहाँ तारीख बिल्डर की बताई तारीख से अलग निकली।” रमेश चौहान, सरकारी कर्मचारी, भोपाल |
5. असली कीमत में जोड़िए: रजिस्ट्री, GST और छिपे चार्ज
फ्लैट का विज्ञापन वाला भाव आपकी असली लागत नहीं है। मध्यप्रदेश में बिक्री विलेख पर कुल स्टांप शुल्क 7.5% और पंजीयन शुल्क 3% है, यानी करीब 10.5%। यह गाइडलाइन मूल्य और सौदे की कीमत में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगता है। ₹50 लाख के फ्लैट पर यह करीब ₹5.25 लाख बैठता है। MP में महिला खरीदार को स्टांप शुल्क में अलग छूट नहीं है।
GST कब लगेगा, कब नहीं
निर्माणाधीन फ्लैट पर GST 5% है, और किफायती आवास की श्रेणी में आने वाले फ्लैट पर 1%, दोनों बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के। किफायती आवास यानी ₹45 लाख तक की कीमत और महानगरों में 60 वर्ग मीटर या बाकी शहरों में 90 वर्ग मीटर तक कारपेट एरिया। जिस तैयार फ्लैट को पूर्णता या अधिभोग प्रमाणपत्र (CC/OC) मिल चुका हो, उसकी बिक्री पर GST नहीं लगता। 22 सितंबर 2025 से लागू GST 2.0 में ये दरें नहीं बदलीं।
ये चार्ज अलग से पूछिए
- PLC यानी प्रेफरेंशियल लोकेशन चार्ज: पार्क फेसिंग, कॉर्नर या ऊँची मंज़िल के नाम पर अतिरिक्त पैसा।
- पार्किंग: कवर्ड पार्किंग का अलग चार्ज, और यह एग्रीमेंट में आपके नाम दर्ज है या नहीं।
- मेंटेनेंस: कई प्रोजेक्ट एडवांस मेंटेनेंस और डिपॉज़िट माँगते हैं।
बिल्डर से हर चार्ज अलग लिखी पूरी कॉस्ट शीट लिखित में माँगिए। ₹50 लाख या उससे ज़्यादा की संपत्ति पर खरीदार को 1% TDS काटकर जमा करना होता है, इसे भी याद रखिए।

फोटो: कीमत के ऊपर लगने वाले 4 छिपे खर्च (img4_charges.png)
6. EMI अपनी जेब देखकर तय कीजिए, बैंक की सीमा देखकर नहीं
बैंक आम तौर पर यह देखते हैं कि आपकी सभी किस्तें मिलाकर मासिक आय के 40 से 50 प्रतिशत के भीतर रहें। पर बैंक की मंज़ूरी और आपके घर का बजट, दो अलग बातें हैं। किस्त को आय के करीब एक-तिहाई तक रखना ज़्यादा आरामदेह है, ताकि फीस, इलाज और बचत की गुंजाइश बचे।
डाउन पेमेंट के साथ रजिस्ट्री और इंटीरियर का पैसा भी अलग रखिए, वरना रजिस्ट्री के लिए महँगा पर्सनल लोन लेना पड़ता है। निर्माणाधीन फ्लैट में कब्ज़े तक किराया और प्री-EMI साथ चल सकते हैं।
7. कागज़ पक्के कीजिए और देरी पर अपना हक जानिए
ज़मीन का खसरा mpbhulekh.gov.in पर देखिए। पिछले 13 से 30 साल की रजिस्ट्रियों की कड़ी, डायवर्सन आदेश, TNCP से स्वीकृत नक्शा और भवन अनुज्ञा किसी भरोसेमंद वकील से जँचवाइए। ज़मीन पर कर्ज़ या मुकदमा तो नहीं, इसकी सर्च रिपोर्ट भी लीजिए।
अगर बिल्डर तय तारीख पर कब्ज़ा नहीं देता, तो RERA की धारा 18 आपको दो रास्ते देती है। प्रोजेक्ट छोड़कर ब्याज सहित पैसा वापस लीजिए, या बने रहकर देरी के हर महीने का ब्याज लीजिए, जो राज्य के नियमों में तय दर से मिलता है। शिकायत MP RERA की वेबसाइट पर ऑनलाइन दर्ज होती है। कब्ज़े के बाद 5 साल तक ढाँचे की खराबी बिल्डर को बिना शुल्क ठीक करनी होती है (धारा 14(3))।
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“सैंपल फ्लैट पर नहीं, कागज़ पर भरोसा कीजिए। कारपेट एरिया, RERA नंबर और कॉस्ट शीट लिखित में लिए बिना बयाना मत दीजिए।” अनिल श्रीवास्तव, प्रॉपर्टी वकील, इंदौर |
बयाना देने से पहले आज ही कर लें ये 5 काम
- संपदा 2.0 पर इलाके का गाइडलाइन रेट देखें और वर्ग फुट में बदलें।
- rera.mp.gov.in पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन और पूरा होने की तारीख जाँचें।
- बिल्डर से कारपेट एरिया और पूरी कॉस्ट शीट लिखित में लें।
- कीमत में 10.5% रजिस्ट्री और लागू GST जोड़कर असली बजट बनाएँ।
- ज़मीन के कागज़ वकील से जँचवाएँ और EMI आय के एक-तिहाई के आसपास रखें।

फोटो: घर खरीदने से पहले की चेकलिस्ट: सेव करें, शेयर करें (img5_checklist.png)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: कलेक्टर गाइडलाइन रेट कहाँ देखें?
उत्तर: sampada.mpigr.gov.in या संपदा 2.0 ऐप पर, बिना लॉगिन। रेट आम तौर पर प्रति वर्ग मीटर में होता है।
प्रश्न: अगर सौदा गाइडलाइन रेट से कम में हो तो स्टांप शुल्क किस पर लगेगा?
उत्तर: स्टांप शुल्क गाइडलाइन मूल्य और सौदे की कीमत में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगता है।
प्रश्न: MP में रजिस्ट्री का कुल खर्च कितना है?
उत्तर: बिक्री विलेख पर स्टांप शुल्क 7.5% और पंजीयन शुल्क 3%, कुल करीब 10.5%।
प्रश्न: रेडी-टू-मूव फ्लैट पर GST लगेगा?
उत्तर: CC या OC मिल चुके फ्लैट की बिक्री पर GST नहीं लगता। निर्माणाधीन पर 5%, किफायती पर 1%।
प्रश्न: RERA नंबर कैसे जाँचें?
उत्तर: rera.mp.gov.in पर प्रोजेक्ट का नाम या नंबर खोजें।
प्रश्न: बिल्डर ने कब्ज़े में देरी कर दी, क्या करें?
उत्तर: धारा 18 के तहत ब्याज सहित रिफंड या देरी के हर महीने का ब्याज माँग सकते हैं। MP RERA पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें।
यह जानकारी 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध सरकारी पोर्टलों, RERA अधिनियम 2016 और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। सौदे से पहले संपदा 2.0, MP RERA, बैंक और वकील से पुष्टि कर लें। लेख के उदाहरण सिर्फ समझाने के लिए हैं।
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