State News | Editorial Desk

17 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक ऐसे नेता के रूप में, जिन्होंने बीते एक दशक से अधिक समय में भारत की आर्थिक, सामरिक, तकनीकी और वैश्विक पहचान को नए सिरे से गढ़ा है, उनके जन्मदिन पर यह उचित अवसर है कि हम "नए भारत" की उस यात्रा को समझें, जिसे कई विश्लेषक "विश्वकर्मा" जैसी निर्माण-भावना से जोड़कर देखते हैं। एक कुम्हार जिस तरह मिट्टी को आकार देता है, उसी तरह पिछले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, रक्षा क्षमता और वैश्विक कूटनीति को एक नई दिशा मिली है।

यह लेख उन्हीं उपलब्धियों की पड़ताल करता है, जिनके आधार पर समर्थक यह दावा करते हैं कि भारत आज पहले से कहीं अधिक सक्षम और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में उभरा है।

आर्थिक मोर्चे पर मजबूती

पिछले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था ने लगातार तेज़ विकास दर दर्ज की है। हाल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जो विश्व के अग्रणी देशों में सबसे अधिक है। क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity) के आधार पर भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और नॉमिनल जीडीपी के लिहाज़ से भी यह दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। विश्व बैंक, आईएमएफ और मूडीज़ जैसी संस्थाओं ने भारत को जी-20 देशों में सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताया है।

इस विकास के पीछे प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजनाएं, "मेक इन इंडिया" अभियान, और व्यापार को आसान बनाने वाले सुधार प्रमुख कारण माने जाते हैं। स्टार्टअप इंडिया पहल के चलते आज भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बन गया है, जहां हजारों युवा उद्यमी नवाचार के दम पर रोजगार सृजन कर रहे हैं।

डिजिटल इंडिया: तकनीक से सशक्तिकरण

नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक डिजिटल इंडिया मिशन है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने देश में डिजिटल लेन-देन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आज छोटे शहरों और गांवों तक में सब्जी विक्रेता से लेकर बड़े व्यापारी तक, हर कोई UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करता है। यह प्रणाली अब दुनिया के कई देशों में भी अपनाई जा रही है, जो भारत की डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षमता को वैश्विक मान्यता दिलाती है।

आधार, जनधन खाते और मोबाइल कनेक्टिविटी की "JAM ट्रिनिटी (Jan-Dhan Yojna, Aadhar- based biometric verification and Mobile – based OTP verification)" ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) को संभव बनाया, जिससे सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और लीकेज में उल्लेखनीय कमी आई और करोड़ों रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंचे।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

"आत्मनिर्भर भारत" अभियान का सबसे ठोस प्रमाण रक्षा क्षेत्र में देखने को मिलता है। रक्षा मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है। बीते पांच वर्षों में यह आंकड़ा लगभग तीन गुना बढ़ा है। आज भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है, और निर्यातकों की संख्या भी 128 से बढ़कर 145 हो गई है।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब केवल हथियारों का आयातक नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद वैश्विक रक्षा निर्माता के रूप में स्थापित हो रहा है। स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान, आकाश मिसाइल प्रणाली और कई नौसैनिक पोतों का निर्माण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहे हैं।

अंतरिक्ष और विज्ञान में नई ऊंचाइयां

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 मिशन के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर इतिहास रचा, ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना। इसके बाद गगनयान मिशन के जरिए मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन उपलब्धियों ने वैश्विक विज्ञान समुदाय में भारत की साख को और मजबूत किया है, और युवाओं के बीच विज्ञान व तकनीक के प्रति नई रुचि जगाई है।

वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़

भारत 2026 में BRICS (ब्रिक्स) की अध्यक्षता कर रहा है, 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता को व्यापक रूप से सफल माना गया, जहां भारत ने खुद को केवल एक आयोजक नहीं, बल्कि "ग्लोबल साउथ की आवाज़" के रूप में प्रस्तुत किया। अफ्रीकी संघ को जी-20 का स्थायी सदस्य बनवाने में भारत की पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। कोविड-19 महामारी के दौरान "वैक्सीन मैत्री" पहल के तहत भारत ने कई देशों को मुफ्त और रियायती दरों पर वैक्सीन उपलब्ध कराई, जिससे वैश्विक मंच पर भारत की मानवीय छवि और मजबूत हुई।

आज भारत की कूटनीति अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ, खाड़ी देशों और पड़ोसी राष्ट्रों के साथ संतुलित संबंधों के लिए जानी जाती है, जिसे रणनीतिक विश्लेषक "बहु-संरेखण" (multi-alignment) की नीति कहते हैं।

बुनियादी ढांचे का कायाकल्प

राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की रफ्तार पिछले एक दशक में कई गुना बढ़ी है। मेट्रो रेल नेटवर्क अब दर्जनों शहरों तक पहुंच चुका है, जबकि बंदरगाहों की क्षमता और रेलवे के आधुनिकीकरण पर भी बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।

सामाजिक कल्याण और समावेशी विकास

आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिला है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए लाखों बेघर परिवारों को पक्का घर मिला, तो वहीं स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन में बदल दिया। जनधन योजना के जरिए बैंकिंग व्यवस्था से बाहर रहे करोड़ों लोगों को वित्तीय प्रणाली से जोड़ा गया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है।

मुद्रा योजना जैसी पहलों ने छोटे उद्यमियों, विशेष रूप से महिलाओं, को बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त किया है।

कृषि, कौशल और युवा शक्ति

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के जरिए सीधे किसानों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है। फसल बीमा योजना ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया है। दूसरी ओर, स्किल इंडिया मिशन के तहत लाखों युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

खेलो इंडिया अभियान ने ग्रासरूट स्तर पर खेल प्रतिभाओं को पहचानने और तराशने का काम किया है, जिसका असर हाल के वर्षों में ओलंपिक और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के बेहतर प्रदर्शन में भी देखा गया है। पर्यटन क्षेत्र में भी "देखो अपना देश" जैसी पहलों के जरिए घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को भी लाभ मिल रहा है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने लिंग अनुपात और बालिका शिक्षा को लेकर सामाजिक सोच बदलने का प्रयास किया है। संसद में महिला आरक्षण से जुड़े कानून को मंजूरी मिलना भी एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है, जो आने वाले वर्षों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देकर उन्हें धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से भी राहत दिलाई गई है।

आगे की राह: विकसित भारत 2047

सरकार ने वर्ष 2047 तक, जब भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। इस दृष्टिकोण के केंद्र में आर्थिक सुधार, तकनीकी नवाचार, सामाजिक समावेशन और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका शामिल है। यदि मौजूदा विकास दर और सुधारों की गति बरकरार रहती है, तो विश्लेषकों का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है।

संतुलित दृष्टिकोण: चुनौतियां भी बाकी हैं

एक जिम्मेदार समाचार माध्यम के रूप में यह उल्लेख करना भी जरूरी है कि हर बड़ी उपलब्धि के साथ चुनौतियां भी जुड़ी रहती हैं। विपक्षी दल और कई अर्थशास्त्री यह सवाल उठाते रहे हैं कि क्या जीडीपी वृद्धि का लाभ समान रूप से सभी वर्गों तक पहुंच रहा है। बेरोजगारी, विशेष रूप से युवाओं में, और महंगाई को लेकर भी सार्वजनिक बहस जारी रहती है। जीडीपी रैंकिंग को लेकर भी अलग-अलग अनुमान सामने आते रहे हैं, क्योंकि रुपये के मूल्य में उतार-चढ़ाव से डॉलर में मापी जाने वाली रैंकिंग प्रभावित होती है। इसके अलावा प्रेस की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं और क्षेत्रीय असमानता जैसे मुद्दों पर भी नागरिक समाज और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

इन पहलुओं का उल्लेख इसलिए ज़रूरी है क्योंकि किसी भी लोकतंत्र में संतुलित और तथ्यपरक पत्रकारिता ही पाठकों का भरोसा बनाए रखती है।

निष्कर्ष

76वें जन्मदिन के अवसर पर नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियों को देखा जाए, तो यह स्पष्ट है कि भारत ने अर्थव्यवस्था, तकनीक, रक्षा, अंतरिक्ष और कूटनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। साथ ही, आगे की राह में रोजगार सृजन, समावेशी विकास और सामाजिक सद्भाव जैसी चुनौतियों पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता भी बनी रहेगी। State News की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, और आशा है कि आने वाला वर्ष देश के लिए विकास, एकता और समृद्धि लेकर आए।

"नरेंद्र मोदी - नए भारत के विश्वकर्मा: नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के पिछले 25 वर्ष उन्हें वास्तव में नए भारत के विश्वकर्मा के रूप में स्थापित करते हैं। यही कारण है कि उनका जन्मदिवस 'विश्वकर्मा जयंती' के दिन होना महज़ एक संयोग मात्र नहीं प्रतीत होता।"


Image Credit – Press Information Bureau