बालाघाट जिले के कृषि परिदृश्य में बदलाव की एक नई बयार बह रही है। जिले की बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समिति बनेरा में 18 मई को एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य शासन की आधुनिक डिजिटल प्रणालियों और उन्नत कृषि तकनीकों को धरातल पर उतारना था। इस कार्यक्रम में उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने विशेष रूप से शिरकत की और किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर खाद वितरण की वर्तमान व्यवस्था तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों के लाभों पर चर्चा की।
ई-विकास पोर्टल: खाद वितरण में पारदर्शिता का नया युग
उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बनेरा समिति के प्रांगण में उपस्थित किसानों को 'ई-विकास पोर्टल' की उपयोगिता से विस्तारपूर्वक अवगत कराया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा संचालित यह पोर्टल खाद वितरण प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इस पोर्टल के माध्यम से:
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खाद की उपलब्धता और आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हो गई है।
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पात्र किसानों को खाद प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता।
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सिस्टम में हेरफेर की गुंजाइश खत्म होने से कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगा है।
श्री मालवीय ने स्वयं मौके पर उपस्थित होकर किसानों से चर्चा की और पोर्टल के उपयोग के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को समझा। उन्होंने किसानों को यह आश्वस्त किया कि प्रशासनिक स्तर पर पोर्टल को और अधिक किसान-हितैषी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
डीएसआर (DSR) तकनीक: कम लागत, अधिक उत्पादन
संवाद के अगले चरण में, कृषि विभाग द्वारा धान की 'डायरेक्ट सीडेड राइस' यानी डीएसआर पद्धति को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। श्री मालवीय ने बताया कि जल संकट और बढ़ती मजदूरी की लागत के इस दौर में डीएसआर एक वरदान साबित हो रही है। इस पद्धति की प्रमुख विशेषताओं पर उन्होंने प्रकाश डाला:
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जल संरक्षण: पारंपरिक रोपाई पद्धति में पानी का अत्यधिक अपव्यय होता है, जबकि डीएसआर तकनीक मिट्टी की नमी को संरक्षित रखती है।
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श्रम लागत में कटौती: बिचड़ा तैयार करने और रोपाई करने की मेहनत और खर्च में भारी कमी आती है।
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समय की बचत: सीधा बीज बोने से फसल चक्र व्यवस्थित होता है और किसान को अगली फसल के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
किसानों के अनुभव से मिला नई तकनीकों का प्रमाण
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि एक स्थानीय किसान द्वारा साझा किए गए उनके प्रत्यक्ष अनुभव रहे। समिति क्षेत्र के एक प्रगतिशील किसान ने बताया कि उन्होंने पिछले सत्र में सुपर सीडर मशीन की सहायता से डीएसआर तकनीक का उपयोग किया था, जिसके परिणाम चमत्कारिक रहे। उन्होंने साझा किया कि:
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धान की पैदावार: डीएसआर पद्धति अपनाने से उनके धान की फसल में उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
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अगली फसलों को लाभ: सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिस खेत में डीएसआर तकनीक का उपयोग किया गया, उसी खेत में रबी सीजन के दौरान चना और गेहूं की फसल का उत्पादन सामान्य से डेढ़ गुना अधिक प्राप्त हुआ।
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भूमि की गुणवत्ता: किसान ने बताया कि इस तकनीक से मिट्टी की संरचना में सुधार हुआ है और नमी धारण करने की क्षमता बढ़ी है, जिसका लाभ आने वाली हर फसल को मिल रहा है।
कृषि को लाभकारी बनाने का आह्वान
उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने उपस्थित किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि बालाघाट जिले की उर्वर भूमि को बचाने और इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखने के लिए पुरानी ढर्रे की खेती से बाहर निकलना होगा। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे विभाग द्वारा दी जा रही तकनीकी जानकारी को केवल सुनें नहीं, बल्कि उसे अपने खेतों में अपनाएं।
भविष्य की कार्ययोजना
विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया कि बालाघाट जिले के किसानों को नई तकनीकों, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए ऐसे शिविर लगातार आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य केवल खाद वितरण करना ही नहीं है, बल्कि किसान की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना है ताकि खेती एक घाटे का सौदा न रहकर एक सफल व्यवसाय बन सके। बनेरा समिति का यह संवाद कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि बालाघाट का कृषक समाज अब तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए पूरी तरह तैयार है।
Image source: https://balaghat.mpinfo.org
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