मध्य प्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक सरल, सुगम और पूरी तरह किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार, बालाघाट में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले के निजी एवं सहकारी क्षेत्र के सभी प्रमुख उर्वरक विक्रेताओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान विक्रेताओं को हाइब्रिड मोड यानी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों के जरिए उर्वरक वितरण की नई और उन्नत व्यवस्था की विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में उपस्थित उपसंचालक कृषि श्री फूल सिंह मालवीय ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में गत 1 अप्रैल 2026 से उर्वरक वितरण को 'ई-विकास प्रणाली' के माध्यम से अनिवार्य किया गया था। अब शासन द्वारा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 30 जुलाई 2026 से इस व्यवस्था में और अधिक सरलीकरण किया गया है, जिसके तहत अब उर्वरक वितरण हाइब्रिड मोड में किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस नई व्यवस्था के लागू होने से किसानों को अब ई-विकास प्रणाली के साथ-साथ पारंपरिक ऑफलाइन माध्यम से भी आसानी से उर्वरक उपलब्ध कराया जा सकेगा।
आवश्यक दिशा-निर्देश और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान
प्रशिक्षण सत्र के दौरान सभी उर्वरक विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए गए कि वे बिना टोकन के उर्वरक प्राप्त करने वाले किसानों का पूरा रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से संधारित करें। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया कि खाद का वितरण केवल 'उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985' के निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही किया जाए। कार्यक्रम में विक्रेताओं को उर्वरक वितरण के दौरान मैदानी स्तर पर आने वाली विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं और चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई तथा मौके पर ही उनके उचित समाधान बताए गए।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले में उर्वरक वितरण की पूरी प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है, ताकि किसी भी किसान को खाद की किल्लत का सामना न करना पड़े और उन्हें आवश्यकतानुसार समय पर खाद मिल सके।
कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति
इस प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम में कृषि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और मैदानी अमला पूरी मुस्तैदी से उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान सहायक संचालक कृषि श्री राजेश खोबरागड़े, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा टेमरे, श्रीमती विनीता रंगारी, सहायक सांख्यिकी अधिकारी श्री एम.एल. उइके, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री विकास चौधरी एवं श्री दीपक तुरकर सहित विकासखंड बालाघाट के अंतर्गत आने वाले सभी निजी एवं सहकारी उर्वरक विक्रेता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस पहल से जिले के किसानों को आने वाले कृषि सत्र में उर्वरक प्राप्त करने में बहुत बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
मुख्य बिंदु
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हाइब्रिड मोड से वितरण: शासन के निर्देशानुसार बालाघाट में निजी एवं सहकारी क्षेत्र के उर्वरक विक्रेताओं को हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) के माध्यम से उर्वरक वितरण का प्रशिक्षण दिया गया।
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ई-विकास प्रणाली और सरलीकरण: प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से ई-विकास प्रणाली अनिवार्य की गई थी, जिसे अब 30 जुलाई 2026 से और अधिक सरल बनाते हुए हाइब्रिड मोड में लागू किया गया है।
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रिकॉर्ड संधारण के निर्देश: बिना टोकन के उर्वरक प्राप्त करने वाले किसानों का पूरा रिकॉर्ड संधारित करने तथा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों के तहत खाद वितरण के निर्देश दिए गए।
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समय पर उपलब्धता का उद्देश्य: इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों को समय पर खाद की सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित उपलब्धता सुनिश्चित कराना है।
image source: https://balaghat.mpinfo.org
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