मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी समुदायों के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक अत्यंत सराहनीय और जन-केंद्रित पहल की गई है। राज्य के सुदूर और दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों तक शासन की पहुंच को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 'सबसे दूर सबसे पास' अभियान का संचालन किया गया। इस अभियान के तहत मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के माननीय सदस्य श्री भगत सिंह नेताम ने बालाघाट जिले के अत्यंत दूरस्थ ग्रामीण अंचलों का सघन दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य न केवल ग्रामीणों की समस्याओं को सुनना था, बल्कि उन्हें शासन की योजनाओं का सीधा लाभ दिलाना भी सुनिश्चित करना था।
अभियान की आधारशिला: जन-सरोकार और सीधा संवाद
'सबसे दूर सबसे पास' अभियान के अंतर्गत श्री भगत सिंह नेताम ने बालाघाट जिले के उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी, जो भौगोलिक रूप से मुख्यधारा से कटे हुए प्रतीत होते हैं और जहां विकास की किरणें अभी भी पूरी तरह से नहीं पहुंच पाई हैं। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने लौगुर, समनापुर, परसाटोला और उकवा जैसे अनेक ग्रामों का दौरा किया। इन क्षेत्रों में पहुंचकर उन्होंने न केवल औपचारिकता पूरी की, बल्कि गांव के हर तबके के व्यक्ति से सीधा और आत्मीय संवाद स्थापित किया।
इस दौरान आदि सेवा केंद्रों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने वहां आने वाले नागरिकों की आधारभूत आवश्यकताओं को बारीकी से समझा। श्री नेताम ने संवाद के दौरान ग्रामीणों से यह जानने का प्रयास किया कि क्या उन्हें सरकार द्वारा चलाई जा रही जन-कल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल पा रहा है। यह दौरा इस बात का प्रमाण है कि आयोग अब दफ्तरों की फाइलों से निकलकर जनता की चौखट तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रमुख चर्चा के बिंदु और प्रशासनिक निर्देश
आयोग के सदस्य श्री भगत सिंह नेताम ने ग्रामीणों के साथ बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। ग्रामीणों द्वारा अपनी समस्याओं को साझा करते समय उन्होंने पूरी संवेदनशीलता दिखाई।
उनके दौरे के प्रमुख प्रशासनिक और सामाजिक पहलू निम्नलिखित रहे:
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योजनाओं की समीक्षा: उन्होंने ग्रामीणों से पूछा कि क्या उन्हें समय पर राशन, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा संबंधी सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं।
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अधिकारियों को कड़े निर्देश: दौरे के दौरान सामने आई समस्याओं के समाधान के लिए श्री नेताम ने मौके पर ही उपस्थित संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण समय-सीमा के भीतर और प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
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गुणवत्ता और पहुंच: शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देशित किया कि वे दूरस्थ अंचलों में भी सेवाओं की गुणवत्ता में कोई समझौता न करें।
जन-प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी
इस अभियान को सफल बनाने में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनुपमा नेताम की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने भी बालाघाट जिले की विभिन्न पंचायतों का सघन भ्रमण किया और स्थानीय निवासियों से मुलाकात की। उन्होंने ग्रामीणों की स्थानीय समस्याओं को एक डायरी में नोट किया और उन्हें आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया। स्थानीय जन-प्रतिनिधियों की इस सक्रियता से ग्रामीणों का उत्साह बढ़ा और उन्हें यह विश्वास हुआ कि अब उनकी आवाज शासन के उच्च स्तर तक पहुंच रही है।
ग्रामीणों की उम्मीद और शासन की प्रतिबद्धता
अभियान को लेकर बालाघाट के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। वर्षों से अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान की बाट जोह रहे ग्रामीणों ने जब राज्य स्तरीय आयोग के सदस्य को अपने बीच पाया, तो उनमें एक नई उम्मीद जगी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के इतने करीब आने से अब उन्हें विश्वास है कि आने वाले समय में उनकी छोटी से छोटी समस्याएं भी हल हो जाएंगी।
अभियान का मूल दर्शन ही यही है कि 'सबसे दूर' यानी जो व्यक्ति भौगोलिक या सामाजिक रूप से सबसे पीछे खड़ा है, 'सबसे पास' यानी शासन-प्रशासन की मदद उस तक सबसे पहले पहुंचे। श्री भगत सिंह नेताम ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि आयोग उनके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
निष्कर्ष: विकास की मुख्यधारा का लक्ष्य
बालाघाट जिले में संचालित यह अभियान मात्र एक दौरा नहीं, बल्कि राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचाना शामिल है। अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा शुरू किया गया 'सबसे दूर सबसे पास' अभियान आगामी दिनों में जिले के आदिवासी अंचलों में एक सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बनेगा। यह स्पष्ट है कि जब आयोग के सदस्य खुद धरातल पर जाकर काम करेंगे, तो प्रशासनिक तंत्र में भी सक्रियता बढ़ेगी और योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगा।
image source : gemini ai
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