सिवनी -:

तहसील मुख्यालय घंसौर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। एक ओर अघोषित बिजली कटौती और बार-बार होने वाली ट्रिपिंग से आमजन परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर विद्युत लाइन में लगाए गए उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटिया गुणवत्ता के उपकरण लगाए जाने के कारण विद्युत तंत्र बढ़ते लोड को सहन नहीं कर पा रहा है, जिससे बार-बार जम्फर उड़ने और आपूर्ति बाधित होने की स्थिति बन रही है।

 

क्षेत्रवासियों का कहना है कि मेंटेनेंस के नाम पर भी घंटों बिजली बंद रखी जाती है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार दिखाई नहीं देता। लोगों का आरोप है कि यदि नियमित और गुणवत्तापूर्ण रखरखाव किया गया होता तो बार-बार ट्रिपिंग और फाल्ट की समस्या उत्पन्न नहीं होती। मेंटेनेंस के बाद भी हर आधे घंटे में बिजली गुल होने जैसी स्थिति लोगों की परेशानी को और बढ़ा रही है।

 

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कथित रूप से मोटे कमीशन के चक्कर में निम्न गुणवत्ता के उपकरण लगाए गए, जिसके कारण अब विद्युत व्यवस्था लगातार जवाब दे रही है। हालांकि इस संबंध में विभागीय स्तर पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

भीषण गर्मी और उमस के बीच लगातार बाधित हो रही बिजली आपूर्ति ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। दिन और रात में कई बार बिजली बंद होने से पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरण ठप हो जाते हैं, जिससे बच्चे, बुजुर्ग और मरीज सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। रात में बिजली गुल रहने से लोगों की नींद प्रभावित हो रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

 

बिजली संकट का असर स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार पर भी पड़ रहा है। फोटोकॉपी सेंटर, कंप्यूटर कार्य, वेल्डिंग, आटा चक्की और अन्य विद्युत आधारित व्यवसाय बार-बार बिजली बाधित होने के कारण प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि लगातार कटौती और ट्रिपिंग से आर्थिक नुकसान हो रहा है तथा ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है।

 

वहीं बिजली कटौती का असर पेयजल व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। बिजली न होने से मोटरें और जल प्रदाय योजनाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं, जिससे नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति बनने लगी है।

 

बिजली विभाग की ओर से आवश्यक मेंटेनेंस और तकनीकी कारणों का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। उनका कहना है कि घंटों बिजली बंद रखने के बावजूद न तो ट्रिपिंग रुक रही है और न ही फाल्ट की समस्या समाप्त हो रही है।

 

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बिजली व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराने, लगाए गए उपकरणों की गुणवत्ता की समीक्षा करने, मेंटेनेंस कार्यों की वास्तविकता की जांच कराने, अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाने तथा स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भीषण गर्मी के इस दौर में जनता को राहत मिल सके।