प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर को ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में कार्यक्रम की 12 साल की यात्रा को याद किया। उन्होंने देशभर के उन किसानों, नवाचारकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सराहना की, जो अपने स्तर पर समाज में बदलाव ला रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को तीर्थयात्रा जैसा अनुभव बताया, जिसके केंद्र में देश की ‘लोकशक्ति’ है।
एपिसोड में प्राकृतिक खेती, पारंपरिक हुनर, जल संरक्षण, स्थानीय उत्पाद, डिजिटल स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान और मोटे अनाज जैसे विषय छाए रहे। त्योहारों के मौसम को देखते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील भी की।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| एपिसोड | 139वां |
| प्रसारण | रविवार, 25 अक्टूबर 2026 |
| कार्यक्रम की यात्रा | 12 वर्ष (शुरुआत 2014 में विजयादशमी के अवसर पर) |
| प्रमुख विषय | प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, स्थानीय और आदिवासी उत्पाद, डिजिटल स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान और शोध, मिलेट्स, राष्ट्रीय एकता |
| मुख्य अपील | त्योहारों में स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देना |
| विषय | स्थान / संस्थान | मुख्य बिंदु | संदेश |
|---|---|---|---|
| प्राकृतिक कपास | पंजाब का मालवा क्षेत्र | ‘नव-त्रिन्जन’ पहल, ‘खेती विरासत मिशन’ से जुड़ी; रसायन-मुक्त और प्राकृतिक रंगों वाली कपास; बुनकरी स्कूल | खेती, कपड़ा निर्माण और पारंपरिक हुनर का जुड़ाव |
| नदी पुनर्जीवन | हेवल नदी, टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) | वर्षाजल रोकना, पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना, पौधारोपण | जल संरक्षण सामुदायिक जिम्मेदारी है |
| स्वदेशी उत्पाद | पूर्णिया (बिहार), कलबुर्गी (कर्नाटक) | पूर्णिया का मखाना ग्रीस पहुंचा, कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव गई | ‘वोकल फॉर लोकल’ से नए बाजार |
| आदिवासी उत्पाद | महाराष्ट्र: ‘शबरी नेचुरल्स’ | शहद, महुआ, चिरौंजी, बांस उत्पाद; पैकेजिंग को जापान का ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ | पारंपरिक कला और आधुनिक डिजाइन का मेल |
| बांस आधारित पैकेजिंग | कर्नाटक का स्टार्टअप | बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री | प्लास्टिक के विकल्प और स्थानीय उद्यम |
| डिजिटल स्वास्थ्य | ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन | अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन | दूरदराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सलाह |
| विज्ञान और शोध | आईआईटी मद्रास: सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर | 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग का लक्ष्य; डेटा शोध के लिए ओपन-सोर्स | तंत्रिका विज्ञान शोध को गति |
| वैज्ञानिक की स्मृति | नारिंदर सिंह कपानी (मोगा, पंजाब) | ‘फाइबर ऑप्टिक्स का जनक’; 31 अक्टूबर को 100वीं जयंती | युवा वैज्ञानिकों के जीवन से प्रेरणा लें |
| राष्ट्रीय एकता | सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती | 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस; ‘रन फॉर यूनिटी’ | उत्साह से भागीदारी की अपील |
| मोटे अनाज | भारत और पूर्वोत्तर | 2023 अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष; पूर्वोत्तर में फिर से खेती अपनाने के प्रयास | पारंपरिक कृषि ज्ञान और खाद्य विविधता |
12 साल का सफर: आम लोगों के असाधारण कामों को मंच
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि ‘मन की बात’ की शुरुआत 2014 में विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। बीते 12 वर्षों में इस कार्यक्रम के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे लोगों की कहानियां सामने आईं, जिनके काम समाज के लिए उपयोगी हैं, लेकिन जिनकी ओर अक्सर व्यापक स्तर पर ध्यान नहीं जाता।
कार्यक्रम का मूल विचार केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि नागरिकों के प्रयासों, सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय स्तर पर हो रहे सकारात्मक बदलावों को देश के सामने लाना भी रहा है। खेती, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, विज्ञान और पारंपरिक कौशल से जुड़ी पहलों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने जनभागीदारी की भूमिका पर जोर दिया।
पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती: ‘नव-त्रिन्जन’ पहल की चर्चा
प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास का उल्लेख किया। इस पहल को ‘नव-त्रिन्जन’ नाम दिया गया है, जिसे ‘खेती विरासत मिशन’ से जोड़ा गया।

इस प्रयास के तहत रसायनों के इस्तेमाल के बिना कपास उगाने और प्राकृतिक रंगों वाली कपास को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास से तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अतिरिक्त रासायनिक रंगों की जरूरत कम हो सकती है। इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को घटाने की संभावना बनती है।
इस पहल का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष पारंपरिक बुनकरी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इसके लिए बुनकरी स्कूल शुरू किए जाने का भी उल्लेख किया गया। ऐसी पहलें खेती को कपड़ा निर्माण और पारंपरिक हुनर से जोड़ती हैं तथा महिलाओं और स्थानीय कारीगरों के लिए नए अवसर बनाने में मदद कर सकती हैं।
टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को नया जीवन
जल संरक्षण के विषय पर प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के प्रयासों की सराहना की।
बताया गया कि नदी में पानी कम होने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत भी प्रभावित हो रहे थे। इसके बाद गांव के लोगों और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर वर्षाजल को रोकने, पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने तथा पौधारोपण जैसे कदम उठाए।

इस सामुदायिक प्रयास से नदी के पुनर्जीवन और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों को फिर से सक्रिय करने में मदद मिलने की बात कही गई। यह उदाहरण बताता है कि जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी, वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे कदम मिलकर जलस्रोतों की देखभाल में योगदान दे सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने प्रकृति के प्रति सम्मान, स्वच्छता और जलस्रोतों की देखभाल को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया।
त्योहारों में स्वदेशी उत्पाद खरीदने की अपील
त्योहारों के मौसम में प्रधानमंत्री ने लोगों से खरीदारी करते समय स्थानीय कारीगरों और देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को चुनने से कारीगरों का उत्साह बढ़ता है और ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को समर्थन मिलता है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय उत्पादों के विदेशी बाजारों तक पहुंचने के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बिहार के पूर्णिया के मखाने के ग्रीस तक पहुंचने और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल के मालदीव जाने का उल्लेख किया। इन उदाहरणों के जरिए भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए बाजारों की संभावनाओं को रेखांकित किया गया।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का अर्थ केवल घरेलू खरीदारी तक सीमित नहीं है। बेहतर गुणवत्ता, पैकेजिंग, आपूर्ति व्यवस्था और बाजार तक पहुंच के जरिए स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
आदिवासी उत्पादों की पैकेजिंग को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के उत्पादों और उनकी पैकेजिंग का भी उल्लेख किया। ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से जुड़े उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला की छाप का उपयोग किया गया है।

कार्यक्रम में बताया गया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है। यह उदाहरण पारंपरिक कला, स्थानीय संसाधनों और आधुनिक डिजाइन को एक साथ लाने की संभावनाओं को दिखाता है।
प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के एक बांस-आधारित स्टार्टअप का भी उल्लेख किया, जो बांस और कृषि से निकलने वाले अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री बना रहा है। ऐसे प्रयोग प्लास्टिक के विकल्प विकसित करने, कृषि अवशेषों का उपयोग करने और स्थानीय उद्यमों के लिए अवसर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
ई-संजीवनी: तकनीक के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच
डिजिटल स्वास्थ्य सेवा पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इसके जरिए अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन हो चुके हैं।
इस व्यवस्था के माध्यम से मरीज दूर बैठे चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचने में समय और दूरी की बाधाएं आती हैं।
प्रधानमंत्री ने तकनीक को आम जीवन में उपयोगी बनाने पर जोर दिया। ई-संजीवनी जैसे प्लेटफॉर्म यह दिखाते हैं कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल स्वास्थ्य परामर्श की पहुंच बढ़ाने में किया जा सकता है। हालांकि, मरीज की स्थिति के अनुसार प्रत्यक्ष जांच और अस्पताल में उपचार की आवश्यकता बनी रह सकती है।
आईआईटी मद्रास का ब्रेन सेंटर: मानव मस्तिष्क के अध्ययन की दिशा में प्रयास
विज्ञान और शोध के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने आईआईटी मद्रास स्थित ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का उल्लेख किया। यहां मानव मस्तिष्क की उच्च-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार करने वाली तकनीक पर काम हो रहा है।
इस परियोजना का लक्ष्य 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग करना और उनसे प्राप्त डेटा को शोध के लिए उपलब्ध कराना है। इस डेटा को अलग-अलग क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए ओपन-सोर्स रूप में उपलब्ध कराने की योजना भी बताई गई।
मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली को बेहतर समझना तंत्रिका विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है। अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों पर शोध में भी मस्तिष्क संबंधी विस्तृत डेटा उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किसी तकनीकी शोध परियोजना को इन बीमारियों का इलाज मानना उचित नहीं होगा; ऐसे शोध का उद्देश्य ज्ञान और भविष्य के उपचार-विकल्पों को आगे बढ़ाना है।
नारिंदर सिंह कपानी: फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिक का योगदान
प्रधानमंत्री ने महान वैज्ञानिक नारिंदर सिंह कपानी को भी याद किया, जिन्हें फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में अग्रणी योगदान के लिए ‘फाइबर ऑप्टिक्स का जनक’ कहा जाता है। उनका जन्म पंजाब के मोगा जिले में हुआ था और 31 अक्टूबर को उनकी 100वीं जयंती मनाई जाएगी।
पतले फाइबर के माध्यम से प्रकाश के संचार पर उनके शोध ने संचार तकनीक के विकास को नई दिशा देने में योगदान दिया। आज फाइबर ऑप्टिक्स आधुनिक दूरसंचार और तेज गति से डेटा भेजने वाली प्रणालियों का महत्वपूर्ण आधार है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से ऐसे वैज्ञानिकों के जीवन और योगदान के बारे में पढ़ने तथा उनसे प्रेरणा लेने का आग्रह किया। यह संदेश विज्ञान शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के प्रति रुचि बढ़ाने के महत्व को भी सामने लाता है।
31 अक्टूबर को ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने का आह्वान
सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर आयोजित होने वाली ‘रन फॉर यूनिटी’ का उल्लेख करते हुए लोगों से उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपील की।
सरदार पटेल का योगदान स्वतंत्र भारत के एकीकरण के संदर्भ में ऐतिहासिक महत्व रखता है। राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रमों का उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और साझा नागरिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना है।
मोटे अनाज की परंपरा और पूर्वोत्तर की पहल
प्रधानमंत्री ने मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती का भी उल्लेख किया। भारत की पहल पर वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया गया था। इस अभियान ने मोटे अनाज के पोषण संबंधी महत्व और पारंपरिक खाद्य संस्कृति पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया।
पूर्वोत्तर भारत में भी मिलेट्स की खेती की पुरानी परंपरा रही है। कार्यक्रम में इस बात पर ध्यान दिलाया गया कि कुछ क्षेत्रों में इस खेती से दूरी बढ़ी थी, लेकिन अब स्थानीय लोग इसे फिर से अपनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
मिलेट्स की खेती और उपभोग को बढ़ावा देना पारंपरिक कृषि ज्ञान के संरक्षण, खाद्य विविधता और स्थानीय कृषि प्रणालियों को मजबूत करने में मददगार हो सकता है। इस दिशा में किसानों को बाजार, प्रसंस्करण और उपभोक्ताओं तक पहुंच उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
संदेश: बदलाव की शुरुआत स्थानीय स्तर से
‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में सामने आई कहानियों का साझा सूत्र स्थानीय प्रयासों की ताकत रहा: चाहे वह प्राकृतिक कपास की खेती हो, सूखते जलस्रोतों को बचाने की पहल, आदिवासी उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, डिजिटल स्वास्थ्य सेवा या वैज्ञानिक शोध।
प्रधानमंत्री के संदेश में त्योहारों के दौरान स्थानीय कारीगरों से खरीदारी करने, जलस्रोतों की देखभाल करने और भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान को जानने जैसे आग्रह शामिल रहे। इन उदाहरणों से यह विचार सामने आया कि सामाजिक बदलाव केवल बड़े कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि समुदायों, संस्थानों और नागरिकों के निरंतर प्रयासों से भी आगे बढ़ता है।
देशभर में स्थानीय स्तर पर चल रही ऐसी पहलों को पहचान देना और उनसे दूसरे क्षेत्रों को सीखने का अवसर मिलना ‘मन की बात’ के इस एपिसोड का प्रमुख संदेश रहा।
मध्य प्रदेश के गांवों और कस्बों में भी जल संरक्षण, वनोपज और स्थानीय हुनर से जुड़ी ऐसी कई पहलें चल रही हैं। ‘मन की बात’ का यह एपिसोड याद दिलाता है कि बड़ा बदलाव अक्सर छोटे, स्थानीय प्रयासों से ही शुरू होता है।
| आंकड़ा | संदर्भ |
|---|---|
| 139 | ‘मन की बात’ का एपिसोड नंबर |
| 12 वर्ष | कार्यक्रम की यात्रा, 2014 की विजयादशमी से |
| करीब 50 करोड़ | ई-संजीवनी के जरिए अब तक हुए टेली-कंसल्टेशन |
| 100 | आईआईटी मद्रास की परियोजना में 3D मैपिंग के लिए लक्षित मानव मस्तिष्क |
| 2023 | अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष |
| 31 अक्टूबर | कपानी की 100वीं जयंती, राष्ट्रीय एकता दिवस और ‘रन फॉर यूनिटी’ |
| आग्रह | क्या करें | कब |
|---|---|---|
| स्वदेशी खरीदारी | त्योहारों में स्थानीय कारीगरों और देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता दें | त्योहारों का मौसम |
| जलस्रोतों की देखभाल | वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पौधारोपण जैसे सामुदायिक प्रयासों में भाग लें | निरंतर |
| वैज्ञानिकों को जानें | नारिंदर सिंह कपानी जैसे वैज्ञानिकों के जीवन और योगदान के बारे में पढ़ें | 31 अक्टूबर, 100वीं जयंती |
| रन फॉर यूनिटी | सरदार पटेल की जयंती पर आयोजित दौड़ में उत्साहपूर्वक शामिल हों | 31 अक्टूबर |
अधिक जानकारी के लिए
- प्रधानमंत्री कार्यालय: मन की बात (आधिकारिक पेज)
- कवर फोटो: Prime Minister's Office, Government of India / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0
- डिजिटल इंडिया: ई-संजीवनी राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा
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