पन्ना जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से गंभीर और सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में पन्ना कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता पन्ना जिले की कलेक्टर श्रीमती ऊषा परमार ने की। बैठक का मुख्य एजेंडा जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के अंतर्गत पन्ना जिले में चल रही एकल एवं समूह नल जल परियोजनाओं के विभिन्न ग्रामों में क्रियान्वित कार्यों की विस्तृत समीक्षा करना था। कलेक्टर ने बैठक के दौरान तमाम प्रगतिरत कार्यों की अद्यतन जानकारी ली और निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए, ताकि आम जनता को योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द मिल सके।

समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु और प्रशासनिक निर्देश

कलेक्टर ऊषा परमार ने बैठक के दौरान साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जनहित से जुड़े पेयजल योजनाओं के कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासनिक कसावट और कार्यों में गति लाने के लिए निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए गए हैं:

  • सतत मॉनिटरिंग और ठेकेदारों पर कार्रवाई: कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे निर्माण कार्यों की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

  • गारंटी राशि जब्ती की चेतावनी: जो ठेकेदार या एजेंसियां इस सप्ताह के भीतर अपने बंद पड़े कार्यों को पुनः प्रारंभ नहीं करेंगी, उनकी गारंटी राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) जब्ती की कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

  • विद्युत समस्याओं का त्वरित निराकरण: विद्युत कंपनी के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे ट्रांसफार्मर संबंधी सभी समस्याओं का तत्काल समाधान करें ताकि बिजली के अभाव में नल जल योजनाएं बाधित न हों।

  • जनपद पंचायत सीईओ की जिम्मेदारी: समस्त जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को यह निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत अधीनस्थ स्टाफ की जिम्मेदारी तय करें और निर्बाध रूप से निर्माण कार्यों का संचालन सुनिश्चित कराएं।

  • ग्राम पंचायतों को संचालन-संधारण की जिम्मेदारी: बैठक में स्पष्ट किया गया कि परियोजना के तहत शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा, किंतु कार्य पूर्ण होने और हैंडओवर के पश्चात संबंधित ग्राम पंचायत को ही नल जल योजना का नियमित संचालन और संधारण करना अनिवार्य होगा।

समन्वय, जल स्रोतों की उपलब्धता और समूह नल जल परियोजनाएं

पेयजल योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए विभागों के बीच तालमेल और तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं:

  • समन्वय के साथ कार्य: पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) विभाग के स्टाफ और संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच व सचिव को आपसी समन्वय स्थापित कर पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।

  • गांव के बाहर जल स्रोत: कुछ चुनिंदा ग्रामों में अधिक सुलभ तरीके से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, जल जीवन मिशन के माध्यम से एकल स्कीम वाले गांवों के बाहर जल स्रोत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इसके लिए कार्यपालन यंत्री पीएचई को आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र प्रेषित करने को कहा गया है।

  • समूह नल जल परियोजनाओं की समीक्षा: कलेक्टर ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित चार समूह नल जल परियोजनाओं के वितरण नेटवर्क, जमीन से जुड़े विभिन्न मामलों और ओवरहेड टैंक (उच्च जलाशय) के निर्माण कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की।

  • बांधों से पानी की आपूर्ति: बांधों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रशासनिक कार्यवाही करने तथा विभिन्न संबंधित विभागों के बीच आपसी समन्वय स्थापित करने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

इस उच्चस्तरीय बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री उमराव सिंह मरावी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री संचित खेत्रपाल, जल निगम के महाप्रबंधक तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। प्रशासन की इस सख्त और समन्वित कार्यप्रणाली से पन्ना जिले में नल जल योजनाओं के कार्यों में तेजी आने की पूरी उम्मीद है।

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