पन्ना। मध्य प्रदेश शासन द्वारा घोषित 'कृषक कल्याण वर्ष 2026' के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पन्ना जिले के किसानों के लिए उर्वरक वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया गया है। अब जिले के किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए वितरण केंद्रों पर घंटों लंबी लाइनों में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान अब ई-विकास पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपना टोकन जनरेट कर सकेंगे और अपनी सुविधानुसार उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इस नवीन व्यवस्था के व्यापक प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन के लिए सोमवार को कलेक्टर कार्यालय पन्ना के सभागार में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
ई-विकास प्रणाली की मुख्य विशेषताएं और किसानों को लाभ
कार्यशाला में विभाग के अधिकारियों द्वारा ई-विकास पोर्टल की बारीकियों को समझाया गया। इस प्रणाली के लागू होने से पन्ना के कृषि परिदृश्य में निम्नलिखित बड़े बदलाव आएंगे:
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स्वयं टोकन जनरेट करने की सुविधा: किसान अब घर बैठे या नजदीकी इंटरनेट कैफे से अपना ई-टोकन जनरेट कर सकेंगे। इससे उन्हें वितरण केंद्र पर जाकर टोकन के लिए इंतजार नहीं करना होगा।
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समय की भारी बचत: टोकन जनरेट करते समय किसान अपनी सुविधा के अनुसार समय और तारीख (स्लॉट) का चयन कर सकते हैं। निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचकर वे तुरंत खाद प्राप्त कर सकेंगे।
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रकबा अनुसार खाद की उपलब्धता: पोर्टल पर किसान के भूमि अभिलेख (खसरा-खतौनी) की जानकारी लिंक होने से, उसे उसके रकबे के अनुसार अनुशंसित उर्वरक की सटीक मात्रा की जानकारी प्राप्त होगी।
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कालाबाजारी पर पूर्ण अंकुश: पूरी प्रक्रिया डिजिटल और आधार आधारित होने के कारण उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की धांधली या कालाबाजारी की संभावना समाप्त हो जाएगी।
टोकन जनरेट करने की प्रक्रिया: चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
पन्ना के किसानों के लिए ई-टोकन जनरेट करने की प्रक्रिया को अत्यंत सरल बनाया गया है। कार्यशाला में बताई गई प्रक्रिया इस प्रकार है:
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वेबसाइट लॉगिन: कृषक को सबसे पहले 'एमपी कृषि' (MP Krishi) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।
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जानकारी का पंजीकरण: पोर्टल पर किसान को अपनी पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार कार्ड और खसरा-खतौनी (भूमि संबंधी दस्तावेज) की जानकारी दर्ज करनी होगी।
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स्लॉट बुकिंग: जानकारी दर्ज करने के बाद किसान को 48 घंटे के भीतर का एक टाइम स्लॉट चुनना होगा।
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केंद्र का चयन: किसान अपनी सुविधा के अनुसार अपने सबसे नजदीकी निर्धारित वितरण केंद्र का चुनाव कर सकते हैं।
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ई-टोकन प्राप्ति: प्रक्रिया पूरी होने पर एक डिजिटल ई-टोकन जनरेट होगा, जिसे लेकर किसान केंद्र पर जा सकेंगे।
कलेक्टर कार्यालय में आयोजित कार्यशाला का विवरण
सोमवार को पन्ना कलेक्टर कार्यालय के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिले के पंजीकृत उर्वरक विक्रेताओं को इस नई व्यवस्था से प्रशिक्षित करना था।
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अधिकारियों का मार्गदर्शन: उप संचालक कृषि, ओ.पी. तिवारी ने विक्रेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ई-विकास प्रणाली प्रत्येक किसान तक उर्वरक की पहुंच सुनिश्चित करने का सबसे पारदर्शी माध्यम है।
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प्रश्नोत्तरी सत्र: कार्यशाला के दौरान विक्रेताओं द्वारा पूछे गए तकनीकी और व्यावहारिक प्रश्नों का मौके पर ही समाधान किया गया।
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समन्वय: इसमें राजस्व और कृषि विभाग के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया ताकि किसानों को तकनीकी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
प्रशासनिक उपस्थिति और सहभागिता
इस महत्वपूर्ण बैठक में पन्ना जिले के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे, जो इस योजना के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे:
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डिप्टी कलेक्टर: अनिल तलैया
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उप संचालक कृषि: ओ.पी. तिवारी
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उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं: डॉ. एन.के. गुप्ता
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जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक पन्ना के प्रबंधक: अमित श्रीवास्तव
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जिला विपणन अधिकारी: श्री धुर्वे
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अनुविभागीय अधिकारी कृषि: यू.एस. बागरी
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वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी: जय सिंह लोधी
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कृषि अभियांत्रिकी इकाई: श्री नवीन
पन्ना के किसानों के लिए भविष्य की राह
ई-विकास पोर्टल केवल एक वितरण माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल संसाधनों का सही वितरण होगा, बल्कि किसानों का मनोबल भी बढ़ेगा क्योंकि उन्हें अब सरकारी दफ्तरों या केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उप संचालक ओ.पी. तिवारी ने पन्ना जिले के समस्त किसान भाइयों से अपील की है कि वे इस नवीन डिजिटल व्यवस्था को अपनाएं और अधिक से अधिक ई-टोकन के माध्यम से ही उर्वरक का उठाव करें।
निष्कर्ष: सुशासन और तकनीक का संगम
पन्ना जिले में ई-विकास पोर्टल के माध्यम से उर्वरक वितरण की शुरुआत सुशासन (Good Governance) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आधार और भूमि रिकॉर्ड का एकीकरण यह सुनिश्चित करता है कि खाद केवल असली हकदार किसान को ही मिले। पन्ना जिला प्रशासन की यह पहल आने वाले खरीफ और रबी सीजन में किसानों के लिए वरदान साबित होगी।
IMAGE SOURCE : https://panna.mpinfo.org
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