सतना। खरीफ सीजन को दृष्टिगत रखते हुए सतना जिले में उर्वरक की निर्बाध और पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में किया गया। बैठक की अध्यक्षता सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने की। इस बैठक में मुख्य रूप से 'ई-विकास पोर्टल' के माध्यम से उर्वरक वितरण की नई प्रणाली, किसानों की समस्याओं के निराकरण और वितरण में पारदर्शिता लाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य और प्रशासनिक दृष्टिकोण बैठक का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जिले के किसानों को खाद के लिए न तो भटकना पड़े और न ही किसी प्रकार की कालाबाजारी का सामना करना पड़े। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी वितरण प्रक्रिया को ई-विकास पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाए ताकि हर एक बोरी का हिसाब पारदर्शी तरीके से रखा जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
इस बैठक में अपर कलेक्टर विकास सिंह, उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास आशीष पाण्डेय, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, एमपी एग्रो, विपणन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ किसान संगठनों के प्रतिनिधि और जिले के उर्वरक थोक एवं फुटकर विक्रेता शामिल हुए।
उर्वरक विक्रेताओं को सख्त चेतावनी कलेक्टर ने बैठक के दौरान विक्रेताओं को सख्त लहजे में हिदायत दी कि उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कोई भी विक्रेता किसान को अनुदानित उर्वरक (जैसे डीएपी) के साथ अन्य गैर-अनुदानित उर्वरक खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। 'टैगिंग' की यह प्रथा पूर्णतः प्रतिबंधित है। यदि कोई विक्रेता इस निर्देश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध लाइसेंस निलंबन जैसी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उप संचालक कृषि ने जानकारी दी कि पूर्व में नियमों के उल्लंघन पर जिले की एक समिति सहित 8 निजी उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं।
फार्मर रजिस्ट्री का महत्व बैठक में फार्मर रजिस्ट्री के कार्य पर भी विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने बताया कि सतना जिले में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे जिले के किसानों को इस रजिस्ट्री की महत्ता समझाएं। किसानों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने सभी खसरों की सटीक जानकारी और ओटीपी समय पर अपने संबंधित पटवारियों को उपलब्ध कराएं, जिससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया में कोई व्यवधान न आए।
सुचारू वितरण के लिए तकनीकी सुधार कलेक्टर ने वितरण प्रणाली को और अधिक लचीला बनाते हुए महत्वपूर्ण घोषणा की। अब स्लाट बुकिंग की सुविधा अंतर-जिला स्तर पर भी उपलब्ध होगी। इसका अर्थ है कि मैहर और रीवा जिले की सीमा से लगे हुए कास्तकार, यदि आवश्यकता हो, तो दूसरे जिले के विक्रय केंद्रों से भी खाद प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही, किसी दुकान में अनियमितता पाए जाने पर यदि उसे फ्रीज करने की कार्यवाही की जाती है, तो वहां मौजूद स्टॉक को बर्बाद या सील करने के बजाय, उसे दूसरी दुकान में स्थानांतरित किया जाएगा ताकि खाद वितरण में कोई बाधा न आए।
उर्वरक उपलब्धता का सांख्यिकीय डेटा उप संचालक कृषि आशीष पाण्डेय ने सतना जिले में उर्वरकों की स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की:
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कुल भंडारण: वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक जिले में 31 हजार 367 मीट्रिक टन उर्वरकों का सुरक्षित भंडारण किया गया है।
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कुल वितरण: वर्तमान तक 9 हजार 270 मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है।
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उपलब्ध स्टॉक: अभी भी मार्कफेड, एनपी एग्रो, सहकारी समितियों और निजी दुकानों के माध्यम से 22 हजार 97 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जो किसानों के लिए पर्याप्त है।
वितरण नीति के बारे में बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएपी खाद की आपूर्ति पूरी तरह से सहकारी समितियों के माध्यम से की जाएगी। वहीं, एनपीके और अन्य फास्फेटिक उर्वरक पहले पैक्स समितियों को उपलब्ध कराए जाएंगे और उसके बाद ही कैश सेल (नकद बिक्री) के लिए जारी किए जाएंगे।
पारदर्शिता और सूचना तंत्र वितरण की जानकारी हर स्तर पर उपलब्ध रहे, इसके लिए कलेक्टर ने एक प्रभावी तंत्र बनाने के निर्देश दिए हैं। अब वितरण से संबंधित अधिकारियों का एक व्हाट्सअप ग्रुप तैयार किया जाएगा। उप संचालक कृषि प्रतिदिन जिले की समितियों और निजी क्षेत्रों में उपलब्ध उर्वरक स्टॉक की स्थिति को इस ग्रुप में पोस्ट करेंगे, जिससे मीडिया और किसान प्रतिनिधि भी इसकी निगरानी कर सकें। किसी भी समस्या या शिकायत के लिए किसानों को टोल फ्री नंबर, सीएम हेल्पलाइन या संबंधित कृषि अधिकारियों के मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।
किसान संगठनों की प्रमुख मांगें बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी व्यावहारिक समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रखा:
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समय-सीमा में वृद्धि: प्रतिनिधियों का कहना था कि स्लाट बुक करने के बाद खाद उठाने की वर्तमान समय-सीमा बहुत कम है, इसे बढ़ाकर कम से कम एक सप्ताह किया जाना चाहिए।
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मांग आधारित आपूर्ति: प्रत्येक तहसील और ब्लॉक के अनुसार किसानों की उर्वरक आवश्यकता का सटीक आंकलन किया जाए और उसी के अनुरूप वितरण केंद्रों पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
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रामपुर बघेलान मंडी: प्रतिनिधियों ने मांग की कि रामपुर बघेलान मंडी में खाद वितरण की समुचित व्यवस्था कराई जाए ताकि दूर-दराज के किसानों को सुविधा हो।
निष्कर्ष सतना जिला प्रशासन द्वारा अपनाई गई यह ई-विकास पोर्टल आधारित व्यवस्था निश्चित रूप से उर्वरक वितरण में बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करेगी और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसानों का हित सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी।
image source : https://satna.mpinfo.org
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