मां जयंती धाम सेवा समिति ने विभिन्न "वृक्षारोपण अभियान" चलाकर,"पर्यावरण संरक्षण" का दिया जनसंदेश।*
संवाददाता निलेश शर्मा,"गुरु"
मो.- 7024262788
धार जिले के बदनावर व सरदारपुर तहसील के मध्य में लाबरिया दसई मार्ग पर स्थित अतिप्राचीन श्री जयंती माता धाम वृक्ष मंदिर श्री उंडेश्वर महादेव धाम में प्राचीन
समय से ही यहां श्री जयंती माता एक पहाड़ी में स्थित गुफा में विराजमान है। क्षेत्र के बुजुर्ग के अनुसार जयंती माता की प्राण प्रतिष्ठा कब हुई किसने की इसका कोई प्रमाण आजतक नहीं मिलता है। 100 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग स्व.परमानंद बगड़ावत निवासी जयंतीमाता एवं स्व. भेरुलालजी रणादावाले पाटीदार निवासी दसई,स्व काशीरामजी पाटीदार बालोद ने कुछ वर्षों पहले संस्था के सदस्यों को बताया था। की प्राचीन समय में यहां घना जंगल हुआ करता था। जंगल में शेर ,चीता जैसे जंतु यहां प्रतिदिन विचरण करते थे। शेर दर्शन हेतु गुफा के अंदर जयंती माता की शरण में आया करता था। स्थल के आसपास शिकारी यहां शिकार करने के लिए आते थे। एक दिन का समय था जब शेर गुफा के अंदर बैठा था तभी शिकारी ने अंदर जाने वाले दरवाजे को बाहर से पत्थर से ढक दिया शेर अंदर ही था तभी शिकारी ने माता जी की परीक्षा लेनी चाहि की यदि माता में शक्ति होगी ,तो शेर को बाहर निकाल कर बताएं कहते हैं की देखते ही देखते शेर गुफा की ऊपरी सतह को फाड़ कर जंगल में भाग गया था। तभी से माता जी की गुफा के अंदर फटा हुआ पत्थर आज भी देखा जा सकता है। वही गुफा के अंदर से एक गुफा और भी किसी अन्य स्थान पर जा रही है। जिसका वर्णन किसी के पास मौजूद नहीं है। उसी चमत्कार समय से आसपास में जयंती माताजी के साक्षात् चमत्कार की चर्चा होने लगी एवं तभी से यहां श्रद्धालुगण, गौमाता के जनने पर दूध ,दही शिरा आदि चढ़ाने हेतु यहां भक्तजन पहुंचने लगे। जिसके तत्पश्चात धार्मिक लोगों का आवागमन धीरे-धीरे धाम पर बढ़ने लगा वर्ष, 1983 में माताजी स्थल पर दसई बालोद क्षेत्र के लोगों ने यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन रखा गया था। पुर्व समय यहां पर घना जंगल हुआ करता था। महायज्ञ का आयोजन माही एवं मधु कन्या नदी के तट पर विराजीत बाबा श्रृंगेश्वर धाम के महंत जूना अखाड़े के संत श्री काशीगिरी महाराज के सानिध्य में यहां महायज्ञ आयोजित किया गया था जिसके बाद वीरान स्थल का कायाकल्प करने के लिए सन् 2000 में ग्राम दसई के 8-10 युवाओं ने माताजी के समक्ष मंदिर जिर्णोद्वार वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं मानवकल्याण के उद्देश्य से युवा पर्यावरणप्रेमी मित्रों ने संकल्प धारणकर यहां कार्य प्रारंभ किया उस समय स्थल पर ना तो पानी की व्यवस्था थी ना ही बिजली की व्यवस्था ना ही यहां वृक्षारोपण के हिसाब से यहां भूमि भी नहीं थी। प्रथमचरण में पर्यावरणप्रेमी मित्रों ने यहां माता के मंदिर परिसर में संगमरमर का सुंदर पत्थर लगवाएं व सिंघासन बनाकर गुफा का निर्माण कराया। आसपास की चार हेक्टर भूमि पर पक्की तारफेंसिंग करवाकर परिसर की सुरक्षा के साथ मुक्तिधाम की भस्मी को गड्ढे में डालकर पूजा करने के बाद,शुरुआत में संस्था ने 500 पौधो का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण के कार्य का अटल संकल्प लिया गया। उन्डवा नदी में जन सहयोग से वर्षभर के लिए अस्थाई बोरी बांध का निर्माण कर पानी रोका गया। मंदिर शिखर निर्माण पीने के पानी के लिए ट्यूबवेल खनन टंकी का निर्माण आदि कर उचित व्यवस्था की गई वर्ष 2000 से महाशिवरात्रि का लघु आयोजन संस्था ने क्षेत्र के विद्वान पंडित श्यामलाल पौराणिक के सानिध्य में महोत्सव की शुरुआत हुई। आस्था से परिपूर्ण, धार्मिक आयोजन बड़ा रूप लेना प्रारंभ किया बितते समय व सेवा संगठन की अटूट मेहनत प्रयासों से स्थल हरियाली से उत्प्रोत हो गया वर्ष 2002 में वृक्षारोपण मंदिर प्रबंधन के लिए मां जयंती धाम सेवा समिति दसई के द्वारा पंजीकृत संगठन खड़ा किया और आगामी स्थल के आसपास की पड़त भूमि पर वृक्षारोपण करने की उद्देश्य से लगातार संघर्ष करते हुए माताजी मंदिर व उण्डवा नदी के दूसरे तट पर समिति के द्वारा महारूद्र यज्ञ के साथ काली चट्टान के ऊपर भोले बाबा की स्थापना क्षेत्र के हजारों धर्म प्रेमी भक्तों की उपस्थिति में सन् 2005 में वृक्ष मंदिर में श्री उन्ड़ेश्वर महादेवजी की प्राण प्रतिष्ठा खुले आसमान के निचे कालीचट्टान पर की गई थी। प्राण प्रतिष्ठा का पुण्यलाभ संस्था के
प्रेरणास्त्रोत स्व. बालाराम रामपटेलवाला निवासी ग्राम दसई द्वारा लिया गया था। उसी समय मंदिर का नामकरण भी स्थल पर स्थित उंडवा नदी के नाम से ही वृक्ष मंदिर श्री उण्डेश्वर महादेव धाम हो गया। वर्ष 2010 में श्री उंडेश्वर महादेव का पांचवा महामहोत्सव संस्था द्वारा बड़ी दूर दूर तक प्रचार प्रसार कर मनाया गया था। आयोजन में हजारों दीप प्रज्जवलित किए थे। दूर दराज के धर्मप्रेमियों ने लाभ लिया था और यहीं से दोनों मंदिरों की खूब प्रसिद्धि होने लगी माता जी के मंदिर से शिवजी के मंदिर में आने-जाने के लिए उन्डवा नदी में नाव भी चलवाई गई थी। उस समय नाव से ही एक तट से दूसरे तट पर पहुंचते थे। यहां संस्था द्वारा लगभग, 12 हेक्टेयर भूमि पर तार फेंसिंग करवाई गई। पथरीला तटीय क्षेत्र होने से सैकड़ो ट्रॉली मिट्टी, मुरम आदि डालकर यहां बड़ी संख्या में वृक्षो का रोपण किया गया। मंदिर के दूसरे तट पर भी निरंतर वृक्षारोपण होने से स्थल पर रोपे गए पोधो ने आज बड़े वृक्षो का आकर ले लिया है। जिससे यहां के आसपास का वातावरण हरियाली से आच्छादित हो गया है। खुले आसमान के नीचे चट्टान के ऊपर विराजमान उण्डेश्वर महादेव मंदिर, 17 वर्षों बाद समिति द्वारा जन सहयोग से प्रारंभ किया गया। जिसमे दसई लाबरिया मुख्य रोड पर विशाल स्वागत द्वार का निर्माण किया गया। विशाल द्वारा को देखकर सड़क मार्ग से गुजरने वाले राहगीर भी बड़ी संख्या में यहां भक्तजन दर्शनार्थ हेतु पहुंचते है। संस्था की अटूट 25 वर्षों के सेवा, समर्पण एवं जनसहयोग से वृक्ष मंदिर की परिकल्पना साकार रूप में प्रत्यक्ष प्रतीत होती नजर आ रही है। संस्था द्वारा प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि महोत्सव पर पर्यावरण संरक्षण ,जलसंरक्षण ,जीव संरक्षण एवं मानवजनकल्याण के पवित्र उद्देश्य से इस दिन हजारों की संख्या में आए हुए धर्मप्रेमियों को पर्यावरण संरक्षण का जनसंदेश दिया जाता है। आयोजन में क्षेत्र के ,12 से अधिक गांवो के पर्यावरणप्रेमी एवं शिव भक्तजन सम्मिलित होकर महोत्सव को यादगार बना देते हैं। वर्तमान में संस्था द्वारा रजत जयंती का प्रथम चरण मनाया जा रहा है महाअभियान में क्षेत्र के युवा बढ़ चढ़कर सहभागिता करते हैं। वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद योजना एवं सांख्यिकी विभाग मध्यप्रदेश शासन के द्वारा मां जयंती धाम सेवा समिति दसई को नवांकुर में चयनित किया गया हे । संस्था द्वारा नदी में, 300 से अधिक बोरियों का बांध बनाकर बड़े स्तर पर जल को रोका गया है। इसके साथ ही संस्था द्वारा "ग्रामोदय से अभ्युदय" के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को भी आमजनो तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। जनकल्याण के कार्यों को बढ़ावा देने के लिए जन जन तक पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी मित्र संस्था से जुड़कर बढ़-चढ़कर वृक्ष मंदिर की परिकल्पना को साकार रूप देने में अपना श्रमदान समयदान व धनदान देकर पावन पुनीत जनकल्याण, मानवहितार्थ सद्कार्य किया जा रहा है। महाभियान के तहत यहा हरियाली लाओ जल बचाओ,वृक्षारोपण जनसंदेश,वृक्षारोपण क्रांति,पर्यावरण संरक्षण जन आंदोलन,एकात्म यात्रा ,वृक्षारोपण महायज्ञ जेसे महाअभियानो को निरंतर संस्था के कार्यस्थल के साथ ही आसपास के क्षेत्रो मे भी पर्यावरण संरक्षण की जनजागृति कर जन जन मे पर्यावरण प्रेम की अलख जगाने का कार्य किया है। संस्था के पर्यावरण के प्रति दृढ़ संकल्प से संगठन, सेवा, समर्पण त्याग की भावना से कार्य कर दोनों मंदिर परिसर व क्षेत्र के अनेक धार्मिक एवं शासकीय स्थलों पर लगाए गए पौधे आज वृक्षो का रूप ले चुके हैं। पिछले 25 वर्षों मे संस्था द्वारा एक लाख से अधिक पौधे सुरक्षा के साथ वृक्षो के रूप में आकार ले चुके हैं। संस्था से प्रभावित होकर अनेक संगठनों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता आई है। स्थान पर प्रशासन के बड़े प्रशासनिक अधिकारियों ,जनप्रतिनिधियो व सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमी मित्रों व क्षेत्रभर के पत्रकार साथीयो के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर संस्था के महाअभियान को सभी का सहयोग संस्था को संबल प्रदान करता आया है। हाल ही मे संस्था ने उन्डवा नदी पर सामूहिक रूप से बोरी बांध बनाकर जल रोककर जल संरक्षण का संदेश भी दिया गया है। संस्था का सहयोग आसपास क्षेत्र के ग्राम दसई,जयंतीमाता,चो बालोद, चिराखान, पदमपुरा ,टकरावदा खिलेड़ी ,फुलेडी, कडोदकला ,बिडवाल, कोद खुटपला, बरमंडल,लेडगांव आदि गांवो को पिछले कई वर्षों से संस्था से जोड़कर जन-जन में जनजागृति करने का कार्य किया है। अब यहां दूरदराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण मंदिर के दर्शन हेतु पहुंचते है। वर्तमान में समिति द्वारा , उंडेश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य प्रगति पर चल रहा है। भक्तों के जनसहयोग से, 51 फ़ीट ऊंचे मंदिर के शिखर का निर्माण करवाया जा रहा है।
मां जयंती धाम सेवा समिति,दसई द्वारा यहां अनवरत पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न आयोजन आयोजित कर पर्यावरण संरक्षण व धर्म जागरण का जनसंदेश दिया जा रहा है। 15 फरवरी ,रविवार को यहां महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत,श्रमदानियों,समयदानियों व दानदाताओं का संस्था द्वारा सम्मान किया जाएगा।
क्या कहते हैं संस्था के सदस्य ?
मां जयंती माता धाम सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष श्री रामकरण पटेल ने बताया की दुर्गम पहाड़ियों व काली चट्टानों के होने से ,यहां पानी की व्यवस्था भी नहीं थी। उस समय यहां आने जाने के लिए सुव्यवस्थित मार्ग भी नहीं था। पर्यावरण प्रेमी संस्था ने लगातार ,25 वर्षों से जनसहयोग के साथ सेवा कार्य कर बंजर भूमि पर हजारों पौधों का रोपण किया था। जो पौधे आज बड़े वृक्षों के रूप में परिवर्तित हो गए हैं। संस्था द्वारा अनवरत पर्यावरण संरक्षण की अलख जन जन में जगाने का कार्य किया जा रहा है। संस्था को मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा नवांकुर संस्था के रूप में भी चयनित किया गया है। पर्यावरण संरक्षण के साथ ही ग्रामोदय से अभ्युदय के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने का कार्य भी किया जा रहा है। मंदिर जीर्णोद्धार का कार्य यहां जारी है। सभी भक्तों के जनसहयोग से वृक्ष मंदिर परिसर में 51 फ़ीट ऊंचे मंदिर शिखर का निर्माण किया जा रहा है।
जयंती माता धाम सेवा समिति के अध्यक्ष सुरेश भूत पाटीदार ने बताया की संस्था द्वारा पर्यावरण प्रेमी बंधुओ के साथ मिलजुलकर सन् 2000 से लगातार वृक्षारोपण के विभिन्न प्रकार के अभियान चलाकर यहां "पर्यावरण संरक्षण" का अभूतपूर्व जनसंदेश दिया जा रहा है।अभियान के तहत अभी तक 1 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है। साथ ही क्षेत्र में भी कई स्थानों पर संस्था द्वारा कई पौधों का रोपण करवाकर अन्य लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण जागरूकता को लेकर कार्य किया जा रहा है।
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