*क्या किसी ग्रामीण के साथ अनहोनी का इंतजार कर रहा है बांधवगढ़ प्रबंधन*

*सेमरा-सेमरी में 8 दिन से बाघ की मौजूदगी, ग्रामीण पर हमला और अब गाय का शिकार; खेतों में जाने से कतरा रहे लोग

उमरिया/मानपुर - मानपुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-2 सेमरा-सेमरी में बाघ की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को बालकदाश पटेल के खेत में गाय को शिकार बनाकर ले जाते बाघ के कैमरे में कैद होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार करीब आठ दिनों से आबादी से सटे क्षेत्र में बाघ की गतिविधियां बनी हुई हैं। इसके चलते लोग खेतों में जाने से भी कतरा रहे हैं और मवेशियों को घरों में बांधकर रखने को मजबूर हैं।

*सूचना के बाद भी ग्रामीण पर झपटा बाघ*

ग्रामीणों के अनुसार शनिवार रात करीब 9 बजे वन विभाग को क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की सूचना दी गई थी। इसके बाद रविवार दोपहर करीब 12 बजे स्थानीय निवासी शंकर पटेल पर बाघ ने झपटकर उन्हें घायल कर दिया। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भय और बढ़ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि आबादी के आसपास बाघ की गतिविधियां लगातार सामने आने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा घेरा और प्रभावी निगरानी व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या किसी ग्रामीण के साथ बड़ी अनहोनी होने के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर कदम उठाए जाएंगे?

*खेतों से दूरी, घरों में बंधे मवेशी*

स्थानीय निवासी रामबल पटेल, राजाराम गडरिया, अंजनी पटेल, लवकुश पटेल और सत्यराम पटेल ने बताया कि बाघ की गतिविधियों के कारण ग्रामीण अकेले खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं। कई परिवार मवेशियों को घर में बांधकर रखने अथवा घर के आसपास ही चराने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार इससे खेती-किसानी के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।

*दिन में गश्त, फिर भी ग्रामीणों की चिंता बरकरार*

ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग का वाहन दिन में क्षेत्र में गश्त करता दिखाई देता है। हालांकि उनका कहना है कि करीब आठ दिनों से आबादी के आसपास बाघ की गतिविधियां सामने आने के बावजूद लोगों को पर्याप्त सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के साथ कैमरा ट्रैप, निगरानी और आवश्यक सुरक्षा उपाय मजबूत किए जाने की मांग की है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि वन विभाग वन्यजीव की निगरानी और सुरक्षा के लिए नियमित गश्त कर रहा है, लेकिन आबादी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर अपेक्षित गंभीरता नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि बाघ को आबादी से दूर सुरक्षित क्षेत्र की ओर ले जाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

*विभागीय पक्ष जानने फोन किया, नहीं उठा फोन*

इस संबंध में जब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उपसंचालक योहाना कटारा तथा उपवन मंडलाधिकारी, मानपुर परिक्षेत्र से जानकारी लेने के लिए फोन पर संपर्क किया गया, तो फोन रिसीव नहीं किया गया। विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।

अब सवाल यह है कि लगातार सामने आ रही बाघ की गतिविधियों, ग्रामीण पर हुए हमले और मवेशी के शिकार के बाद बांधवगढ़ प्रबंधन मानव सुरक्षा को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है? ग्रामीण किसी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति से पहले प्रभावी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।