कट्ठीवाड़ा में बाल संस्कार शाला: नन्हे बच्चों को सिखाए संस्कार, अनुशासन और नशामुक्त जीवन के मंत्र

बालक राजेन्द्र आश्रम में 6 से 13 वर्ष के बच्चों के लिए हुआ प्रेरणादायी आयोजन, शांतिकुंज हरिद्वार के नानसिंह चौहान ने किया मार्गदर्शन

कट्ठीवाड़ा । प्रेम गुप्ता

बच्चों में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान, देशभक्ति की भावना और नैतिक मूल्यों को विकसित करने के उद्देश्य से बालक राजेन्द्र आश्रम, कट्ठीवाड़ा में बाल संस्कार शाला का आयोजन किया गया। इसमें 6 से 13 वर्ष तक के बच्चों को खेल-खेल में जीवनोपयोगी संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण की सीख दी गई।

कार्यक्रम में शांतिकुंज, हरिद्वार से पधारे श्री नानसिंह चौहान ने बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए बड़ों का सम्मान करने, अनुशासित जीवन जीने और अच्छे व्यवहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने बच्चों को नशे एवं अन्य व्यसनों से दूर रहने तथा स्वस्थ और स्वच्छ जीवन अपनाने का संदेश दिया।

बचपन में संस्कार, भविष्य की मजबूत नींव

श्री चौहान ने सरल और आत्मीय अंदाज में बच्चों को समझाया कि बचपन में सीखी गई अच्छी आदतें ही आगे चलकर व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ इन शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।

समाजजनों ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह

इस अवसर पर बालक राजेन्द्र आश्रम छात्रावास के अधीक्षक श्री गजराज सिंह डूडियार, श्री कालुसिंह चौंगड़, श्री प्रवीण टोकरीया तथा बाल संस्कार शाला के प्रभारी श्री अरविंद तोमर उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और संस्कारयुक्त व्यक्तित्व निर्माण की कामना की।

कार्यक्रम मेॅ वक्ताओं ने बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ नैतिक संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध देने की आवश्यकता जताई। बचपन में रोपे गए संस्कारों के बीज ही आगे चलकर एक बेहतर समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।