कागजों में सफाई, धरातल पर कचरे के ढेर

गोर आंगनबाड़ी के चारों ओर गंदगी से परेशान ग्रामीण, चार महीने में सफाई के नाम पर 81 हजार के भुगतान का आरोप

टीकमगढ़। जनपद पंचायत जतारा की ग्राम पंचायत गोर को भले ही कागजों में आदर्श ग्राम पंचायत का दर्जा मिला हो और सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक द्वारा इसे गोद लिया गया हो, लेकिन गांव की जमीनी तस्वीर सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ग्राम पंचायत में स्थित आंगनबाड़ी भवन के चारों ओर कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गंदगी के कारण आंगनबाड़ी में बच्चों का बैठना मुश्किल हो गया है। आरोप है कि कई बार कचरे के कारण सांप भी भवन के अंदर पहुंच चुके हैं, जिससे मासूम बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है।

सफाई के नाम पर 81 हजार के भुगतान पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत में नियमित सफाई व्यवस्था नजर नहीं आती, जबकि पंचायत के दस्तावेजों में मई 2026 से अक्टूबर 2026 के बीच सफाई कार्य के नाम पर करीब 81 हजार रुपये के भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सफाई के नाम पर राशि निकाली गई, लेकिन मौके पर नियमित सफाई नहीं कराई गई।

खास बात यह है कि सफाई कार्य के लिए कारसदेव कंस्ट्रक्शन, पता कारी, झांसी रोड के बिल लगाए जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार संबंधित फर्म के बिलों में निर्माण सामग्री जैसे गिट्टी, बजरी, गुम्मा, शटरिंग, सरिया और सीमेंट आदि की सप्लाई का उल्लेख रहता है। ऐसे में सफाई कार्य के भुगतान में इसी फर्म के बिलों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि बिलों और भुगतान की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।ग्रामीण सुनील शुक्ला ने आरोप लगाया कि गांव में लंबे समय से नियमित सफाई नहीं हुई है और कागजों में सफाई दिखाकर राशि का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी के आसपास जमा कचरे को बच्चों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए मामले की जांच की मांग की।


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मुक्तिधाम के नाम पर 3 लाख से अधिक भुगतान, मौके पर अधूरा काम

ग्राम पंचायत द्वारा पानी की टंकी के पास उदेरा तालाब पर मुक्तिधाम का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्य में भी कारसदेव कंस्ट्रक्शन के बिल लगाए गए और तीन लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया। वहीं मौके पर निर्माण कार्य देखने पर फिलहाल पिलर और छोटी सी दीवार के अलावा ज्यादा काम नजर नहीं आने का दावा किया गया है। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता, कार्य की मात्रा और भुगतान की जांच कराने की मांग की है।


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फर्जी बिल और मस्टर रोल से राशि निकालने का आरोप

ग्रामीण सुनील शुक्ला ने आरोप लगाया कि पंचायत में मनरेगा के तहत वास्तविक मजदूरों से काम कराने के बजाय कई कार्य मशीनों से कराए जाते हैं और बाद में मजदूरों के नाम मस्टर रोल में दर्ज किए जाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरों के खातों में मजदूरी की राशि आने के बाद पंचायत से जुड़े लोगों द्वारा अंगूठा लगवाकर राशि निकाल ली जाती है। ग्रामीण के अनुसार इस संबंध में एक मामला एसडीएम कार्यालय में लंबित है। उन्होंने बताया कि तहसीलदार द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में भी एक मामले में तालाब का कार्य मशीनों से कराया जाना उल्लेखित किया गया है।

जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल

ग्राम पंचायत गोर में सफाई कार्य, निर्माण कार्यों के भुगतान, बिलों और मनरेगा के मस्टर रोल को लेकर ग्रामीणों द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में जिला पंचायत सीईओ द्वारा मौके का भौतिक सत्यापन, भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच, संबंधित फर्म के बिलों का सत्यापन और मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों से पूछताछ कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी राशि का उपयोग नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।