टीकमगढ़:  जिला अस्पताल में रविवार को एक चौंकाने वाली स्थिति देखने को मिली, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को उजागर कर दिया। कायाकल्प टीम के सोमवार को प्रस्तावित निरीक्षण से ठीक पहले, अस्पताल प्रशासन अचानक सक्रिय हो गया और पूरे अस्पताल को सजाने-संवारने की मुहिम शुरू कर दी।

सुबह से अस्पताल की रंगाई-पुताई, झाड़ू-पोछा और सजावट का काम बड़े जोर-शोर से चल रहा था। मानो अस्पताल नहीं बल्कि किसी निरीक्षण मंच को सजाया जा रहा हो। अस्पताल परिसर में आनन-फानन में पौधों के गमले रखे गए, दीवारों पर नया रंग चढ़ाया गया, और लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्थाओं को छिपाने की कोशिश की गई।

इस दिखावटी कायाकल्प की सबसे बड़ी कीमत मरीजों को चुकानी पड़ी। आईसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्ड में गंभीर हालत में भर्ती मरीजों के बीच ही रंगाई-पुताई और सफाई का कार्य कराया गया। पेंट की तीखी गंध, उड़ती धूल और शोर के बीच मरीजों का इलाज चलता रहा। चिकित्सा नियमों के अनुसार आईसीयू में इस तरह का कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित होता है, फिर भी लापरवाही खुलेआम नजर आई।

  • मरीजों के परिजनों में इस गैरजिम्मेदाराना रवैये को लेकर भारी आक्रोश है।
  • उनका सवाल है कि संक्रमण का खतरा बढ़ने पर यदि किसी मरीज की हालत बिगड़ती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
  • क्या निरीक्षण में अच्छे अंक पाने के लिए मरीजों की जान जोखिम में डालना अब सामान्य बात हो गई है?

स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने आरोप लगाया है कि जिला अस्पताल में सालभर गंदगी, अव्यवस्था और अव्यवहार की स्थिति बनी रहती है। वार्डों की सफाई, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों की मूलभूत सुविधाओं पर कभी गंभीर ध्यान नहीं दिया जाता। लेकिन जैसे ही किसी निरीक्षण या टीम के आने की खबर मिलती है, पूरा अस्पताल अचानक सजावटी मोड में चला जाता है।

समाज की नजरें टीम पर

अब जनता की नजर कायाकल्प टीम पर टिकी है कि वह केवल चमकती दीवारों और सजे-धजे परिसर से प्रभावित होती है या फिर आईसीयू में मरीजों की मौजूदगी में कराए गए इस गंभीर और खतरनाक कार्य पर भी संज्ञान लेती है। यदि इस लापरवाही पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संकेत होगा कि इस सिस्टम में मरीजों की जान से ज्यादा अहमियत केवल रिपोर्ट, फोटो और नंबरों को दी जाती है।

प्रबंधक का बयान

जिला अस्पताल की प्रबंधक श्रीमती अंकुर साहू ने कहा, "मेहमानों के आने से पहले जैसे घर को सजाया जाता है उसी प्रकार अस्पताल को भी कायाकल्प की टीम के आने के पहले रंगाई-पुताई करके सजाया जा रहा है। इस दौरान मरीजों की सेहत से खिलवाड़ किया गया है। अगर जिन वार्डों में काम किया जा रहा है उनमें मरीज भर्ती हैं, तो उसे दिखवाती हूं और उन्हें मना करती हूं।"