सूखे के बीच पेयजल और सिंचाई संकट दूर करने की मांग।

सूखे के हालात में पेयजल और सिंचाई संकट दूर करने की मांग
भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, तीन प्रमुख मांगें रखीं।

निसरपुर। कुक्षी तहसील क्षेत्र में इस वर्ष अपेक्षित वर्षा नहीं होने से सूखे जैसे हालात निर्मित हो गए हैं। भारतीय किसान संघ ने पेयजल, पशु पेयजल और सिंचाई संकट को देखते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। संघ ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम अनुविभागीय दंडाधिकारी कुक्षी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि क्षेत्र में इस वर्ष मात्र 7.44 इंच वर्षा हुई है। बारिश की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के जलस्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। इससे पेयजल और पशुओं के लिए पानी की समस्या बढ़ने लगी है। किसानों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं और आगामी समय में सिंचाई के पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
भारतीय किसान संघ ने कहा कि कुक्षी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। जल संकट का सीधा असर किसानों, खेतिहर मजदूरों, पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इसलिए शासन को तत्काल राहत के साथ दीर्घकालीन जल प्रबंधन की दिशा में भी कदम उठाने चाहिए।
ये रखीं प्रमुख मांगें
संघ ने डही माइक्रो उद्वहन परियोजना का पानी शहीद चंद्रशेखर आजाद सागर (जोबट परियोजना) में छोड़ने के लिए लगाए जाने वाले 200 एमएम के पाइप के स्थान पर 700 एमएम गेज का पाइप लगाने की मांग की। साथ ही परियोजना का पानी डही तहसील के ग्राम रेबड़दा के तालाब में छोड़ने की मांग की गई।
दूसरी मांग में नर्मदा-माही लिंक परियोजना की चंदनखेड़ी से पेटलावद तक प्रस्तावित पाइपलाइन के पानी को बाग ब्लॉक के थाणा डेम में छोड़ने की मांग की गई। इससे आदिवासी अंचल में पेयजल और किसानों के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई।
इसके अलावा बैल बाबा डेम की नहरों को तत्काल चालू करने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई। संघ ने शासन से इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है।