शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को नीमच जिले से एक अत्यंत प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन में जिले में दिव्यांगजनों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं, जिससे कई जरूरतमंदों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। वार्ड क्रमांक 08, भगवानपुरा निवासी श्रीमती दीपमाला यादव इसी प्रेरणादायक बदलाव का एक जीवंत उदाहरण हैं। करीब 41 प्रतिशत दिव्यांगता होने के बावजूद उन्होंने कभी भी अपनी शारीरिक स्थिति को अपनी प्रगति के मार्ग में बाधा नहीं बनने दिया और आज वे एक सफल ई-रिक्शा चालक के रूप में आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।
संघर्षपूर्ण शुरुआती जीवन और कठिनाइयां
श्रीमती दीपमाला यादव का जीवन का शुरुआती सफर काफी संघर्षों से भरा रहा है। आर्थिक तंगी और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें लंबे समय तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा। जीवन-यापन के लिए उन्होंने दूसरों के घरों में जाकर झाड़ू-पोछा लगाने और खाना बनाने जैसे कठिन कार्य किए।
इस दौरान उन्हें कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत जारी रखी। उनके मन में हमेशा से एक प्रबल इच्छा थी कि वे किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपना स्वयं का कोई छोटा-मोटा रोजगार शुरू करें। वे चाहती थीं कि अपने परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ वे अपने बच्चों के भविष्य को भी बेहतर और सुरक्षित बना सकें।
जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की भूमिका और प्रशासनिक सहयोग
दीपमाला के जीवन में असली मोड़ तब आया जब वे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की टीम के सीधे संपर्क में आईं। इस दौरान उन्हें केंद्र के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई। टीम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित कदम उठाए:
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सबसे पहले उनका विधिवत दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवाया गया।
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उनकी पहचान को पुख्ता करते हुए यूडीआईडी कार्ड तैयार किया गया।
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उनकी पात्रता के अनुसार उन्हें शासन की ओर से निःशक्त पेंशन का लाभ दिलाने में पूरा सहयोग प्रदान किया गया।
अपने स्वरोजगार के सपने को साकार करने के लिए दीपमाला ने जिला कलेक्टर के समक्ष औपचारिक रूप से आवेदन प्रस्तुत किया। इसके उपरांत, जिला प्रशासन, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग तथा विभिन्न दिव्यांग संगठनों के आपसी समन्वय से दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने और रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रयास शुरू किए गए। इसी सकारात्मक पहल के क्रम में, सेवा पखवाड़े के अंतर्गत 27 सितंबर 2025 को सीएसआर (कॉपोर्रेट सामाजिक उत्तरदायित्व) मद के माध्यम से श्रीमती दीपमाला यादव को एक नया ई-रिक्शा प्रदान किया गया।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम और वर्तमान स्थिति
ई-रिक्शा मिलने के बाद दीपमाला के जीवन में एक नया आत्मविश्वास जागृत हुआ। उन्होंने बिना समय गंवाए नीमच शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाना शुरू किया। अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बल पर वे आज प्रतिदिन लगभग 500 रुपये की आय आसानी से अर्जित कर रही हैं।
वर्तमान समय में उनकी कुल मासिक आय लगभग 15,000 रुपये तक पहुंच चुकी है। इस नियमित आमदनी से उनके पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया है। अब उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता, बल्कि वे अपने बच्चों की उच्च शिक्षा और अन्य सभी आवश्यक जरूरतों को अपनी खुद की मेहनत की कमाई से पूरा करने में सक्षम हो गई हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
अपनी इस सफलता से बेहद प्रसन्न श्रीमती दीपमाला यादव कहती हैं कि शासन की योजनाओं, जिला प्रशासन के सहयोग और जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के मार्गदर्शन की बदौलत ही उन्हें जीवन में यह बड़ा अवसर मिल पाया है। ई-रिक्शा मिलने के बाद उनका आत्मबल और अधिक मजबूत हुआ है।
दीपमाला देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति गहरा आभार व्यक्त करती हैं। उनका मानना है कि सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए जो योजनाएं चलाई जा रही हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के जो प्रयास किए जा रहे हैं, उन्हीं के कारण उनके जैसे सामान्य और जरूरतमंद लोगों को समाज में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिल रहा है।
image source : https://neemuch.mpinfo.org
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