*शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं पर उठे रहे सवाल!*
*सरकारी और निजी स्कूलों में नियमों के पालन, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और विभागीय निगरानी की निष्पक्ष जांच जरूरी,*
*एनएसयूआई अध्यक्ष शुभ शर्मा ने शिक्षा का स्तर सुधारने की मांग की*
*टांडा* धार शिक्षा को समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव माना जाता है, लेकिन जब शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों के पालन और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े होने लगें, तो जिम्मेदार विभाग की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कक्षा 1 से लेकर 10वीं तक अध्ययनरत विद्यार्थियों की शिक्षा, छात्रवृत्ति, पाठ्यपुस्तक वितरण, गणवेश, मध्यान्ह भोजन, उपस्थिति और शैक्षणिक गुणवत्ता जैसे विषयों पर विभागीय निगरानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित सरकारी एवं निजी विद्यालयों में निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, विद्यार्थियों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर मिल रहा है या नहीं तथा विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं—इन सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है। हालांकि, किसी विशेष विद्यालय या अधिकारी के विरुद्ध अनियमितता की पुष्टि संबंधित अभिलेखों और जांच के बाद ही की जा सकती है।
*स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी हो निगरानी*
कक्षा 1 से 10वीं तक का शैक्षणिक स्तर विद्यार्थियों के भविष्य की नींव तैयार करता है। इस दौरान शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित कक्षाएं, विद्यार्थियों की उपस्थिति, पाठ्यक्रम की समय पर पूर्ति और परीक्षा परिणाम जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
विभागीय अधिकारियों द्वारा विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कर यह देखना चाहिए कि शिक्षण कार्य निर्धारित समय-सारणी के अनुसार हो रहा है या नहीं। यदि कहीं कमियां सामने आती हैं, तो उनके निराकरण के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
*निजी स्कूलों में नियमों के पालन की जांच जरूरी*
निजी विद्यालयों में भी विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। विद्यालयों की मान्यता, निर्धारित शुल्क संबंधी नियम, आवश्यक सुविधाएं और शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लागू प्रावधानों की स्थिति की जांच की जानी चाहिए।
अभिभावकों की शिकायतों का समय पर निराकरण हो तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए शिक्षा विभाग को शिकायत निवारण व्यवस्था को प्रभावी बनाना चाहिए।
*अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग?*
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए विद्यालयवार निरीक्षण रिपोर्ट, विद्यार्थियों को वितरित सुविधाओं का विवरण और लंबित शिकायतों की स्थिति की समीक्षा महत्वपूर्ण है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कि जाना चाहिए?
इसके साथ ही विभाग को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच निष्पक्ष हो और किसी भी विद्यालय, शिक्षक या अधिकारी के विरुद्ध बिना प्रमाण के निष्कर्ष न निकाला जाए।
*अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी नजरें*
कक्षा 1 से 10वीं तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग को नियमित निरीक्षण, योजनाओं के लाभार्थियों का सत्यापन और शिकायतों की समीक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होने से विद्यार्थियों तथा अभिभावकों का विश्वास मजबूत होगा।
सवाल यह है कि शिक्षा विभाग विद्यालयों में नियमों के पालन और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं की नियमित समीक्षा किस स्तर पर कर रहा है? इन बिंदुओं पर तथ्यात्मक जानकारी सामने आने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाने से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
मध्य प्रदेश स्पेशल
शिक्षा विभाग की लापरवाही या अनदेखी
शिक्षा के साथ खेला
October 20, 2026 05:23 PM
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