पेटलावद: बारिश का सीजन अब अंतिम पड़ाव पर है। सितंबर आधा बीत चुका है और पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं होने के बाद दोबारा हुई बारिश ने किसानों की चिंता और उम्मीद दोनों बढ़ा दी हैं। खेतों में सोयाबीन की फसल में फलियां आ चुकी हैं, जबकि मक्का में दाने भरने की स्थिति है। टमाटर और मिर्च की फसल भी तैयार हो रही है। किसानों का कहना है कि अब मौसम ने साथ दिया तो खरीफ की फसल अच्छी तरह घर आ सकती है, लेकिन कटाई के समय अधिक बारिश हुई तो नुकसान की आशंका रहेगी।
*सोयाबीन में फलियां, अगले माह कटाई की संभावना:*
किसानों के अनुसार सोयाबीन की फसल फिलहाल सामान्य स्थिति में है। पौधों में फलियां आ चुकी हैं और आने वाले दिनों में दाने भरने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। झाबुआ क्षेत्र में सोयाबीन की कटाई सामान्यतः सितंबर से अक्टूबर के बीच होती है। इस वर्ष भी मौसम अनुकूल रहा तो अगले माह से कटाई शुरू होने की संभावना है। हालांकि वास्तविक समय खेत की स्थिति, बोवनी की तारीख और किस्म के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
*मक्का में दाने भरने की स्थिति:*
मक्का की फसल भी लगभग तैयार होने की स्थिति में है। किसानों के अनुसार कई खेतों में भुट्टों में दाने भर गए हैं और फसल पकने की ओर बढ़ रही है। अब कटाई तक मौसम का साथ मिलना जरूरी है। यदि इस दौरान तेज बारिश या हवा के साथ पानी का भार बढ़ा तो मक्का के पौधे गिर सकते हैं, जिससे कटाई और उपज दोनों प्रभावित होने की आशंका रहेगी। मक्का झाबुआ जिले की प्रमुख फसलों में शामिल है।
*कटाई के समय बारिश हुई तो सोयाबीन को नुकसान:*
सोयाबीन की फसल में फलियां आने के बाद अब किसानों की नजर मौसम पर है। यदि कटाई के दौरान लगातार बारिश होती है तो खेत में खड़ी या काटकर रखी फसल में नमी बढ़ सकती है। इससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने, दाने दागी पड़ने और फसल खराब होने का जोखिम बढ़ता है। पिछले वर्षों में मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों में सितंबर-अक्टूबर की बारिश से कटाई के लिए तैयार सोयाबीन को नुकसान की खबरें सामने आई थी।
*टमाटर-मिर्च की फसल भी तैयार हो रही:*
इधर...क्षेत्र में टमाटर और मिर्च की फसल भी तैयार हो रही है। किसानों के अनुसार इन फसलों में भी मौसम की भूमिका महत्वपूर्ण है। अधिक बारिश होने पर खेतों में जलभराव, पौधों को नुकसान और तैयार उपज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में किसान चाहते हैं कि अब बारिश संतुलित रहे, ताकि खरीफ की फसल सुरक्षित निकल सके।
*रबी सीजन के लिए खेतों में नमी, लेकिन अधिक बारिश से चिंता:*
सितंबर की बारिश से खेतों में नमी बनी रहने की उम्मीद है, जो आगामी रबी सीजन की तैयारी में उपयोगी हो सकती है। लेकिन यदि बारिश लंबे समय तक जारी रहती है तो खरीफ की कटाई प्रभावित हो सकती है और खेतों की तैयारी में देरी हो सकती है। किसानों के अनुसार सोयाबीन और मक्का की कटाई के बाद ही रबी की बोवनी की तैयारी तेज होगी। इसलिए अब जरूरत ऐसी बारिश की है, जिससे फसलों को नुकसान न हो और खेतों में पर्याप्त नमी भी बनी रहे। किसानों का कहना है कि फिलहाल सोयाबीन और मक्का की स्थिति संतोषजनक है। अब कटाई के समय मौसम अनुकूल रहा तो नुकसान से बचा जा सकेगा। लेकिन अधिक बारिश हुई तो सोयाबीन के दाने दागी पड़ने और मक्का के पौधे गिरने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।