• *समान नागरिक संहिता पर जनपरामर्श हेतु उच्च स्तरीय समिति की बैठक का किया गया आयोजन*

  • *विभिन्न वर्गों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव*

आलीराजपुर, । समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में जनपरामर्श के उद्देश्य से गठित उच्च स्तरीय समिति की सदस्य डॉ. शोभा वेंकटकर ने शुक्रवार को शहीद छीतू किराड़ शासकीय महाविद्यालय, आलीराजपुर के सभागार में आयोजित जनपरामर्श कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में सांसद श्रीमती अनीता चौहान, जिला अध्यक्ष श्री मकू परवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हजरी बाई खरत, कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती संघमित्रा गौतम, एडीएम श्री सोहन कनास सहित प्रशासनिक अधिकारी और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन-अर्चन से हुआ। कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने समिति सदस्य डॉ. शोभा वेंकटकर का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

इस अवसर पर डॉ. शोभा वेंकटकर ने समान नागरिक संहिता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। इसी भावना को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समान नागरिक संहिता पर व्यापक जनपरामर्श किया जा रहा है, ताकि समाज के सभी वर्गों के विचारों, सुझावों एवं अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावी एवं समावेशी व्यवस्था तैयार की जा सके।

उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, दत्तक ग्रहण, उत्तराधिकार एवं संपत्ति और लिव इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जनपरामर्श की यह प्रक्रिया समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि गोवा राज्य में पुर्तगाली सिविल कोड के प्रावधानों के तहत यूसीसी लागू है। उत्तराखंड, गुजरात में यूसीसी लागू होने पश्चात अब मध्य प्रदेश में भी यूसीसी के लिए जनपरामर्श लिया जा रहा है।

सांसद श्रीमती अनीता चौहान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वह सांसद के रूप में नहीं बल्कि एक आम नागरिक के रूप में यूसीसी के लिए अपना समर्थन दे रही है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के नियमों को अपनाते हुए नया कानून यूसीसी के रूप में आना चाहिए।

बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि यूसीसी के प्रारूप बनने के बाद इसकी जानकारी व्यापक स्तर पर जनसामान्य तक पहुंचाई जाए और फिर से जन परामर्श कर विभिन्न समुदायों, प्रबुद्धजनों और विशेषज्ञों से निरंतर संवाद स्थापित किया जाए। कुछ सुझावों में इसे चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वयन, व्यापक जनजागरूकता और सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित करने की बात कहीं। सामाजिक संगठन के सदस्यों द्वारा सुझाव दिए गए कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में यूसीसी लागू करने से उनके अधिकारों का हनन न हो यह विशेष रूप से सुनिश्चित किया जाए। 

जनपरामर्श के दौरान अनेक नागरिकों ने अपने सुझाव मौखिक रूप से तथा लिखित रूप से समिति को दिए। सभी ने आशा व्यक्त कि उनके सुझाव शासन तक पहुंचेंगे और समान नागरिक संहिता के निर्माण की प्रक्रिया में उपयोगी सिद्ध होंगे।