**25 साल बाद भी अधूरा मालिकाना हक, 7 हजार भूखंडों में सिर्फ 982 की रजिस्ट्री**

**5500 आवेदन मिले, रोजाना 10-12 रजिस्ट्रियां; चरनोई भूमि का पेच भी बरकरार,

निसरपुर

सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावित परिवारों को पुनर्वास स्थल मिले 25 साल बीत चुके हैं, लेकिन हजारों परिवारों के भूखंडों का मालिकाना हक अब भी कागजों में अधूरा है। फरवरी 2026 से शुरू हुई भूखंडों की रजिस्ट्री प्रक्रिया में अब तक करीब 7 हजार भूखंडों में से 5500 हितग्राहियों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से केवल 982 भूखंडों की रजिस्ट्री** हो सकी है। वर्तमान में रोजाना करीब 10 से 12 रजिस्ट्रियां हो रही हैं। प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि प्रभावित परिवारों और नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि इसी रफ्तार से काम चला तो शेष करीब 6 हजार से अधिक भूखंडों की रजिस्ट्री में वर्षों लग सकते हैं।

2001 में पुनर्वास स्थल मिला, मालिकाना हक अब भी अधूरा

सरदार सरोवर बांध से प्रभावित परिवारों को वर्ष 2001 से पुनर्वास स्थलों पर बसाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। वर्षों से इन स्थलों पर रह रहे परिवारों ने मकान बना लिए और अपना जीवन व्यवस्थित कर लिया, लेकिन भूखंड की वैधानिक मिल्कियत का दस्तावेज नहीं मिलने से समस्या बनी हुई है। फरवरी 2026 में रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रभावित परिवारों को उम्मीद जगी थी कि लंबे समय से लंबित मालिकाना हक का रास्ता खुलेगा, लेकिन रजिस्ट्री की धीमी गति से यह प्रक्रिया लंबी होती दिखाई दे रही है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े सुरेश प्रधान के अनुसार, पिछले करीब 10 दिनों में मुश्किल से 20 से 25 हितग्राहियों की रजिस्ट्री हुई है। उनका कहना है कि रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कब होगा, इसकी भी स्पष्ट जानकारी नहीं है। जब तक नामांतरण पूरा नहीं होता, तब तक हितग्राहियों को भूखंड पर पूर्ण वैधानिक अधिकार मिलने की स्थिति स्पष्ट नहीं होती।

2003 में आवंटित भूखंड, मकान बने तो अब चरनोई भूमि का पेच

निसरपुर पुनर्वास स्थल पर वर्ष 2003 में एनवीडीए ने शासकीय चरनोई भूमि में करीब 400 परिवारों को भूखंड आवंटित किए थे। इनमें कई परिवारों ने आवंटन के आधार पर मकान बनाकर वर्षों से निवास भी कर लिया है। अब रजिस्ट्री की प्रक्रिया के दौरान इन भूखंडों को शासकीय चरनोई भूमि से संबंधित बताते हुए रजिस्ट्री में परेशानी सामने आ रही है। इससे उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने सरकारी आवंटन के आधार पर यहां अपने घर बनाए हैं।

करीब 200 जमा भूखंड भी वापस नहीं मिले

डूब एवं पुनर्वास से जुड़े प्रदीप पाटीदार का कहना है कि सरदार सरोवर बांध से प्रभावित *92 गांवों के लोग करीब चार दशक से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।उनके अनुसार एनवीडीए द्वारा पात्र परिवारों के भूखंड जमा किए गए थे, लेकिन निसरपुर के करीब 200 परिवारों को उनके जमा भूखंड अब तक वापस नहीं मिले हैं।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा घोषित 900 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज का प्रभावी क्रियान्वयन होता तो पुनर्वास से जुड़ी कई समस्याएं आज इतनी लंबित नहीं रहतीं।

कलेक्टर को चरनोई भूमि की समस्या से अवगत कराया

कुक्षी एसडीएम आशीष पाटिल ने बताया कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। अभी रोजाना करीब 10 से 12 रजिस्ट्रियां हो रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि प्रक्रिया में और गति लाई जाए तथा अधिक से अधिक भूखंडों की रजिस्ट्री पूरी हो। निसरपुर में चरनोई भूमि से जुड़े प्रकरण की जानकारी कलेक्टर को दे दी गई है। जल्द ही इसका निराकरण कर संबंधित भूखंडों की रजिस्ट्री शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि जिस गति से रजिस्ट्री का कार्य चल रहा है, उसे देखते हुए शेष भूखंडों की प्रक्रिया पूरी होने में वर्षों लग सकते हैं। सरकार को चाहिए कि बची हुई करीब **6000 से ज्यादा रजिस्ट्रियां** जल्द पूरी कराई जाएं, ताकि वर्षों से पुनर्वास स्थल पर रह रहे परिवारों को उनके भूखंडों का मालिकाना हक मिल सके।

फिलहाल 7 हजार भूखंडों में से 982 की रजिस्ट्री हो चुकी है, जबकि करीब 6000 से अधिक भूखंडों की प्रक्रिया बाकी है। ऐसे में प्रशासन के सामने रजिस्ट्री की गति बढ़ाने के साथ निसरपुर की चरनोई भूमि का पेच सुलझाने और रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को समयबद्ध करने की चुनौती है।