भोपाल की झील और उस पर बना केबल-स्टे ब्रिज, फाइल फोटो। भोज वेटलैंड में भोपाल के अपर और लोअर लेक शामिल हैं। फोटो साभार Wikimedia Commons / Bilal Nibraas, CC BY-SA 4.0

भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड्स यानी रामसर साइट्स की संख्या 2014 के 26 से बढ़कर अब 103 हो गई है। ये साइट्स 13.87 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फैली हैं।

पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने 25 अक्टूबर 2026 को जारी बैकग्राउंडर में बताया कि साइट्स की संख्या के हिसाब से भारत एशिया में पहले और दुनिया में तीसरे स्थान पर है। PIB की पूरी राज्यवार सूची में मध्य प्रदेश की 5 साइट्स दर्ज हैं।

भोपाल, इंदौर, शिवपुरी और नर्मदापुरम में MP की साइट्स

PIB की सूची में MP की साइट्स और उनकी खासियत…

MP की 5 रामसर साइट्स

  • भोज वेटलैंड्स. भोपाल के अपर और लोअर लेक, जल आपूर्ति और पक्षी
  • सिरपुर वेटलैंड. इंदौर में मानव निर्मित वेटलैंड, प्रवासी पक्षी
  • साख्य सागर. माधव नेशनल पार्क में जलाशय, मगरमच्छ (मगर)
  • यशवंत सागर. इंदौर के पास जलाशय, सारस क्रेन और जल आपूर्ति
  • तवा जलाशय. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में जलाशय, जलीय जीव और पक्षी

मैप से समझें…

मैप से समझें, MP के किन जिलों में हैं रामसर साइट्स
मैप से समझें, MP के किन जिलों में हैं रामसर साइट्स

इंदौर बना देश का पहला वेटलैंड सिटी

PIB के मुताबिक जनवरी 2025 में इंदौर और उदयपुर भारत के पहले रामसर मान्यता प्राप्त वेटलैंड सिटी बने। इसके साथ दोनों शहर दुनिया के रामसर वेटलैंड सिटी नेटवर्क में शामिल हो गए।

भारत की रामसर यात्रा, 1971 में कन्वेंशन से 2026 में 100 साइट्स पार करने तक
भारत की रामसर यात्रा, 1971 में कन्वेंशन से 2026 में 100 साइट्स पार करने तक फोटो साभार PIB

12 साल में करीब 4 गुना बढ़ा नेटवर्क

भारत 1 फरवरी 1982 को रामसर कन्वेंशन का सदस्य बना। अकेले 2025 में 11 वेटलैंड जुड़े और संख्या 96 हुई। जून 2026 में उत्तर प्रदेश का सुरहा ताल 100वीं साइट बना। 15 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ के सुखना वेटलैंड और उत्तर प्रदेश की सौज झील के जुड़ने से संख्या 103 पहुंची। सबसे ज्यादा 20 साइट्स तमिलनाडु में और 14 उत्तर प्रदेश में हैं।

रामसर साइट बनने के लिए 9 में से 1 मानदंड जरूरी

किसी वेटलैंड को रामसर साइट बनने के लिए 9 में से कम से कम एक मानदंड पूरा करना होता है। प्रक्रिया राज्य सरकार की ओर से वेटलैंड की पहचान से शुरू होती है। फिर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय मंजूरी देकर प्रस्ताव रामसर सचिवालय को भेजता है।

रामसर साइट की मान्यता के 5 चरण, व्यवहार्यता से घोषणा तक
रामसर साइट की मान्यता के 5 चरण, व्यवहार्यता से घोषणा तक फोटो साभार PIB

वेटलैंड बचाने के लिए नियम और योजनाएं

PIB के मुताबिक सरकार इन नियमों और योजनाओं से वेटलैंड संरक्षण कर रही है…

  • वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम 2017. राज्य वेटलैंड प्राधिकरण बनाते हैं, अतिक्रमण, कचरा डंपिंग और बिना उपचारित गंदे पानी को छोड़ने पर रोक लगाते हैं।
  • NPCA. झील और वेटलैंड संरक्षण के राष्ट्रीय कार्यक्रमों को एक योजना में मिलाया गया, 2024 में नई गाइडलाइन जारी हुई।
  • अमृत धरोहर. रामसर साइट्स पर प्रजाति संरक्षण, नेचर टूरिज्म, आजीविका और कार्बन आकलन।
  • मिशन सहभागिता. सेव वेटलैंड्स अभियान में 20 लाख से ज्यादा नागरिक वॉलंटियर्स ने 1.7 लाख से ज्यादा वेटलैंड्स की मैपिंग की।
  • MISHTI. 9 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में 540 वर्ग किलोमीटर में मैंग्रोव बहाली का लक्ष्य।

रामसर साइट घोषित होने के बाद उसे 2017 के नियमों के तहत अधिसूचित माना जाता है। रामसर इन्फॉर्मेशन शीट हर 6 साल में अपडेट करनी होती है और साइट की पारिस्थितिकी की नियमित निगरानी जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत में कितनी रामसर साइट्स हैं?

PIB के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 तक भारत में 103 रामसर साइट्स हैं।

मध्य प्रदेश की कौन सी साइट्स PIB सूची में हैं?

भोज वेटलैंड्स, सिरपुर वेटलैंड, साख्य सागर, यशवंत सागर और तवा जलाशय।

भारत की पहली रामसर साइट्स कौन सी थीं?

ओडिशा की चिल्का झील और राजस्थान का केवलादेव नेशनल पार्क, 1 अक्टूबर 1981 को।

स्रोत PIB बैकग्राउंडर