कान्हा में 22 से 24 मई तक होगी ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना, ‘गरुण’ एप से होगी मॉनिटरिंग

 

 देश और प्रदेश में तेजी से घट रही गिद्धों की संख्या को बचाने और उनके संरक्षण को मजबूत करने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व में 22 से 24 मई के बीच ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना अभियान चलाया जाएगा। मध्यप्रदेश वन विभाग के निर्देश पर यह विशेष गणना कान्हा के कोर, बफर और फेन अभयारण्य के सभी 13 वन परिक्षेत्रों में की जाएगी। खास बात यह है कि इस बार गिद्धों की मॉनिटरिंग उन्नत डिजिटल मोबाइल एप “गरुण” के जरिए की जाएगी।

 

 कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन के मुताबिक, गिद्ध गणना को लेकर 14 मई को प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव मध्यप्रदेश द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को प्रशिक्षण एवं दिशा-निर्देश दिए गए।

 

इससे पहले फरवरी 2026 में हुई शीतकालीन गिद्ध गणना में कान्हा, किसली और सरही वन परिक्षेत्रों में कुल 224 गिद्ध दर्ज किए गए थे, जबकि 50 सक्रिय घोंसले भी चिन्हित किए गए थे।

 

कान्हा में मुख्य रूप से व्हाइट-बैक्ड गिद्ध, हिमालयन ग्रिफॉन, सिनेरियस गिद्ध, लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध और किंग वल्चर जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गिद्ध प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण सफाईकर्मी पक्षी हैं, जो मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं और बीमारियों के फैलाव को रोकते हैं।

 

वन विभाग ने बताया कि गिद्धों की घटती संख्या का सबसे बड़ा कारण पशु उपचार में इस्तेमाल होने वाली डाइक्लोफेनेक दवा है। इस दवा से उपचारित पशुओं के शव खाने पर गिद्धों में गंभीर बीमारी फैल जाती है और उनकी मौत हो जाती है।इसी को देखते हुए कान्हा प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि पशुओं के इलाज में डाइक्लोफेनेक का उपयोग न करें, मृत पशुओं के शवों में विषैले पदार्थ न मिलाएं और जंगलों व प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा में सहयोग करें।

 

 कान्हा टाइगर रिजर्व में होने वाली यह गिद्ध गणना सिर्फ पक्षियों की गिनती नहीं, बल्कि प्रकृति के उन अनदेखे प्रहरी को बचाने की कोशिश है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।