लिपिक संघ ने केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उइके को सौंपा ज्ञापन
मंत्रालय के समान समयमान वेतनमान और अनुकंपा में सीपीसीटी खत्म करने की मांग
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बैतूल। मध्य प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ की जिला इकाई बैतूल ने मैदानी लिपिकों की वर्षों पुरानी वेतन विसंगति दूर करने और अनुकंपा नियुक्ति में अनिवार्य कंप्यूटर दक्षता परीक्षा (सीपीसीटी) की बाध्यता समाप्त करने की मांग को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान शुरू किया है। इसी क्रम में जिलाध्यक्ष कमलेश चौहान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बैतूल-हरदा सांसद एवं केंद्रीय आदिम जाति मामले राज्यमंत्री दुर्गादास उइके को दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। केंद्रीय राज्यमंत्री ने मांगों को न्यायोचित मानते हुए अपनी अनुशंसा के साथ ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेज दिया।
संघ ने वित्त विभाग के 24 जनवरी 2008 तथा 28 फरवरी और 4 मार्च 2013 के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रालय के सहायक ग्रेड-3 को द्वितीय उच्चतर समयमान में 5500-9000 रुपए का वेतनमान दिया गया, जबकि विभागाध्यक्ष और अधीनस्थ अमंत्रालयीन कार्यालयों में समान पद पर कार्यरत लिपिक इससे वंचित हैं। वहीं मंत्रालय के कर्मचारियों को 1246 रुपए प्रतिमाह सचिवालय भत्ता भी मिल रहा है। संघ ने कहा कि प्रारंभिक, प्रथम, द्वितीय और तृतीय उच्चतर समयमान में पे-बैंड व ग्रेड-पे के स्तर पर भी मैदानी लिपिकों और मंत्रालयीन लिपिकों के बीच स्पष्ट अंतर है। संघ ने संविधान के अनुच्छेद 39 (घ) का हवाला देते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग की है।
ज्ञापन में अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी की बाध्यता को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई गई। संघ का कहना है कि नियमों की कंडिका 6.5 के तहत सीपीसीटी उत्तीर्ण नहीं करने पर कई अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों को सेवा से पृथक किया जा रहा है। 12वीं या बीए योग्यता वाले इन कर्मचारियों के लिए परीक्षा कठिन होने के बावजूद वे विभागों में आईएफएमआईएस, इलेक्ट्रॉनिक एवं कंप्यूटरीकृत फाइलिंग, डाटाबेस, स्थापना, लेखा-भंडार, ऑडिट, बजट, विधानसभा प्रश्न, सीएम हेल्पलाइन और आरटीआई जैसे महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
संघ ने कंडिका 6.5 के तहत सेवा से पृथक करने का प्रावधान खत्म करने, सीपीसीटी के कारण हटाए गए सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों को तत्काल बहाल करने तथा 40 वर्ष की आयु के बाद टाइपिंग परीक्षा में मिलने वाली छूट की तर्ज पर सीपीसीटी से भी राहत देने की मांग की है। साथ ही अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों को तीन माह का प्रशिक्षण देकर विभागीय परीक्षा कराने का सुझाव दिया है। जिलाध्यक्ष कमलेश चौहान ने कहा कि मृत शासकीय कर्मचारियों के बेसहारा आश्रितों को नौकरी से निकालकर संकट में नहीं डाला जाना चाहिए और अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। प्रांताध्यक्ष मुकेश चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में चल रहे अभियान के तहत 28 सितंबर 2026 को ज्ञापन सौंपा गया।
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