शुक्रवार शाम को पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती सरोज भूपेन्द्र सिंह ने मालथौन किला प्रांगण में विराजमान प्राचीन माता महाकाली मंदिर और बरोदिया कलां की पहाड़ी पर विराजमान मां वैष्णोदेवी मंदिर पहुंच कर देवी मैया के दर्शन आरती में हिस्सा लिया और दोनों स्थानों पर छप्पन महाभोग अर्पित कर क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के देवी उपासक और श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। 

 नवरात्र के पावन दिनों में माता वैष्णोदेवी, मां भद्रकाली महाकाली के मंदिरों में  महाभोग के रूप में छप्पन भोग का आयोजन किया जाता है। नौ दिनों की कठिन साधना और व्रत के बाद, भक्त माता रानी के प्रति अपना अगाध प्रेम प्रकट करने और अपनी पूजा की पूर्णता (पूर्णाहुति) के रूप में यह भव्य थाल सजाते हैं। देवी मां को छप्पन भोग लगाना केवल भोजन अर्पित करना नहीं, बल्कि भक्तों की ओर से माँ से यह प्रार्थना करना है कि "हे मैया, इस संसार में जो कुछ भी सुंदर, मधुर और पोषक है, वह सब आपका ही दिया हुआ है और हम इसे आपके ही चरणों में श्रद्धापूर्वक समर्पित करते हैं।" मान्यताओं के अनुसार, देवी के मुख्य स्वरूप के अंतर्गत 56 उप-शक्तियां या योगिनियां ब्रह्मांड का संचालन करती हैं। सनातन परंपरा में कुल 56 करोड़ देवी-देवताओं की सूक्ष्म उपस्थिति मानी गई है। महाकाली और माता वैष्णोदेवी को छप्पन भोग लगाने का अर्थ है कि ब्रह्मांड की सभी सूक्ष्म दैवीय शक्तियों को एक साथ तृप्त करना है।

प्रति वर्ष की भांति इस बार भी पावन नवरात्रि की इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए श्रीमती सरोज भूपेन्द्र सिंह ने छप्पन भोग में 7 प्रकार के अनाज, 7 प्रकार के फल, 7 प्रकार के मेवे, कढ़ी, सूप, मिठाइयां, पेय पदार्थ, चटनी और औषधीय सामग्रियों इलायची, लौंग आदि 56 प्रकार की खाद्य सामग्रियों को दोनों मंदिरों में अर्पित किया है। यह व्यंजन खट्टे, मीठे, कड़वे, नमकीन, तीखे और कसैले सभी प्रकार के स्वादों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महाकाली और वैष्णोदेवी को प्रकृति का साक्षात स्वरूप माना जाता है, इसलिए प्रकृति से प्राप्त हर प्रकार के रस और अन्न को उन्हें समर्पित करना सर्वस्व दान का प्रतीक है जिससे हमारे क्षेत्र की धरती और सभी प्राणी धन-धान्य और सुख समृद्धि अर्जित करेंगे।