दो दमकल के भरोसे मंडला शहर का सिस्टम बना तमाशा 

 

मंडला में आग से सुरक्षा की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है... 75 हजार आबादी, 50 किलोमीटर का दायरा और सिर्फ दो दमकल वाहन... जबकि तीन फायर वाहन गैराज में कबाड़ बनकर खड़े हैं। गर्मी बढ़ रही है, आगजनी की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की नींद अब तक नहीं खुली। सवाल ये है कि आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है...?

 

नगर पालिका मंडला के पास फिलहाल सिर्फ दो चालू दमकल वाहन हैं, जिनके भरोसे पूरे शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों की आग बुझाने की जिम्मेदारी टिकी हुई है। हालात इतने खराब हैं कि दूर गांवों में आग लगने पर दमकल को मौके तक पहुंचने में लंबा वक्त लग जाता है... और तब तक लोगों की मेहनत, घर और फसल राख में तब्दील हो जाती है।

 

सबसे हैरानी की बात ये है कि नगर पालिका के पास कुछ साल पहले तक पांच दमकल वाहन थे... लेकिन लापरवाही और रखरखाव की कमी ने तीन बड़े वाहनों को कबाड़ बना दिया। करोड़ों की मशीनें अब गैराज में धूल खा रही हैं और जनता की सुरक्षा सिर्फ दो पुराने वाहनों के भरोसे छोड़ दी गई है।

 

संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए नगर पालिका के पास एक क्विक रिस्पांस व्हीकल जरूर है... लेकिन वो भी करीब दस साल पुराना हो चुका है। यदि ये वाहन भी खराब हुआ तो शहर की तंग बस्तियों में आग लगने पर हालात बेकाबू हो सकते हैं।

 

पूरी अग्निशमन व्यवस्था सिर्फ 18 कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। 6 चालक और 12 फायरमैन तीन शिफ्ट में दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि आखिर इतने सीमित संसाधनों से कब तक हजारों लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा की जाएगी...?

 

 स्थानीय नागरिकों ने बताया कि आग लगने पर दमकल देर से पहुंचती है, तब तक सबकुछ जल जाता है। शहर बढ़ रहा है लेकिन सुविधाएं घट रही हैं। प्रशासन को तुरंत नए वाहन देना चाहिए।

 

मंडला में फायर सिस्टम की ये बदहाल तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है... आखिर कब जागेगा प्रशासन...? कब मिलेंगे नए दमकल वाहन...? और अगर कल कोई बड़ा हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा...?