**मानपुर बाईपास सड़क: करोड़ों की सड़क खोदकर सो गया नगर परिषद ठेकेदार, "अंधा" प्रशासन तीन माह से खर्राटे भर रहा*
मानपुर। महज एक साल पहले 4.30 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से बनी मानपुर बाईपास सड़क आज गड्ढों में तब्दील होकर अपने ही निर्माण पर मातम मना रही है। नाली क्रॉसिंग के बहाने तीन महीने पहले जिस सड़क को नगर परिषद मानपुर के ठेकेदार अंकित सोनी ने बेरहमी से खोद डाला, वह आज तक वैसी ही पड़ी है — मानो प्रशासन ने इसे विधिवत "गड्ढा स्मारक" घोषित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी हो।
**शिकायतों का ढेर, कार्रवाई शून्य — फाइलें भी अब उबासी लेने लगीं**
पीडब्ल्यूडी विभाग, नगर परिषद मानपुर और खुद सड़क निर्माण ठेकेदार तक को बार-बार सूचित करने के बावजूद जमीन पर एक ईंट तक नहीं खिसकी। एसडीओ रवीना पटेल को दो माह पहले फोन पर सूचना दी गई, 181 पर भी विधिवत शिकायत ठोकी गई — मगर लगता है यह शिकायत भी सीधे रद्दी की टोकरी में जा गिरी। नगर परिषद का यह ठेकेदार चैन की नींद सो रहा है, मानो सरकारी खजाने से बनी सड़क खोदना कोई अपराध नहीं बल्कि उसका जन्मसिद्ध अधिकार हो, और विभाग उसे लोरी सुना रहा हो।
**"हमसे पूछा तक नहीं" — सड़क ठेकेदार का दर्द, विभाग की चुप्पी**
सड़क निर्माण ठेकेदार सौरव अट्रैक्शंस ने साफ कहा कि क्रॉसिंग के लिए पुलिया पहले से मौजूद थी, फिर भी नगर परिषद मानपुर के ठेकेदार अंकित सोनी ने बिना पूछे मनमाने ढंग से सड़क तोड़कर दोबारा पुलिया डाल दी — जबकि साल भर पुरानी यह सड़क अभी उनके मेंटेनेंस व गारंटी पीरियड में है। दो सप्ताह पहले पीडब्ल्यूडी को कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा गया, लेकिन विभाग की कलम मानो जाम पड़ गई है।
**सवाल जो प्रशासन के मुंह पर तमाचे की तरह हैं**
- साल भर पहले बनी करोड़ों की सड़क को बिना अनुमति खोदने की हिम्मत आई कहां से — किसका आशीर्वाद है इस पर?
- फोन सूचना और 181 की शिकायत के बावजूद दो महीने से कार्रवाई ठप क्यों?
- क्या नगर परिषद के एक ठेकेदार के आगे पूरा पीडब्ल्यूडी अमला घुटनों के बल बैठ चुका है?
**गड्ढों में गिरते बुजुर्ग-बच्चे, सोया प्रशासन**
रोज इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर, स्कूल जाते बुजुर्ग और बच्चे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। जनता के बीच अब खुलेआम चर्चा है कि साल भर पहले करोड़ों की लागत से बनी सड़क आखिर नगर परिषद के एक ठेकेदार की निजी "जागीर" कब से बन गई।
अब देखना यह है कि पीडब्ल्यूडी विभाग, सड़क ठेकेदार और नगर परिषद मानपुर के ठेकेदार अंकित सोनी मिलकर समय रहते होश में आते हैं और गड्ढा भरते हैं, या फिर किसी राहगीर की जान जाने के बाद ही जिम्मेदारों की गहरी निद्रा टूटेगी — तब तक के लिए विभाग को शुभरात्रि!
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