भोपाल का बड़ा तालाब यानी अपर लेक (फाइल फोटो) फोटो साभार Wikimedia Commons / Masterblaster3r, CC BY-SA 4.0

मध्यप्रदेश के 12 जिलों में इस साल सामान्य से 19 प्रतिशत से ज्यादा कम बारिश हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन जिलों के कलेक्टरों को खेती-किसानी, पेयजल और सिंचाई के लिए तत्काल विशेष कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कलेक्टर-कमिश्नर और एसपी-आईजी की समीक्षा बैठक ली। जनसंपर्क विभाग के मुताबिक बैठक में बताया गया कि प्रदेश में सामान्य वर्षा 949 मिलीमीटर है, जबकि इस साल वास्तविक वर्षा 908.4 मिलीमीटर हुई। यानी पूरे प्रदेश में करीब 4 प्रतिशत कम पानी गिरा।

प्रदेश के 34 जिलों में इस साल सामान्य बारिश दर्ज हुई है। कमी उन 12 जिलों में है जो ज्यादातर पश्चिमी मध्यप्रदेश और नर्मदापुरम संभाग में आते हैं।

पश्चिम MP के 12 जिले सबसे पीछे

बैठक में जिन 12 जिलों के नाम बताए गए, उनमें आलीराजपुर, धार, झाबुआ, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, पांढुर्णा, शाजापुर और छिंदवाड़ा शामिल हैं। इन सभी में सामान्य से 19 प्रतिशत से ज्यादा कम वर्षा हुई है।

मैप से समझें, किन जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम रही…

मैप से समझें, प्रदेश के किन 12 जिलों में सामान्य से 19% से ज्यादा कम बारिश हुई
मैप से समझें, प्रदेश के किन 12 जिलों में सामान्य से 19% से ज्यादा कम बारिश हुई

नक्शे में साफ दिखता है कि कम बारिश वाले जिले दो पट्टियों में हैं। पहली मालवा और निमाड़ की, दूसरी सतपुड़ा क्षेत्र की।

908.4 मिलीमीटर पर रुका प्रदेश का आंकड़ा

ग्राफिक से समझिए, इस सीजन में प्रदेश में कितनी बारिश हुई और सामान्य से कितनी कम रही…

ग्राफिक से समझिए, 949 मिलीमीटर सामान्य के मुकाबले 908.4 मिलीमीटर बारिश
ग्राफिक से समझिए, 949 मिलीमीटर सामान्य के मुकाबले 908.4 मिलीमीटर बारिश

प्रदेश स्तर पर 4 प्रतिशत की कमी छोटी दिखती है, लेकिन जिलों के स्तर पर तस्वीर अलग है।

कलेक्टरों को 3 मोर्चों पर विशेष प्लान बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में कहा कि प्रदेश के 12 जिलों में अल्प वर्षा की जानकारी मिली है। उन्होंने इन जिलों के कलेक्टरों से चर्चा कर सभी को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। निर्देशों के मुताबिक…

कम बारिश वाले जिलों के लिए निर्देश

  • खेती-किसानी, कलेक्टर तत्काल विशेष कार्य योजना तैयार करें
  • पेयजल, पीने के पानी के प्रबंधन की अलग योजना बने
  • सिंचाई, सिंचाई और अन्य प्रबंधन के लिए भी विशेष कार्य योजना
  • सबसे कम बारिश वाले इलाके, जिले के जिन क्षेत्रों में न्यूनतम वर्षा हुई, वहां विशेष ध्यान दिया जाए

आप पर क्या असर

अगर आप इन 12 जिलों में किसान हैं, तो जिला प्रशासन खेती-किसानी और सिंचाई के लिए विशेष कार्य योजना बनाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक यह योजना कलेक्टर स्तर पर तत्काल तैयार होनी है।

शहरों और गांवों में पीने के पानी के प्रबंधन के लिए भी अलग योजना बनाई जाएगी। जिले के जिन इलाकों में सबसे कम बारिश हुई है, वहां प्रशासन को विशेष ध्यान देने को कहा गया है। योजना का ब्योरा जारी होने पर संबंधित कलेक्टर कार्यालय से जानकारी ली जा सकती है।

15 अक्टूबर से सभी जिला अस्पतालों में चेस्ट क्लीनिक

मौसम बदलने के साथ बीमारियों को लेकर भी बैठक में निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने मौसम परिवर्तन से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष उपाय करने को कहा। उन्होंने कहा कि यह नागरिक स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है और सभी सावधानी बरतें।

जनसंपर्क विभाग के मुताबिक प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15 अक्टूबर से चेस्ट क्लीनिक शुरू किए गए हैं। मौसम बदलने पर लोगों को खांसी, जुकाम, गले और सीने में दर्द की शिकायत होती है। इन क्लीनिक में ऐसे मौसमी रोगों की जांच कर यह देखा जाएगा कि कहीं कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है।

चेस्ट क्लीनिक, जरूरी बातें

  • कहां, सभी जिला अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज
  • कब से, 15 अक्टूबर 2026
  • किन शिकायतों की जांच, खांसी, जुकाम, गले और सीने में दर्द
  • मकसद, मौसमी रोग की पहचान और गंभीर बीमारी की जांच

बारिश से टूटी सड़कें दीपावली से पहले सुधरेंगी

बैठक में बारिश के बाद रुके निर्माण कार्यों को तेज करने पर भी चर्चा हुई। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव ने बताया कि सड़कों की मरम्मत और अन्य निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की जरूरी मरम्मत दीपावली से पहले पूरी कर ली जाए और इसमें नगरीय निकायों के अधूरे काम भी शामिल किए जाएं। उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों और दुर्घटना संभावित जगहों पर सुरक्षा से जुड़ी कमियां प्राथमिकता से दूर करने को कहा।

अब आगे क्या

12 जिलों के कलेक्टरों को अब खेती, पेयजल और सिंचाई की विशेष कार्य योजना तैयार करनी है। स्वास्थ्य विभाग के चेस्ट क्लीनिक चालू हैं और लोक निर्माण विभाग सड़क मरम्मत में जुटा है। भोपाल समेत प्रदेश के आज के मौसम का पूर्वानुमान IMD भोपाल के बुलेटिन से अपडेट किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इस साल मध्यप्रदेश में कितनी बारिश हुई?

राज्य सरकार की समीक्षा बैठक में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक इस साल प्रदेश में 908.4 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि सामान्य वर्षा 949 मिलीमीटर है। यानी करीब 4 प्रतिशत कम।

MP के किन जिलों में सबसे कम बारिश हुई?

आलीराजपुर, धार, झाबुआ, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, पांढुर्णा, शाजापुर और छिंदवाड़ा में सामान्य से 19 प्रतिशत से ज्यादा कम वर्षा हुई।

कम बारिश वाले जिलों के लिए सरकार क्या कर रही है?

मुख्यमंत्री ने इन जिलों के कलेक्टरों को खेती-किसानी, पेयजल, सिंचाई और अन्य प्रबंधन के लिए तत्काल विशेष कार्य योजना तैयार करने और सबसे कम बारिश वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।

चेस्ट क्लीनिक कहां और कब से शुरू हुए हैं?

प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15 अक्टूबर से चेस्ट क्लीनिक शुरू किए गए हैं, जहां खांसी, जुकाम, गले और सीने में दर्द जैसी शिकायतों की जांच होती है।

स्रोत जनसंपर्क विभाग