इंदौर का ऐतिहासिक राजवाड़ा, फाइल फोटो फोटो साभार Wikimedia Commons / Bernard Gagnon, CC BY-SA 3.0

इंदौर में हुए 2 दिन के मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर समिट 2026 में प्रदेश के युवाओं के कौशल और रोजगार पर खास फोकस रहा। समिट के दूसरे दिन शनिवार को हुई राउंड टेबल बैठक में तय हुआ कि ITI, पॉलिटेक्निक और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण दिया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार 23 अक्टूबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में समिट का शुभारंभ किया था। जनसंपर्क विभाग के मुताबिक दूसरे दिन 5 पैनल चर्चाएं और 2 राउंड टेबल बैठकें हुईं, जिनमें उद्योगपतियों, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने एआई आधारित चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, जीसीसी, नीतिगत समन्वय और प्रतिभा विकास पर बात की।

समिट की 3 बड़ी बातें…

  • प्रशिक्षण. ITI, पॉलिटेक्निक और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को सिग्नल मापन, परीक्षण और पैकेजिंग जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाने पर जोर।
  • कौशल कार्यक्रम. IIT इंदौर और अन्य संस्थानों के सहयोग से कौशल कार्यक्रम पर सहमति बनी।
  • सप्लाई चेन. चिप पैकेजिंग, टेस्टिंग, स्पेशलिटी केमिकल्स, औद्योगिक गैसें और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के स्थानीय विनिर्माण पर चर्चा।

ITI और पॉलिटेक्निक के छात्रों को मिलेगा उद्योग वाला प्रशिक्षण

पहली राउंड टेबल बैठक की अध्यक्षता मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) के प्रबंध निदेशक श्री अंशुमन राज ने की। इसमें IIT खड़गपुर के प्रो. शीलेन्द्र कुमार और IIT इंदौर के प्रो. मुकेश कुमार शामिल हुए।

बैठक में कहा गया कि ITI, पॉलिटेक्निक और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को उद्योग के अनुरूप प्रशिक्षण मिलना चाहिए। सिग्नल मापन, परीक्षण और पैकेजिंग जैसे व्यावहारिक कौशल पर खास जोर रहा। स्टार्टअप्स को सहयोग देने और रक्षा सहित अलग अलग क्षेत्रों के लिए अनुसंधान पर भी बात हुई।

ग्राफिक से समझिए, समिट से युवाओं के लिए क्या संकेत निकले…

सेमीकंडक्टर समिट के दूसरे दिन कौशल और रोजगार से जुड़ी 5 प्रमुख बातें
सेमीकंडक्टर समिट के दूसरे दिन कौशल और रोजगार से जुड़ी 5 प्रमुख बातें

IIT इंदौर के साथ कौशल कार्यक्रम पर सहमति

दूसरी राउंड टेबल बैठक की अध्यक्षता MSME सचिव श्री जॉन किंग्सले ने की। इसमें सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को प्रदेश में मजबूत करने पर चर्चा हुई। चिप पैकेजिंग, टेस्टिंग, स्पेशलिटी केमिकल्स, औद्योगिक गैसें और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के स्थानीय विनिर्माण के साथ साझा परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं की बात रखी गई।

जनसंपर्क विभाग के मुताबिक IIT इंदौर और अन्य संस्थानों के सहयोग से कौशल कार्यक्रम पर सहमति बनी। इसमें मल्टीलेयर PCB विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का प्रशिक्षण शामिल है। यानी इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग पढ़ रहे युवाओं के लिए आगे नए ट्रेनिंग विकल्प खुल सकते हैं।

GCC और चिप डिजाइन में नौकरियों की संभावना

समिट का तीसरा पैनल मध्यप्रदेश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC और डिजाइन सेवाओं पर था। इसका संचालन ट्रूचिप सॉल्यूशंस के CEO श्री नितिन किशोर ने किया। क्वेस्ट ग्लोबल, मिराफ्रा, UST ग्लोबल और डिजिकॉम सेमीकंडक्टर्स के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल रहे।

“मध्यप्रदेश में जीसीसी एवं डिजाइन सेवाओं के विकास की असीम संभावनाएँ हैं।”

श्री जॉन किंग्सले, सचिव, MSME विभाग

GCC बड़ी कंपनियों के ऐसे केंद्र होते हैं जहां इंजीनियरिंग, डिजाइन और तकनीकी सेवाओं का काम होता है। ऐसे केंद्र आने पर इंजीनियरिंग स्नातकों को प्रदेश में ही काम के मौके मिल सकते हैं।

चिप डिजाइन के लिए प्रतिभा सबसे अहम

पांचवां पैनल चिप डिजाइन के लिए प्रतिभा विकास और अनुसंधान पर केंद्रित था। इसका संचालन NIELIT के महानिदेशक श्री एम.एम. त्रिपाठी ने किया। उन्होंने कहा कि ISM 2.0 में प्रतिभा सबसे महत्वपूर्ण घटक है। IIT कानपुर के प्रो. योगेश चौहान, ग्लोबलफाउंड्रीज, डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल और मेवेन सिलिकॉन के प्रतिनिधियों ने भी विचार रखे।

पहले पैनल में AI और सेमीकंडक्टर पर चर्चा हुई, जिसका संचालन रेनेसॉ की श्रीमती चित्रा हरिहरन ने किया। इंटेल के श्री अर्पण सिरकर और सिनॉप्सिस के श्री स्वप्निल गर्ज भी इसमें मौजूद रहे। इसी पैनल में MPSEDC के प्रबंध निदेशक ने प्रदेश की नीति पर बात रखी।

“मध्यप्रदेश सरकार ने सेमी कंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाया है। इंडिया सेमी कंडक्टर मिशन के पूरक के रूप में प्रदेश की सेमी कंडक्टर नीति लागू की गई है।”

श्री अंशुमन राज, प्रबंध निदेशक, MPSEDC

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में समय, निरंतर सहयोग, पर्याप्त सहायता और भरोसा जरूरी है और प्रदेश सरकार निवेशकों के साथ खड़ी है। दूसरे पैनल में सचिव श्री स्वतंत्र कुमार ने कहा कि भारत अब केवल असेंबली तक सीमित न रहकर डिजाइन और विनिर्माण की दिशा में बढ़ रहा है।

अब जानिए, देश में चिप डिजाइन ट्रेनिंग का दायरा

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन यानी ISM केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन का एक विशेष डिवीजन है। यह सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले योजनाओं को लागू करने वाली नोडल एजेंसी है।

पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के 18 जनवरी 2026 के बैकग्राउंडर के मुताबिक MeitY ने 2022 में चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम शुरू किया था, जिसका बजट 5 साल के लिए ₹250 करोड़ है। इसका लक्ष्य 85,000 इंडस्ट्री रेडी प्रोफेशनल तैयार करना है। अब तक 1 लाख से ज्यादा लोग चिप डिजाइन ट्रेनिंग में नामांकन करा चुके हैं और करीब 67,000 प्रशिक्षित हो चुके हैं।

C2S कार्यक्रमआंकड़ा
कुल लक्ष्य85,000 प्रोफेशनल
B.Tech छात्र69,000
M.Tech (VLSI फोकस)8,800
M.Tech (VLSI या एम्बेडेड सिस्टम्स)7,000
PhD स्कॉलर200
शामिल शैक्षणिक संस्थानकरीब 305

आगे क्या

समिट के निष्कर्ष में कहा गया कि मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं, अधोसंरचना और कनेक्टिविटी को उद्योग की जरूरतों से जोड़कर विस्तार, नवाचार और रोजगार के नए अवसर बनाए जाएंगे। IIT इंदौर के साथ बनी सहमति के बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम का स्वरूप, सीटें और आवेदन प्रक्रिया आधिकारिक रूप से घोषित होने पर ही युवाओं को इसकी पूरी जानकारी मिलेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर समिट 2026 कब और कहां हुआ?

समिट 23 और 24 अक्टूबर 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 अक्टूबर को इसका शुभारंभ किया।

समिट में ITI और पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए क्या बात हुई?

राउंड टेबल बैठक में ITI, पॉलिटेक्निक और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को उद्योग अनुरूप प्रशिक्षण और सिग्नल मापन, परीक्षण व पैकेजिंग जैसे व्यावहारिक कौशल देने पर जोर दिया गया।

IIT इंदौर के साथ क्या सहमति बनी?

IIT इंदौर और अन्य संस्थानों के सहयोग से कौशल कार्यक्रम पर सहमति बनी, जिसमें मल्टीलेयर PCB विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का प्रशिक्षण शामिल है।

चिप्स टू स्टार्टअप कार्यक्रम क्या है?

यह MeitY का 2022 में शुरू कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य 85,000 इंडस्ट्री रेडी चिप डिजाइन प्रोफेशनल तैयार करना है। इसका बजट 5 साल के लिए ₹250 करोड़ है।

स्रोत जनसंपर्क विभाग, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन